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    नेजासात के अहकामः

    नेजासात के अहकामः
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    नेजासात के अहकामः
    (आयतुल्लाह ख़ामेनई की नज़र में)

    सवाल 266: क्या ख़ून पाक है?
    जवाबः जिन जानदारों का ख़ून उछल कर निकलता हो उनका ख़ून नजिस है।
    सवाल 267: वो ख़ून जो इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी में इंसान के सर को तलवार से टकराने के बाद जारी होता है और उसे बहने वाले ख़ून की छींटें मजलिसे अज़ा में शिरकत करने वालों के सरों और चेहरों पर पड़ती हैं तो क्या वो ख़ून पाक है या नहीं ?

    जवाबः इंसान का ख़ून हर हाल में नजिस है।
    सवाल 268: क्या धुलने के बाद कपड़े पर मौजूद ख़ून का हलके रंग का धब्बा नजिस है
    जवाबः अगर ख़ुद ख़ून ख़त्म हो जाये और सिर्फ़ रंग बाक़ी रह जाये जो धोने से न जाये तो वो पाक है।
    सवाल 269: अगर अंडे में ख़ून का एक धब्बा हो तो इस का हुक्म क्या है?
    जवाबः पाक है, लेकिन उसका खाना हराम है।
    सवाल 270: हराम काम के ज़रीये मुजनिब (यानी जिस पर ग़ुस्ले जनाबत वाजिब हो जाता है) होने वाले शख़्स और निजासत ख़ोर हैवान के पसीने का क्या हुक्म है?
    जवाबः निजासत ख़ोर उूंट का पसीना नजिस है, लेकिन इस के अलावा दूसरे निजासत ख़ोर हैवानात और इसी तरह हराम काम से मुजनिब (यानी जिस पर ग़ुस्ले जनाबत वाजिब हो जाता है) होने वाले शख़्स के पसीने के बारे में ज़्यादा मज़बूत बात ये है कि वो पाक है, लेकिन एहतियाते वाजिब ये है कि हराम काम से मुजनिब (यानी जिस पर ग़ुस्ले जनाबत वाजिब हो जाता है) होने पर जो पसीना आये उसमें नमाज़ न पढ़ी जाये।
    सवाल 271: मय्यत को सिदर के पानी और काफ़ूर के पानी से ग़ुस्ल देने के बाद और ख़ालिस पानी से ग़ुस्ल देने से पहले जो क़तरे मय्यत के बदन से टपकते हैं क्या वो पाक हैं या नजिस ?
    जवाबः मय्यत का बदन उस वक़्त तक नजिस है जब तक तीसरा ग़ुस्ल पूरा न हो जाये।
    सवाल 272: हाथों, होठों या पैरों से कुछ औक़ात (कभी-कभी) जो खाल जुदा होती है, वो पाक है या नजिस?
    जवाबः होथों, होंठों या बदन के दूसरे हिस्सों से खाल के जो बारीक छिलके ख़ुद ब ख़ुद जुदा हो जाते हैं वो पाक हैं ।
    सवाल 273: जंगी सफ़र पर एक शख़्स को ऐसी हालत पेश आई कि वो सुवर को मारने और उसे खाने पर मजबूर हुआ, क्या उसके बदन का पसीना और थूक नजिस है ?
    जवाबः हराम व नजिस गोश्त खाने वाले इंसान के बदन की रतूबत और थूक नजिस नहीं हैं लेकिन रतूबत वाली जो चीज़ भी सुवर के गोश्त से टच होगी वो नजिस हो जायेगी।
    सवाल 274: पेन्टिंग और तसवीरें बनाने में बालों वाले ब्रश का इस्तेमाल किया जाता है। उनकी बेहतरीन क़िस्म के सुवर के बालों से बनी हुई होती है और ग़ैर इस्लामी मुलकों से मंगवाई जाती हैं ऐसे बु्रश हर जगह ख़ास तौर से एैडवरटाईजि़ंग के लिए और सक़ाफ़ती मरकज़ों में इस्तेमाल किये जाते हैं पस इस क़िस्म के ब्रश के इस्तेमाल के सिलसिले में शरई हुक्म क्या है?
