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    पक्षियों का राजा

    पक्षियों का राजा
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    पुराने समय की बात है, एक मोर जंगल से बाहर निकला और उस मार्ग पर चल पड़ा जो झील की ओर जाता था। उसने झील तक पहुंचने के लिए सुन्दर फूलों और वृक्षों से सजे रास्ते को तय किया। मोर ने जब पानी में स्वयं को देखा तो आश्चर्य चकित रह गया। उसने अपनी सुन्दर सी लंबी दुम खोल दी। मोर ने जब स्वयं को इस हालत में देखा तो उसे और भी आश्चर्य हुआ और स्वयं से कहने लगा कि मेरा रूप कितना सुन्दर है, मेरी दुम कितनी रंगीन है, मेरे सिर पर कितना सुन्दर ताज है, मेरी दुम कितनी लंबी है, मैं वास्तव में पक्षियों का राजा हूं। सभी पक्षियों को मेरा आज्ञापालन और मेरा सम्मान करना चाहिए।मोर घमंड और अकड़ में मटक-मटक कर चल रहा था। उसने रास्ते में एक एक मुर्ग़ी और उसके चूज़ों को देखा जो दाने चुग रहे थे। मोर ने ऊंची आवाज़ में मुर्ग़ी से कहा कि रास्ते से हट जाओ। मोर उसी प्रकार घमंड और अकड़ में चलता रहा और वह छोटे छोटे चूज़ों को ठोकर मारता हुआ आगे बढ़ गया। चूज़े दर्द से कराह रहे थे और भाग कर रास्ते से हट हट रहे थे। मुर्ग़ी को क्रोध आ गया उसने चूज़ों को बहुत ही मेहरबानी के साथ अपने परों में समेट लिया। मोर आगे बढ़ रहा था कि उसकी नज़र एक बग़ुले पर पड़ी जो झील के निकट एक पैर पर खड़ा था।मोर बगुले के निकट पहुंचा और उसे एक टक्कर रसीद की। बगुला ज़मीन पर गिर गया। मोर हंसने लगा और आगे बढ़ गया।अचानक मोर को एक ऊंची और भयंकर आवाज़ सुनाई दी। उसने अपने दाहिने बायें देखा किन्तु कुछ दिखाई नहीं दिया। उसने फिर ऊंची और भयानक आवाज़ सुनी। उसने आसमान की ओर देखा, बादलों को देखा जो चल रहे थे और सूर्य को देखा जो डूबने वाला था। मोर आगे बढ़ना चाहता था किन्तु किसी शक्तिशाली चीज़ ने उसे पीछे खींच लिया। मौसम ठंडा था और हवाएं तेज़ चल रहीं थीं। मुर्ग़ी ने अपने बच्चों को पुकारा और कहा कि बच्चों आओ हमें अपने घर चलना चाहिए हवा तेज़ चल रही है और शीघ्र की वर्षा होने वाली है।मोर बहुत तेज़ी से हंसने लगा और ठहाका मारकर कहने लगा कि मैं शक्तिशाली और बड़ा हूं, मैं पक्षियों का राजा हूं। मैं हवा से नहीं भागूंगा, मुझे तूफ़ान से डर नहीं लगता।मोर उसी तरह हवा के मार्ग पर अड़ा रहा, उसने अपना सीना चौड़ा किया और अपनी लंबी सी दुम को उठाया और चलने लगा। हवा पहले से तेज़ व भीषण हो गयी। मोर का एक पर टूट कर गिर गया और हवा में उड़ गया उसके बाद उसकी दुम भी गिर गयी। मोर आगे बढ़ना चाहता था किन्तु तेज़ हवाओं ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी।