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    निजासात

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    *(म.न.84) दस चीज़ें नजिस हैं।

    1)पेशाब

    2)पख़ाना

    3)मनी (वीर्य)

    4)मुरदार

    5)ख़ून

    6)कुत्ता

    7)सुवर

    8)शराब

    9)काफ़िर

    10)निजासत ख़ाने वाले जानवर का पसीना

    पोशाब और पख़ाना

    *(म.न.85) इंसान और हर ख़ूने जहिन्दादार[1] हराम गोश्त हैवान का पेशाब पखाना नजिस है। लेकिन वह हराम गोश्त जानवर जो ख़ूने जहिन्दा दार नही है उनका पख़ाना पाक है मसलन वह मछली जिसका गोश्त हराम। और इसी तरह उन छोटे जानवरों का पख़ाना भी पाक है जिनमें गोश्त नही पाया जाता (जैसे मच्छर, खटमल, मक्खी, पिस्सु वग़ैरह ) लेकिन एहतियाते लाज़िम की बिना पर उन हराम गोश्त जानवरों के पेशाब से भी परहेज़ करना ज़रूरी है जो ख़ूने जहिन्दा दार नही है।

    (म.न.86) जिन परिन्दों का गोश्त हराम है उनका पेशाब और बीँट पाक है लेकिन इस से परहेज़ बेहतर है।

    *(म.न.87) निजासत खाने वाले हैवान का पेशाब और पख़ाना नजिस है। और इसी तरह भेड़ के उस बच्चे का पेशाब पख़ाना भी नजिस है जिसने सूवरनी का दूध पिया हो। इसकी तफ़सील (व्याखया) बाद में बयान की जायेगी। इसी तरह उस जानवर का पेशाब पख़ाना बी नजिस है जिसके साथ किसी इंसान ने बद फ़ेला (संभोग) किया हो।

    मनी (वीर्य)

    *(म.न.88) इंसान और हर ख़ूने जहिन्दा दार जानवर की मनी नजिस है। एहतियाते लाज़िम की बिना पर चाहे वह हलाल गोश्त जानवर ही क्योँ न हो।

    मुरदार (मुर्दा)

    (म.न.89) इंसान का बदन मरने के बाद नजिस हो जाता है इसी तरह हर ख़ूने जहिन्दा दार जानवर का बदन भी मरने के बाद नजिस होता है चाहे वह अपनी तबई मौत मरें या उन्हें शरई तरीक़े के अलावा किसी दूसरे तरीक़े से जिबह किया गया हो। मछली चूँकि ख़ूने जहिन्दा दार नही है इस लिए अगर पानी में भी मर जाये तो पाक है।

    (म.न.90) लाश के वह हिस्से जिनमें जान नही पाई जाती (जैसे रुवाँ, बाल, हड्डियाँ और दाँत) पाक हैं।

    (म.न.91) जब किसी इंसान या ख़ूने जहिन्दादार जानवर के बदन से उसकी ज़िन्दगी में गोश्त या कोई दूसरा ऐसा हिस्सा जिसमें जान पाई जाती हो अलग कर दिया जाये तो वह नजिस है।

    (म.न.92) अगर होंटोँ या बदन के किसी दूसरे हिस्से से बारीक सी पपड़ी उख़ाड़ दी जाये तो वह पाक है।

    * (म.न.93) मुर्दा मुर्ग़ी के पेट से निकलने वाला अंडा पाक है। लेकिन उसका छिलका धोना ज़रूरी है।

    (म.न.94) अगर भेड़ या बकरी का बच्चा घास ख़ाने के क़ाबिल होने से पहले मर जाये तो उसके शीरदान में जमा हुआ दूध पाक होता है। लेकिन शीरदान के बाहर से धो लेना ज़रूरी है।

    (म.न.95) बहने वाली दवाईयाँ, ईतर, तेल, जूतों की पालिश और साबुन जिन्हें बाहर दरआमद (आयात) किया जाता है अगर उनकी निजासत के बारे में यक़ीन न हो तो पाक है।