    जवाबः सुवर के बाल नजिस हैं और उन को ऐसे कामों में इस्तेमाल करना जायेज़ नहीं है जिन में शरअन तहारत शर्त है लेकिन उन कामों में उनको इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं जिन में तहारत शर्त नहीं हैं और अगर उनके बारे में ये मालूम न हो कि वो सुवर के बालों से बने हुए हैं या नहीं तो उन का इस्तेमाल उन कामों में भी ऐतराज़ नहीं है जिन में तहारत शर्त है।
    सवाल 275: क्या ग़ैर इस्लामी मुल्कों से निकलने वाला गोश्त हलाल है? नीज़ तहारत व निजासत के लिहाज़ से उसका क्या हुक्म है?
    जवाबः जब तक उसका ज़िब्ह शरई साबित न हो जाये (जब तक इस बात का यकीन न हो जाये कि जिस जानवर का ख़ून है उसको इस्लामी ऐतेबार से काटा गया है) तो वो हराम है लेकिन जब तक उस के ज़िब्हे शरई होने का यक़ीन हो वो पाक है।
    सवाल 276: चमड़े और दूसरे जानवरों के जिस्म से बनी हुई चीज़ों के बारे में आपकी राये क्या है जो ग़ैरे इस्लामी मुल्कों से आते हैं ।
    जवाबः अगर जानवर के शरई ज़बह होने का यक़ीन हो तो पाक हैं लेकिन अगर यक़ीन हो के शरई तरीक़े से ज़बहा नहीं हुआ तो नजिस हैं।
    सवाल 277: अगर मुजनिब (यानी जिस पर ग़ुस्ले जनाबत वाजिब हो जाता है) का लेबास (कपड़े) मनी से नजिस हो जाये तो अव्वलः ये कि अगर हाथ या उस कपड़े में से कोई एक गीला हो तो हाथ से उस लेबास (कपड़े) को छूने का क्या हुक्म है? औैर दूसरे क्या मुजनिब (यानी जिस पर ग़ुस्ले जनाबत वाजिब हो जाता है) के लिए जायेज़ है कि वो किसी और शख़्स को वो लेबास (कपड़े) पाक करने के लिए दे ? नीज़ क्या मुजनिब के लिए ज़रूरी है कि वो धोने वाले शख़्स को बताये कि ये नजिस है?
    जवाबः मनी नजिस है और जब उस से कोई चीज़ लगे तो वो भी नजिस हो जायेगी, और लेबास (कपड़े) धोने वाले को ये बताना ज़रूरी नहीं है कि वो नजिस है लेकिन साहिबे लेबास (कपड़े) को जब तक उसकी तहारत का यक़ीन न हो जाये उस पर तहारत के आसार ज़ाहिर नहीं कर सकता।
    सवाल 278: पेशाब करने के बाद इसतेबरा करता हूं, लेकिन उस के साथ एक बहने वाली रुतूबत निकलती है जिस से मनी की बू आती है क्या वो नजिस है? और इस सिलसिलें में नमाज़ के लिए मेरा हुक्म बयान फ़रमायें ?
    जवाबः अगर उस के मनी होने का यक़ीन न हो और उस में मनी निकलने के सिलसिले में जो शरई अलामतें बयान हुई हैं वो भी न पाई जायें तो वो पाक है और उस पर मनी का हुक्म नहीं लगेगा।
    सवाल 279: क्या हराम गोश्त परिन्दों जैसे उक़ाब, तोता, कव्वा और जंगली कव्वे का पाख़ाना नजिस है?
