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    पवित्र रमज़ान-11

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    ईश्वर की प्रसन्नता के लिये रोज़ा रखने वालों पर हमारा सलाम हो। हमें आशा है कि हमारे श्रोता इस शुभ महीने में आत्म निर्माण एवं आध्यात्मिक गुणों की प्राप्ति में पहले से अधिक प्रयास कर रहे होंगे।इस कार्यक्रम के आरम्भ में हम आपको पवित्र क़ुरआन में वर्णित उस दुआ से परिचित करवा रहे हैं जो माता – पिता के संबन्ध में है ।माता – पिता को इस्लाम में बहुत अधिक महत्व प्राप्त है क्योंकि वे हमारे लिये बहुत कष्ट उठाते हैं। पवित्र क़ुरआन लोगों से सिफ़ारिश करता है कि अपने माता – पिता के लिये दुआ किया करो। क़ुरआन में वर्णित एक दुआ इस प्रकार है: हे हमारे मालिक, जिस दिन कर्मों का हिसाब लिया जायेगा, तू हमारे माता – पिता और ईमान वालों को क्षमा कर दे।एक अन्य दुआ इस प्रकार है: हे पालनहार मुझे इस बात की योग्यता प्रदान कर कि तूने मुझे और मेरे माता – पिता को जो अनुकंपाये प्रदान की हैं उनके लिये तेरा आभार प्रकट कर सकूं। और ऐसे भले काम करुं कि जिससे तू प्रसन्न रहे।इस भाग में हम इफ़तारी देने के संबन्ध में चर्चा करेंगे: इफ़तारी देना वह प्रशंसनीय कार्य है जिसे अनेक मुसलमान रमज़ान के पवित्र महीने में करते हैं। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम ने इस सुन्दर कार्य के सम्बन्ध में कहा है: हे लोगों, जो कोई इस महीने में किसी रोज़ा रखने वाले को इफ़तार करायेगा अर्थात उसका रोज़ा खुलवायेगा, तो यह कर्म ऐसा है जैसे उसने एक दास को स्वतन्त्र किया हो और उसका यह कर्म उसके विगत के पापों के ईश्वर द्वारा क्षमा किये जाने का कारण बनता है।स्पष्ट है कि इफ़तारी देते समय मनुष्य की भावना केवल ईश्वर को प्रसन्न करने और उसका सामिप्य प्राप्त करने की ही हो। और उसमें दिखावा और घमन्ड बिल्कुल नहीं होना चाहिये क्योंकि उस स्थिति में उसके इस कर्म का कोई मूल्य नहीं रह जायेगा और ईश्वर उसे स्वीकार नहीं करेगा।इसी प्रकार इफ़तारी के लिये ख़र्च किया गया माल हलाल होना चाहिये। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम हलाल रोज़ी के महत्व के संबन्ध में कहते हैं: जो व्यक्ति अपनी मेहनत की हलाल कमाई से खाता है वह प्रलय के दिन पुले सेरात से बिजली की भान्ति तेज़ी से गुज़र जायेगा और ईश्वर स्वर्ग के द्वार उस के सामने खोल देगा कि जिस द्वार से चाहे प्रवेश करे।इसी प्रकार इफ़तारी देने वाले को भी स्वंय को कठिनाई में नहीं डालना चाहिये तथा संकोच के कारण बहुत सादगी के साथ ही इफ़तारी का प्रबन्ध करना चाहिये। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम ने उस व्यक्ति के उत्तर में जिसने कहा था कि मुझ में इफ़तारी देने की क्षमता नहीं है, कहा था कि एक खजूर या कम से कम थोड़े पानी से इफ़तार करवा दो।