मोर ने देखा कि वह बड़ी कठिनाई से रास्ता चल सकता है और हवा जितनी तेज़ होती जा रही है। उसे थकन का अधिक आभास हो रहा था। इसी बीच उसे वृक्षों के मध्य से एक आवाज़ सुनाई दी। उसने नज़र उठाकर देखा तो उसे मुर्ग़ी और उसके बच्चे दिखे। मुर्ग़ी ने उससे कहा कि तूफ़ान रूकने तक हमारे साथ रूक जाओ। मोर ने मुर्ग़ी पर अपमान भरी नज़र डाली और कहा कि मैं अपनी इतनी सुन्दर व लंबी दुम के साथ वृक्षों की आड़ में नहीं छिपुंगा। तुम कमज़ोर मुर्ग़ी हो और मैं शक्तिशाली। मैं पक्षियों का राजा हूं। मैंने यहां तक आधा रास्ता तय कर लिया और जंगल में अपने ठिकाने तक पहुंचने में अधिक रास्ता नहीं बचा है। मोर आगे बढ़ता रहा और हवाएं भी और तेज़ चलने लगी और हवाएं अपने साथ उसके बाक़ी बचे परों और ताज को उड़ा ले गयीं। मोर, मुर्ग़ी के घर पहुंचा। मुर्ग़ी ने उससे कहा कि यहां आओ, हवा में तुम्हारा पर उखड़ जाएगा। मेरा घर तुम्हें हवा और वर्षा से सुरक्षित रखेगा।मोर ने जो ठंडक से मरने ही वाला था, मुर्ग़ी की बात पर ध्यान नहीं दिया। उसने देखा कि जंगल अभी बहुत दूर है। वह आगे बढ़ा किन्तु वह एक क़दम आगे बढ़ता था तो हवाएं उसे दो क़दम पीछे ढकेल देतीं। हवाएं इतनी तेज़ चलीं कि उसने उसके ताज के बालों को उड़ा दिया और इसी प्रकार उसके शरीर के बाल हवाओं की भेंट चढ़ गये। वहीं पर एक तोता पेड़ पर बैठा था। उसने मोर की ओर संकेत किया और हंसते हुए कहने लगा कि एक मुंडा मोर।तोते की बात से क्रोधित मोर ने और तेज़ी से चलना आरंभ किया। वह इतना थका हुआ था कि उसने एक पेड़ से टेक लगा लिया। संयोगवश जिस पेड़ से वह टेक लगाए हुए था उसपर मधुमक्खियों का एक छत्ता था और जैसे ही उसने उस पेड़ से टेक लगाया मधुमक्खी का छत्ता थोड़ा सा हिल गया। मक्खियों को क्रोध आ गया वह सबकी सब उसपर टूट पड़ीं और डसना आरंभ कर दिया। मोर बेचारा दर्द से चिल्लाते हुए जंगल की ओर भागा। मधुमक्खियों ने भी उसका पीछा छोड़ दिया और लौट आयीं। मोर धरती पर बैठ गया। उसके शरीर से ख़ून बह रहा था। ठंडक और जलन के कारण उसे बहुत दर्द हो रहा था। उसने अपने सिर को आसमान की ओर किया और ईश्वर से सहायता मांगते हुए कहा कि हे ईश्वर काश मेरे पर भी बत्तखों की भांति काले होते या मुर्ग़ियों की भांति सफ़ेद होते तो मैं जैसा आज फंसा हूं वैसा न फंसता।हवा रूक चुकी थी और बादल छट चुके थे, आसमान साफ़ हो गया और सूरज निकल आया था। दुःखी मोर बैठा सोचने लगा। उसके बाद उसने एक नज़र अपने शरीर पर डाली और उसने जो देखा उसे उसपर विश्वास ही नहीं हो रहा था। उसने देखा कि उसके शरीर पर छोटे छोटे पर निकल आए हैं। उसने अपनी चोंच से परों को टटोल कर देखा और प्रसन्न मुद्रा में कहने लगा कि ईश्वर का बहुत बहुत आभार कि मेरे पर दोबारा निकल आए। ईश्वर ने मेरी दुआ सुन ली। आज के बाद से मैं किसी पक्षी से स्वयं को ऊंचा दिखाने का प्रयास नहीं करूंगा और किसी का भी उपहास नहीं करूंगा।