    जवाबः हराम गोश्त परिन्दों का पाख़ाना नजिस नहीं है।
    सवाल 280: मराजए एज़ाम की, तौज़ीहुल मसाएलों में लिखा है कि उन हैवानात और परिन्दों का पैख़ाना नजिस है जिन का गोश्त हराम है तो जिन हैवानात का गोश्त हलाल है जैसे गाय, बकरी या मुर्ग़ी क्या इन का पाख़ाना नजिस है या नहीं ?
    जवाबः हलाल गोश्त जानवरों चाहे परिन्दे हों या दूसरे जानवर उनका पाख़ाना पाक है और हराम गोश्त परिन्दों का पाख़ाना भी पाक है।
    सवाल 281: अगर बैतुल ख़ला के क़दमचे के अतराफ़ या उस के अन्दर निजासत लगी हो और उस को कुर भर पानी या क़लील पानी से धोया जाये लेकिन एैन निजासत बाक़ी रह जाये तो क्या वो जगह जहां एैने निजासत न लगी हो बल्कि सिर्फ़ धोने वाला पानी उस तक पहुंचा हो, नजिस है या पाक ?
    जवाबः जिस जगह तक नजिस पानी नहीं पहुंचा, वो पाक है।
    सवाल 282: अगर मेहमान मेज़बान के घर की किसी चीज़ को नजिस करदे तो क्या उस पर उस के बारे में मेज़बान को आगाह करना वाजिब है?
    जवाबः खाने पीने वाली चीज़ों और खाने के बरतनों के अलावा दूसरी चीज़ों के सिलसिले में आगाह करना ज़रूरी नहीं है।
    सवाल 283: क्या पाक चीज़ मुतनज्जिस (नजिस करने वाली चीज़ों) से मिलने के बाद नजिस हो जाती है या नहीं?
    और अगर नजिस हो जाती है तो ये हुक्म कितने ज़रीयों तक जारी होगा?
    जः ऐने निजासत से लगने वाली चीज़ नजिस हो जाती है अगर फिर पाक चीज़ से मिल जाये और उन में से एक तर हो तो वो पाक चीज़ नजिस हो जायेगी और अगर फिर ये पाक चीज़ जो मुतनज्जिस (जो चीज़ें नजिस होती हैं) से मुलाक़ात के बाद नजिस हो गयी हैं अगर पाक चीज़ के साथ मिल जाये तो एहतियात की बिना पर उस से लगने वाली तीसरी चीज़ भी नजिस हो जाती है लेकिन ये तीसरी मुतानज्जिस चीज़ किसी और चीज़ को नजिस नहीं करेगी ।
    सवाल 284: क्या जिस जानवर को शरई तरीक़े से ज़िब्ह नहीं किया गया उसकी खाल के जूते इस्तेमाल करने की सूरत में वुज़ू से पहले हमेशा पैरों का धोना वाजिब है? कुछ कहते हैं अगर जूते के अन्दर पैरों को पसीना आजाये तो वाजिब है और मैने देखा है कि हर क़िस्म के जूतों में पैरों से थोड़ा बहुत पसीना ज़रूर निकलता है इस मसअले में आपकी क्या राये है?
    जवाबः अगर यक़ीन हो कि जूता ऐसे जानवर की खाल का बना हुआ है जिसे शरई तरीक़े से ज़िब्ह नहीं किया गया था और यक़ीन हो कि ज़िक्र किये गऐ जूते में पैर से पसीना निकला है तो नमाज़ के लिए पैरों को धोना वाजिब है लेकिन अगर शक हो कि पसीना निकला है या नहीं या शक हो कि जिस जानवर की खाल से इसे बनाया गया है उसे शरई तरीक़े से ज़िब्ह किया गया था या नहीं तो पाक है।
    सवाल 285: उस बच्चे के गीले हाथ उसकी नाक के पानी और उसका जूठा खाने का क्या हुक्म है जो हमेशा ख़ुद को नजिस करता रहता है और उन बच्चों का क्या हुक्म है जो अपने गीले हाथों से अपने पैर छूते हैं ?