    (म.न.96) गोश्त, चर्बी और चमड़ा जिसके बारे में एहतेमाल(शंका) हो कि किसी ऐसे जानवर का है जिसे शरई तरीक़े से ज़िबह किया गया है पाक है। लेकिन अगर यह चीज़ें किसी काफ़िर से ली गई हों या किसी ऐसे मुसलमान से ली गई हो जिसने काफ़िर से ली हो और यह छान बीन न की हो कि यह ऐसे जानवर की हैं जिसे शरई तरीक़े से ज़िबह किया गया है या नही तो ऐसे गोश्त और चर्बी का खाना हराम है, अलबत्ता ऐसे चमड़े पर नमाज़ जायज़ है। लेकिन अगर यह चीज़े मुसलमानों के बाज़ार से या किसी मुसलमान से ख़रीदी जायें और यह मालूम न हो कि इस से पहले यह किसी काफ़िर से खरीदी गई थी या इस बात का एहतेमाल पाया जाता हो कि तहक़ीक़ कर ली गई है तो चाहे काफ़िर से ही क्यों न खरीदी जाये इस चमड़े पर नमाज़ पढ़ना और उस गोश्त या चर्बी का खाना जायज़ है।

    ख़ून

    (म.न.97) इंसान और हर ख़ूने जहिन्दा दार जानवर का ख़ून नजिस है। बस ऐसे जानवर जो ख़ूने जहिन्दा दार नही हैं उनका ख़ून पाक है जैसे मच्छर और मछली।

    *(म.न.98)जिन जानवरों का गोश्त हलाल है अगर उन्हें शरई तरीक़े से जिबह किया जाये और ज़रूरी मिक़दार में उसका ख़ून ख़ारिज हो जाये तो जो ख़ून बदन में बाकी रह जाये वह पाक है। लेकिन अगर निकलने वाला खून जानवर के साँस खैँचने या उसका सर उँची जगह पर होने की वजह से बदन में पलट जाये तो वह नजिस होगा।

    *(म.न.99) मुर्ग़ी के जिस अँडे में ख़ून का ज़र्रा हो एहतियाते मुस्तहब की बिना पर उस से परहेज़ ज़रूरी है। लेकिन अगर ख़ून ज़र्दी में हो तो जब तक उसका नाज़ुक पर्दा न फट जाये तो सफेदी बग़ैर किसी इश्काल के पाक है।

    (म.न.100) वह ख़ून जो कभी कभी दूध निकालते हुए नज़र आता है वह नजिस है और दूध को भी नजिस कर देता है।

    (म.न.101) अगर दातोँ की लकीरों से निकलने वाला ख़ूँन थूक में मिल कर ख़त्म हो जाये तो उस थूक से बचना लाज़िम नही है।

    *(म.न.102) जो ख़ून चोट लगने की वजह से नाख़ुन या खाल के नीचे जम जाये तोअगर उसकी शक्ल ऐसी हो कि लोग उसे ख़ून न कहें तो वह पाक है और अगर ख़ून कहें और ज़ाहिर हो जाये तो नजिस है। अगर ऐसी हालत में नाख़ून या खाल में सुराख़ हो जाये और ख़ून का निकालना या वज़ू व ग़ुस्ल के लिए उस जगह को पाक करना बहुत ज़्यादा तकलीफ़ का सबब हो तो ऐसी हालत में तयम्मुम कर लेना चाहिए।

    (म.न.103) अगर किसी शख़्स को यह पता न चले कि खाल के नीचे ख़ून जम गया है या चोट लगने की वजह से खाल का रंग ऐसा हो गया है तो वह पाक है।

    *(म.न.104) अगर खाना बनाते वक़्त ख़ून का एक ज़र्रा भी उस में गिर जाये तो वह पूरा खाना और बरतन एहतियाते लाज़िम की बिना पर नजिस हो जायेगा।और वह उबाल, हरारत और आग से पाक नही हो सकता।

    (म.न.105) वह ज़र्द मवाद जो ज़ख़्म के ठीक होने के वक़्त ज़ख़्म के चारो तरफ़ जमा हो जाता है अगर उसके बारे में यह न मालूम हो कि इसमें ख़ून मिला हुआ है या नही तो वह पाक है।

    कुत्ता और सुवर

    (म.न.106) ज़मीन पर रहने वाले कुत्ते और सुवर नजिस हैं यहाँ तक कि उनके बाल, हड्डियाँ, पंजे, नाख़ुन और उस से निकलने वाली रतूबतें भी नजिस हैं। लेकिन समुन्द्री कुत्ता और सुवर पाक हैं।

    काफ़िर

    *(म.न.107) काफ़िर यानी वह शख़्स जो अल्लाह के वजूद या उसकी वहदानियत (अद्वैतता) का इनकार करे, नजिस है। और इसी तरह ग़ुल्लात, (यानी वह लोग जो आइम्मा-ए- मासूमीन में से किसी एक को ख़ुदा कहें या यह कहें कि अल्लाह उनमे समा गया है।) नासबी व ख़ारजी(वह लोग जो आइम्मा-ए-मासूमीन अलैहिमुस्सलाम से बैर या बुग़्ज़ रखे।) नजिस है।

