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    पशु पक्षियों की भाषा-1

    पशु पक्षियों की भाषा-1
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    इतिहास के प्रख्यात कवि मौलाना रोम ने अपने दीवान मसनवी मानवी में एक कहानी बयान की है जो इस प्रकार है। एक युवा व्यक्ति हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के पास गया और उनसे पशुओं की भाषा सीखने का अनुरोध किया। हज़रत मूसा ने उसे इस काम से दूर रहने की नसीहत की ओर कहाः यह ख़तरनाक काम है और यदि पशुओं की भाषा जानना मनुष्य के हित में होता तो ईश्वर उसे अन्य अनुकंपाओं की भांति इसे भी प्रदान कर देता। ईश्वर से ज्ञान व पाठ लेने की क्षमता की प्रार्थना कर। हज़रत मूसा जितना उसे इस काम से रोकते उसमें पशुओं की भाषा जानने की उत्सुकता बढ़ती जाती थी। हज़रत मूसा अपने मन ही मन यह कह रहे थेः हे प्रभु क्या करू! यदि इस युवा को पशुओं की भाषा सिखा दूं तो निश्चित रूप से इसे हानि पहुंचेगी और संभव है कि उसके लिए ख़तरनाक हो। यदि नहीं सिखाता हूं तो उसक दिल टूटेगा और मुझसे इस बात पर अप्रसन्न रहेगा कि मैंने उसकी सहायता नहीं की। ईश्वर की ओर से आवाज़ आईः हे मूसा हमारी दया इससे अधिक है कि किसी प्रार्थी की दुओ को रद्द करूं। उसे पशुओं की भाषा सिखा दो। हज़रत मूसा ने कहाः हे प्रभु! उसे अपनी इस इच्छा पर पछतावा होगा। इस संबंध में अक्षमता क्षमता से बेहतर है। ईश्वर की आवाज़ा आईः तुम उसे आवश्यक चेतावनी दे दो और अगर फिर भी पशुओं की भाषा जानने पर आग्रह कर रहा है तो उसे सिखा दो।हज़रत मूसा ने उस युवा को फिर नसीहत करते हुए कहाः हे युवा इस इच्छा से दूर रहो! यह शक्ति जो तुम प्राप्त करना चाहते तो तुम्हारे अहित में रहेगी। हज़रत मूसा ने जब देखा कि वह व्यक्ति अपनी इच्छा पर अड़ा हुआ है तो आपने उसे कुत्तों, मुर्ग़ियों और मुर्ग़ों की भाषा सिखा दी। वह व्यक्ति प्रसन्न होकर अपने घर लौट आया। जब सुबह हुई तो परखने के लिए अपने घर के आंगन में आया और खड़े होकर प्रतीक्षा करने लगा। उसकी पत्नी नाश्ता करने के पश्चात दस्तरख़ान को आंगन में झाड़ दिया ताकि उसमें से रोटी के छोटे छोटे टुकड़े कुत्ता खा ले किन्तु अचानक मुर्ग़ा आया वह रोटी का टुकड़ा ले उड़ा। कुत्ता ग़ुर्राते हुए मुर्ग़े की ओर बढ़ा। कुत्तों, मुर्ग़ियों और मुर्ग़ों की भाषा समझने वाला व्यक्ति आगे बढ़ा ताकि जो कुछ कुत्ता मुर्ग़ से कह रहा है उसे समझ सके। कुत्ते ने कहाः हे बुरे मुर्ग़ तुमने इस काम से मुझ पर अत्याचार किया। मुर्ग़े ने आश्चर्य से पूछाः मैंने तुम पर क्या अत्याचार किया? कुत्ते ने भौंकते हुए कहाः इसलिए कि तुम गेंहू खा सकते हो किन्तु मैं नहीं खा सकता। जबकि रोटी का टुकड़ा मेर हिस्से में था वह तुम ले उड़े।मुर्ग़ ने कुकड़ु कूं करते हुए कहाः नाराज़ मत हो! ईश्वर आजीविका प्रदान करता है वह तुम्हारी आजीविका किसी दूसरे माध्यम से देगा। कल स्वामी का घोड़ा मर जाएगा तो तुम्हें पेट भर उसका मांस खाने को मिलेगा। घर के स्वामी ने जैसे ही यह सुना तुरंत बाज़ार जाकर अपना घोड़ा बेच दिया। अगले दिन भी मुर्ग़ कुत्ते के सामने की रोटी ले उड़ा। कुत्ता पुनः ग़ुर्राया और कहाः झूठे मुर्ग़ तुमने कहा था कि कल घोड़ा मर जाएगा किन्तु तुमने देखा ऐसा नहीं हुआ। मुर्ग़ ने कहाः क्यों नहीं वह घोड़ा दूसरे के घर मर गया। इस व्यक्ति ने घोड़ा बेच दिया और स्वयं को हानि से बचा लिया और उसे ख़रीदने वाले के कांधे पर डाल दिया किन्तु अब तुम्हें ख़बर दे रहा हूं कि कल स्वामी का ख़च्चर मर जाएगा और तुम्हें बहुत बड़ी अनुकंपा मिलेगी। घर के स्वामी ने जैसे ही यह सुना अपना ख़च्चर जाकर बाज़ार में बेच दिया। अगले दिन कुत्ते ने फिर मुर्ग़े से कहाः हे झूठे! फिर तुम्हारे झूठ की क़लई खुल गयी। मुर्ग़े ने कहाः मैंने झूठ नहीं कहा। उसका ख़च्चर भी मर गया किन्तु इस व्यक्ति ने चतुराई की और उसे बेच दिया तथा उसकी हानि ख़रीदने वाले के कांधे पर डाल दिया। किन्तु कल तो इसका दास मर जाएगा। जब दास मरेगा तो तुम्हारे खाने के लिए अधिक रोटी बचेगी। वह अपने दास के लिए दान-दक्षिणा करने पर विवश है और तुम्हारे पेट की आग बुझ जाएगी। जैसे ही उस व्यक्ति ने यह सुना अपने दास को भी बेच दिया। वह व्यक्ति बहुत प्रसन्न था कि कुत्ते, मुर्ग़ी और मुर्ग़े की भाषा ने उसे इन सब हानियों से बचा लिया है। अगले दिन कुत्ते ने फिर मुर्ग़े से शिकवा करते हुए कहाः तुम झूठे हो और बेढंगी बात करते हो। मुर्ग़े ने कहाः हम कभी भी झूठ नहीं बोलते। क्या अब तक ऐसा हुआ है कि हमने कभी एक क्षण पहले या एक क्षण देर से अज़ान कही हो? और फिर अस्ल घटना कुत्ते के सामने बयान की।