    जवाबः जब तक उनके नजिस होने का यक़ीन हासिल न हो उस वक़्त तक ये पाक हैं
    सवाल 286: मैं मसूढ़ों के मर्ज़ में मुबतला हूं और डॉक्टर के मशवरे के मुताबिक़ उनकी मालिश करना ज़रूरी है इस अमल से मसूढ़ों के कुछ हिस्से काले हो जाते हैं गोया उनके अन्दर ख़ून जमा हो और जब उनपर टिशू पेपर रखता हूं तो उसका रंग लाल हो जाता है इसलिए मैं अपना मूंह कुर पानी से पाक करता हूं इसके बावजूद वो जमा हुआ ख़ून काफ़ी देर तक बाक़ी रहता है और धोने से ख़त्म नहीं होता पस कुर के पानी से हटने के बाद जो पानी मेरे मूंह के अन्दर दाख़िल हुआ है और उन हिस्सों पर लगा है और फिर मूंह से निकलता है क्या वो नजिस है या उसे लुआबे दहन (थूक) का जुज़ शुमार किया जायेगा और वो पाक होगा?
    जवाबः पाक है लेकिन एहतियात ये है कि उस से परहेज़ किया जाये ।
    सवाल 287: ये पूछना चाहता हूं कि मैं जो खाना खाता हूं और वो मसूढ़ों में जमा शुदा ख़ून के हिस्से से लगता है क्या वो नजिस है या पाक ? और अगर नजिस है तो क्या उस खाने को निगलने के बाद मूंह का अन्दरूनी हिस्सा नजिस रहता है?
    जवाबः ज़िक्र किये गये बयान में खाना नजिस नहीं है और उसके निगलने में कोई हर्ज नहीं है और मूंह के अन्दर का हिस्सा भी पाक है।
    सवाल 288: एक ज़माने से मशहूर है कि मेकप का समान बच्चे की उस नाफ़ से तय्यार किया जाता है जिसे उसकी पैदाइश के बाद उस से जुदा करते हैं या ख़ुद जनीन की मय्यत से तैयार किया जाता है हम कभी कभी मेकप की चीज़ें इस्तेमाल करते हैं बल्कि कुछ औक़ात (कभी-कभी) तो लिपिस्टिक हल्क़ के नीचे भी उतर जाती है तो क्या ये नजिस है?
    जवाबः मेकप की चीज़ों को नजिस होने की अफ़वाहें कोई शरई दलील नहीं है और जब तक शरीयत के भरोसे मन्द तरीक़ों से उनकी नजासत साबित नहीं होती उस वक़्त तक उनको इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं है।
    सवाल 289: हर लेबास (कपड़े) या कपड़े को धोते वक़्त उस से बहुत ही बारीक रूवें रहते हैं और जब हम कपड़े धोने वाले टब के पानी को देखते हैं तो उस में ये बारीक रूवें नज़र आते हैं पस अगर टब पानी से भरा हुआ हो और उसका इत्तेसाल नल के पानी से हो तो जब मैं टब में लेबास (कपड़े) को ग़ोता देता हूं और टब से पानी बाहर गिरने लगता है तो टब से गिरने वाले पानी में उन रूवों की मौजूदगी की वजह से मैं एहतियातन हर जगह को पाक करता हूं या जब मैं बच्चों के नजिस कपड़े उतारता हूं तो उस जगह को भी पाक करता हूं जहां लेबास (कपड़े) उतारा गया था चाहे वो जगह ख़ुश्क ही हो इसलिए कि मैं कहता हूं कि वो रूवें इसी जगह गिरे हैं पस क्या ये एहतियात ज़रूरी है?