    इसी तरह वह शख़्स जो किसी नबी की नबूवत या ज़रूरीयाते दीन(वह चीज़े जिन्हें मुसलमान दीन का जुज़ समझते हैं जैसे नमाज़ रोज़ा वग़ैरह) में से किसी एक यह जानते हुए कि यह ज़रूरीयाते दीन है इंकार करे, इसी तरह मशहूर रिवायत की बिना अहले किताब (यहूदी ,ईसाई और मजूसी) भी जो ख़ातमुल अंबिया हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम की रिसालत का इक़रार नही करते नजिस हैं। अगरचे उनके पाकीज़गी का हुक्म बईद नही है लेकिन फिर भी उनसे परहेज़ बेहतर है।

    (म.न.108) काफ़िर का तमाम बदन नजिस है यहाँ तक कि उसके बाल, नाख़ुन और उसके बदन से निकलने वाली रतूबतें भी नजिस हैं।

    *(म.न.109) अगर किसी नाबालिग़ बच्चे के माँ बाप या दादा दादी काफ़िर हों तो वह बच्चा भी नजिस है। अलबत्ता अगर वह सूझ बूझ रखता हो इस्लाम का इज़हार करता हो और इनमें से (माँ बाप या दादा दादी में से) एक भी मुसलमान हो तो इस तफ्सील के मुताबिक़ जो मलसा नम्बर 217 में बयान होगी बच्चा पाक है।

    *(म.न.110) अगर किसी शख़्स के बारे में यह जानकारी न हो कि मुसलमान है या नही और उसके मुसलमान होने की कोई निशानी भी न हो तो वह पाक समझा जायेगा। लेकिन उस पर इस्लाम के दूसरे अहकाम जारी नही होंगे। जैसे न वह किसी मुसलमान औरत से शादी कर सकता है और न ही उसे मुसलमानों के क़ब्रिस्तान में दफ़्न किया जा सकता है।

    (म.न.111) जो शख़्स (ख़ानदाने रिसालत के) बारह इमामों में से किसी एक को भी दुश्मनी की वजह से गाली दे वह नजिस है।

    शराब

    *(म.न.112) शराब नजिस है। इसी तरह एहतियाते मुस्तहब की बिना पर मस्त करने वाली हर वह चीज़ नजिस है जो तरल हों। लेकिन नशा करने वाली सूखी चीज़ें(जैसे भंग, चरस वग़ैरह) पाक हैं चाहे उसमें कोई तरल चीज़ ही क्योँ न मिला दी जाये।

    (म.न.113) वह अलकोहल जो दरवाज़ों खिड़कियों मेज़ो वग़ैरह पर रंग करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है उफसकी तमाम क़िस्में पाक हैं।

    (म.न.114) अगर अंगूर और अंगूर का रस ख़ुद बखुद या उबालने पर ख़मीर हो जाये तो पाक है लेकिन उसका खाना पीना हराम है।

    (म.न.115) खजूर, मुनक़्क़ा, किशमिश और उनका शीरा अगर खमीर भी हो जाये तब भी पाक है और उनका खाना पीना भी हलाल है।

    *(म.न.116) “फ़ुक़्क़ाअ” वह चीज़ जो जौ से तैय्यार की जाती है और उसे आबे जौ कहते है उसका पीना हराम है और उसका नजिस होना भी इश्काल से ख़ाली नही है। लेकिन तिब्बी क़ायदे के मुताबिक़ तैय्यार किया गया आबे जौ पाक है।

    निजासत खाने वाले जानवर का पसीना

    *(म.न.117) निजासत खाने वाले उँट का पसीना और हर उस जानवर का पसीना जिसे इंसानी निजासत खाने की आदत हो नजिस है।

    *(म.न.118) जो हराम तरीक़े से जुनुब हो (अपना वीर्यपात करे) उसका पसीना पाक है लेकिन एहतियाते मुस्तहब यह है कि वह उस पसीने के साथ नमाज़ न पढ़े। और हैज़ (मासिक धर्म) की हालत में अपनी बीवी के साथ जिमाअ (संभोग) करने वाले के लिए भी यही हुक्म है जबकि वह उसके मासिक के बारे में जानता हो।

    (म.न.119) अगर कोई शख़्स अपनी बीवी से उस वक़्त जिमाअ(संभोग) करे जिसमें जिमाअ करना हराम है (जैसे रमज़ानुल मुबारक के महीने में दिन के वक़्त ) तो उसका पसीना हराम से जुनुब होने वाले के पसीने का हुक्म नही रखता।

