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    पथ प्रदर्शक कौन है?

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    आया इंसान के लिए संभव है की अपनी अक़्ल के माध्यम आपने अपनी समस्त प्रकार चीजों या कामों को शेष तक पुहचाए, और समस्त प्रकार सही व ग़ैर सही को पैहचान कर आपने लाभ व नूकसान को सही तरीके से अर्जन कर सकें?

    समस्त प्रकार मुसल्मान इस प्रश्न का उत्तर में ना देगें। क्योंकि अक़्ल के निकट इतनी शक्ति नहीं है कि ख़ुद आपने को एक रहनूमा क़रार दे, बल्कि अक़्ल के लिए भी एक रहनूमा-नेता की भी ज़रुरत है। क्योंकि संभव है यही अक़्ल कभी अ-साधारण आचरण की तरफ झुक जाये, और सही रास्ते से पथ भ्रष्ट की तरफ़ चले जायें। हज़रत अली (अ) ने फरमायाः कि अम्बिंयाकों भेजने का उद्देश्व यही है की इंसान की अक़्ल को पर्वरिश दें, उस के बाद फरमायाः (( ख़ोई हुई फिक़्र व गुम हुई फ़िक्र को प्रकाश करके उस अक़्ल को कामों में लागाए))

    क्या इंसानों का बानाया हुआ विधान व अएडियाल, एक व्यक्ति और एक समाज के सही तर्बियात के लिए उपयुक्त हैं?

    समाज को सही के लिए बर्षों की बर्षों विभिन्न आलिम के तरफ़ से विभिन्न प्रश्न व परामर्श अती रहती है। लेकिन विभिन्न मतभेद के साथ, और यह मतभेद इस हद तक पहची है कि इंसान की अक़्ल हैरान हो गई और इंसान की अक़्ल के लिए संभव भी नहीं है कि अपनी विजयी राज़ को अर्जन कर सकें। और कोई इतमिनान बख़्श थीउरी भी नहीं हत्ता कोई क़ानून इंसानों को सही रास्ता के लिए ज़ामिन नहीं लेती।

    लेकिन आसमानी सूचीपत्र व मक्तबे आम्बिंया शुरु से लेकर शेष तक प्रत्येक प्रकार के अ-प्रकाश व नाज़ुक क़ानून को जानता है। बिल ख़ूछुछ इंसानों के प्रत्येक स्थान व प्रत्येक व्यक्ति से अच्छी तरह जानते हैं। और इस मक्तबे आम्बिंया के क़ानून में किसी प्रकार की भूल का कोई अबकाश पाया नहीं जाता। और यही कारण है कि मक्तबे आम्बिंया की बहूत सख़्त ज़रुरत है।