    जवाबः जो लेबास (कपड़े) धोने के लिए टब में रखा जाता है और फिर उस पर नल से पानी डाला जाता है जो उसे पूरी तरह घेर लेता है तो ये लेबास (कपड़े), टब, पानी और वो रूवें जो लेबास (कपड़े) से जुदा या उसके अन्दर जगह जगह होते हैं और पानी पर नज़र आते हैं और पानी के साथ टब से बाहर गिरते हैं सब पाक हैं और वो रूवें या ग़ुबार जो नजिस लेबास (कपड़े) से जुदा होते हैं वो भी पाक हैं मगर जब यक़ीन हो कि ये नजिस हिस्से से जुदा हुए हैं और जब शक हो कि नजिस लेबास (कपड़े) से जुदा हुए हैं या नहीं या शक हो कि उनकी जगह नजिस है या नहीं तो एहतियात करना ज़रूरी नहीं है।
    सवाल 290: उस रुतूबत की मिक़दार क्या है जो एक चीज़ से दूसरी चीज़ में जज़्ब हो जाती है?
    जवाबः जज़्ब करने वाली रुतूबत का ये मेयार है कि कोई गीली चीज़ जब दूसरी चीज़ को लगे तो उस की रुतूबत उस दूसरी चीज़ की तरफ़ सरायत कर जाये ।
    सवाल 291: उन कपड़ों के पाक होने का क्या हुक्म है जो ड्राई क्लीनिंग पर दिये जाते हैं? इस बात की वज़ाहत कर देना ज़रूरी है कि दीनी अक़लियतें ‘‘मसलन यहूदी और ईसाई वग़ैरा’’ भी अपने कपड़े धोने और स्त्री करने के लिए उन्हीं जगहों पर देते हैं और ये भी मालूम है कि ड्राई क्लीन करने वाले, कपड़े धोने में कैमिकल मवाद इस्तेमाल करते हैं ।
    जवाबः जो कपड़े र्डाई क्लीनिंग में दिये जाते हैं, अगर वो पहले से नजिस न हों तो पाक हैं और ‘‘एहले किताब’’ दीनी अक़लियतों के कपड़ों के साथ लगना उनके नजिस होने का सबब नहीं बनता।
    सवाल 292: जो कपड़े घर की आटोमैटिक कपड़े धोने वाली मशीन में धोये जाते हैं क्या वो पाक हो जाते हैं या नहीं? मज़कूरा मशीन इस तरह काम करती है कि पहले चक्कर में मशीन कपड़ों को धोने वाले पाउडर से धोती है जिस की वजह से कुछ पानी और कपड़ों का झाग मशीन के दरवाज़े के शीशे और उसके अतराफ़ में लगे हुए रबड़ के ख़ोल पर फैल जाता है दूसरे चक्कर में धोवन (ग़स्साला) को निकाल दिया जाता है लेकिन झाग उस के दरवाज़े और रबड़ के ख़ोल को पूरी तरह घेर लेता है और अगले चक्करों में मशीन कपड़ों को तीन मर्तबा क़लील पानी से धोती है फिर उसके बाद धोवन को बाहर निकालती है तो क्या इस तरह धोये जाने वाले कपड़े पाक होते हैं या नहीं?
    जवाबः एैने नजासत दूर हो जाने के बाद जब पाइप के साथ मिला पानी मशीन में दाख़िल होकर कपड़ों और मशीन के अन्दर उसके तमाम अतराफ़ तक पहुंच जाये और फिर उससे जुदा होकर निकल जाये तो उन कपड़ों पर तहारत का हुक्म जारी होगा ।
    सवाल 293: अगर ऐसी ज़मीन पर या हौज़ या हम्माम में के जिस में कपड़े धोये जाते हैं पानी बहाया जाये और उस पानी के छीटें लेबास (कपड़े) पर पड़ जायें तो क्या वो नजिस हो जायेगा या नहीं ?