    (म.न.120) अगर हराम तरीक़े से जुनुब होने वाला ग़ुस्ल के बजाये तयम्मुम करे और तयम्मुम के बाद उसे पसीना आजाये तो इस पसीने का हुक्म वही है जो तयम्मुम से पहले वाले पसीने का था।

    *(म.न.121) अगर कोई हराम तरीक़े से जुनुब हो जाये और फ़िर उस औरत से जिमा (संभोग) करे जो उसके लिए हलाल है तो उसके लिए एहतियाते मुस्तहब यह है कि उस पसीने के साथ नमाज़ न पढ़े और अगर पहले उस औरत से जिमाअ करे जो उसके लिए हलाल है और फिर बाद में हराम तरीक़े से जुनुब हो तो उसका पसीना हराम से जुनुब होने वाले के पसीने का हुक्म नही रखता।

    निजासत साबित होने के तरीक़े

    *(म.न. 122) हर चीज़ की निजासत तीन तरीक़ो से साबित होती है।

    1) इंसान को ख़ुद यक़ीन व इतमिनान हो कि वह चीज़ नजिस है। अगर किसी चीज़ के नजिस होने के बारे में सिर्फ़ गुमान हो तो उस चीज़ से परहेज़ करना लाज़िम नही है। लिहाज़ा चाय की दुकानों और होटलों में जहाँ पर लापरवाह किस्म के ऐसे लोग खाते पीते हैं जो निजासत व पाकीज़गी का लिहाज़ नही रखते उस वक़्त तक खाना खाने और चाय पीने में कोई हरज नही है जब तक इंसान को यह यक़ीन न हो जाये कि जो खाना उसके लिए लाया गया है नजिस है।

    2) किसी के पास कोई चीज़ हो और वह उस चीज़ के बारे में कहे कि यह नजिस है और वह शख़्स झूट भी न बोलता हो तो वह चीज़ नजिस है। मसलन अगर किसी शख़्स की बीवी या नौकर कहे कि यह चीज़ जो मेरे पास है नजिस है तो वह चीज़ नजिस मानी जायेगी।

    3) अगर दो आदिल आदमी किसी चीज़ के बारे में कहें कि यह नजिस है तो वह नजिस मानी जायेगी इस शर्त के साथ कि वह इस के नजिस होने की वजह बयान करें।

    (म.न. 123) अगर कोई शख़्स मसला न जान ने की बिना पर यह न जान सके कि यह चीज़ नजिस है या पाक तो उसे चाहिए कि मसला मालूम करे जौसे उसे यह मालूम न हो कि चूहें की मेगनी पाक है यै नजिस तो उसके लिए ज़रूरी है कि वह इस बारे में मसला मालूम करे । लेकिन उगर मसला जानता हो और किसी चीज़ के बारे में शक करे कि पाक है या नजिस मसलन उसे शक हो यह चीज़ ख़ून है या नही या यह न जानता हो कि मच्छर का ख़ून है या इंसान का तो वह पाक माना जायेगा और उसके बारे में छान बीन करना भी लाज़िम नही है।

    (म.न. 124) अगर किसी नजिस चीज़ के बारे में शक हो कि (बाद में) पाक हुई या नही तो वह चीज़ नजिस है।इसी तरह अगर किसी पाक चीज़ के बारे में शक हो कि (बादमें) नजिस हो गई है या नही तो वह पाक है। अगर कोई शख़्स इन चीज़ों के नजिस या पाक होने के बारे में पता भी लगा सकता हो तो तब भी छान बीन ज़रूरी नही है।

    (म.न. 125) अगर कोई शख़्स जानता हो कि यह दो बरतन या दो कपड़े जो उसके इस्तेमाल में है इन में से एक नजिस हो गया है लेकिन उसको यह पता न हो कि इनमें से कौनसा नजिस हुआ है तो दोनो से ही परहेज़ ज़रूरी है।और अगर उसके पास दो कपड़े हो एक उसका अपना और एक दूसरे का और उसको यह पता न चले कि उसका अपना कपड़ा नजिस हुआ है या वह कपड़ा जिसको वह इस्तेमाल नही करता और वह किसी दूसरे इंसान का माल है तो यह ज़रूरी नही है कि अपने कपड़े से परहेज़ करे।


    [1] ख़ूने जहिन्दा दार उन जानवरो को कहा जाता जिनकी रग काटने पर ख़ून उछल कर निकलता है।