    जवाबः अगर पानी पाक जगह या पाक ज़मीन पर बहाया जाये तो उस से पड़ने वाली छींटे भी पाक हैं और अगर शक होके कि वो जगह पाक है या नजिस तो भी उससे पड़ने वाली छीटें पाक हैं।
    सवाल 294: बलदिया (नगर पालिका) की कूड़ा ढ़ोने वाली गाडि़यों से जो पानी सड़कों पर बहता जाता है और कुछ औक़ात (कभी-कभी) तेज़ हवा की वजह से लोगों के ऊपर भी पड़ जाता है क्या वो पानी पाक है या नजिस ?
    जवाबः पाक है मगर ये कि निजासत के लगने की वजह से उस पानी के नजिस होने का किसी शख़्स को यक़ीन हो जाये ।
    सवाल 295: सड़कों पर मौजूद गढ़ों में जमा होजाने वाला पानी पाक है या नजिस?
    जवाबः पाक है।
    सवाल 296: उन लोगों के साथ घरेलू आना जाना रखने का क्या हुक्म है जो खाने पीने वग़ैरा में तहारत व निजासत के मसअलों का ख़याल नहीं करते ?
    जवाबः तहारत व निजासत के बारे में कुल्ली तौर पर शरीयते इस्लामी का हुक्म ये है कि हर वो चीज़ जिसके नजिस होने का यक़ीन न हो पाक है।
    सवाल 297: बराये मेहरबानी नीचे दी गईं सूरतो में क़ै (उलटी) की तहारत और निजासत के बारे में शरई हुक्म बयान फ़रमायें।
    अ: शीर ख़्वार बच्चे की क़ै (उलटी)
    ब: उस बच्चे की क़ै (उलटी) जो दूध पीता है और खाना भी खाता है
    जवाबः बालिग़ इंसान की क़ै (उलटी)
    जवाबः तमाम सूरतो में पाक है।
    सवाल 298: शुबहे महसूरा ‘‘कुछ ऐसी चीज़ें जिन में से एक नजिस है’’ से लगने वाली चीज़ के बारे में क्या हुक्म है?
    जवाबः अगर इनमें से कुछ चीज़ों से लगे तो नजिस नहीं हैं।
    सवाल 299: एक शख़्स खाना बेचता है और सरायत करने वाली तरी के साथ खाने को अपने जिस्म से छूता है लेकिन उसके दीन का पता नहीं है और वो किसी दूसरे मुल्क से इस्लामी मुल्क में काम करने के लिए आया है क्या उस से उसके दीन के बारे में सवाल करना वाजिब है? या उस पर अस्ल तहारत का हुक्म जारी होगा ?
    जवाबः उस से उसका दीन पूछना वाजिब नहीं है और उस शख़्स के बारे में और रुतूबत के साथ उसके जिस्म से लगने वाली चीज़ के बारे में अस्ल तहारत जारी करेंगे ।
    सवाल 300: अगर घर का कोई फ़र्द या ऐसा शख़्स जिस का घर में आना जाना है तहारत व नजासत का ख़याल न रखता हो जिस से घर और उसमें मौजूद चीज़ें वसी पैमाने पर नजिस हो जायें कि जिन का धोना और पाक करना मुमकिन न हो तो इस सूरत में घर वालों का फ़रीज़ा क्या है? ऐसी सूरत में इंसान कैसे पाक रह सकता है ख़ुसूसन नमाज़ में कि जिस के सही होने में तहारत शर्त है? और इस सिलसिले में हुक्म क्या है?
    जवाबः तमाम घर को पाक करना ज़रूरी नहीं है और नमाज़ सही होने के लिए नमाज़ गुज़ार का लेबास (कपड़े) और सजदा गाह के मक़ाम का पाक होना काफ़ी है। घर और उस के सामान की निजासत की वजह से, नमाज़ और खाने पीने में तहारत का लिहाज़ रखने के अलावा इंसान पर कोई और ज़िम्मेदारी नहीं होती।