islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. पशु पक्षियों की भाषा-2

    पशु पक्षियों की भाषा-2

    पशु पक्षियों की भाषा-2
    Rate this post

    ईरान के प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार मौलवी की कहानी के अनुसार ईश्वरीय पैग़म्बर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के काल में एक युवा ने उनसे अनुरोध किया था कि वे उसे पशु-पक्षियों की भाषा सिखाएं। हज़रत मूसा ने उसे नसीहत की और इस कार्य के दुष्परिणामों से उसको अवगत करवाया। उनके समझाने पर भी जब वह युवा नहीं माना तो हज़रत मूसा ने ईश्वर की अनुमति से उसे कुत्ते, पक्षियों और मुर्ग़ें की भाषा सिखाई। पशु-पक्षियों की भाषा सीखने के पश्चात समस्याओं के आने से पहले ही उस युवा को उनका ज्ञान हो जाया करता था। एक दिन उसने मुर्गे से यह सुना कि उसका घोड़ा मरने वाला है। यह सुनते ही वह अपने घोड़े को बाज़ार ले गया और उसने उसे बेच दिया। उसके अगले दिन उसने मुर्ग़े से यह सुना कि उसका गधा मरने वाला है। युवा ने घटना घटने से पहले ही अपने गधे को बाज़ार जाकर बेच दिया। तीसरे दिन उस युवा ने सुना कि मुर्ग़ा, कुत्ते से कह रहा है कि कल इस स्वामी का दास मर जाएगा जिसके बाद तुम निश्चिंत होकर पेट भरकर रोटी खा सकोगे। युवा ने यह सुनते ही अपने दास को भी ले जाकर बाज़ार में बेच दिया। वह इस बात से बहुत प्रसन्न था कि उसने पशु-पक्षियों की भाषा सीखकर स्वयं को होने वाली बहुत सी क्षतियों से सुरक्षित कर लिया। अगले दिन कुत्ते ने मुर्ग़े से शिकायत की कि तुम बहुत झूठे हो और झूठ बोलते रहते हो। मुर्ग़े ने कहा कि मुर्ग़ें कभी झूठ नहीं बोलते। क्या अभी तक एसा कभी हुआ है कि हमने समय से पहले या बाद में आज़ान दी हो? मुर्ग़े ने कुत्ते को पूरी कहानी सुनाते हुए कहा कि मैंने झूठ नहीं बोला है। इस व्यक्ति का गधा, उसका घोड़ा और दास तीनों ही मर गए। यह तीनों इस युवा के घर में नहीं बल्कि उन लोगों के घर में मरे जिन्होंने इन्हें ख़रीदा था। इस कार्य से उसने स्वयं को भौतिक क्षति से तो बचा लिया किंतु अपने आप को समस्याओं में डाल दिया। एक भौतिक क्षति बहुत सी क्षतियों से बचा तो सकती है किंतु यह कार्य जो उसने किया उससे स्वयं को समस्याओं में डाल दिया। वह कल निश्चित रूप से मर जाएगा। उसके मरणोपरांत के कार्यक्रम में उसके रिश्तेदार उसके बकरे को काटेंगे इसलिए कल तुम भी पेट भर कर खाना खा सकोगे। घोड़े, गधे और दास की मृत्यु वास्तव में उसे बलाओं से बचाती किंतु उसने उन्हें बेचकर स्वयं को कुछ भौतिक क्षति से तो बचा लिया और अपनी संपत्ति को सुरक्षित कर लिया किंतु उसके इस कार्य से बलाएं उस तक पहुंचेंगी। युवा ने जैसे ही यह बात सुनी अपने सिर पर हाथ मारकर कहने लगा, धिक्कार हो मुझपर जो मैंन किया। वह दौड़ता हुआ हज़रत मूसा के पास गया। जब वह युवा हज़रत मूसा के पास पहुंचा तो रोते हुए उसने अपने किये पर पछतावा करना आरंभ किया। हज़रत मूसा ने उस युवा से कहा कि जब तुमने यह सुना कि तुम्हारा घोड़ा मर जाएगा तो तुमने क्या किया?युवा ने बड़े पछतावे के साथ कहा कि मैंने उसे बचे दिया और स्वयं को क्षति से बचा लिया। फिर हज़रत मूसा ने उस युवा से कहा कि जब तुमने यह सुना कि तुम्हारा गधा मर जाएगा तो तुमने क्या किया? युवा ने कहा कि बाज़ार जाकर उसे बेच दिया और स्वयं को क्षति से बचा लिया। हज़रत मूसा ने उस युवा से कहा कि जब तुमने यह सुना कि तुम्हारा दास मर जाएगा तो तुमने क्या किया? उस युवा ने बहुत ही लज्जा के साथ कहा कि उसके संबन्ध में भी मैने वही कार्य किया। उसको भी बाज़ार ले जाकर बेच दिया। तीनों मर गए और उसकी क्षति ख़रीदने वालों को भुगतनी पड़ी। इसके बाद हज़रत मूसा ने उस युवा से कहा कि अब भी यही काम करो। युवा ने बहुत ही आश्चर्य से पूछा कि मैं क्या काम करूं? क्या मैं जाकर स्वयं को बेच दूं? हज़रत मूसा ने कहा कि इसके अतिरिक्त कोई अन्य मार्ग नहीं है। यदि तुम समस्याओं से मुक्त होना चाहते हो तो तुमको यही काम करना होगा। हज़रत मूसा ने उस युवा से कहा कि मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि तुम पशु-पक्षियों की भाषा न सीखो क्योंकि इससे तुम्हें कोई लाभ नहीं होगा बल्कि तुम्हारे लिए समस्याएं ही उत्पन्न होंगी किंतु तुमने मेरी बात नहीं मानी तो अब तुमको उसकी क्षति सहन करनी होगी। युवा ने फिर हज़रत मूसा से क्षमा मांगी और गिड़गिड़ाते हुए कहा कि आप ईश्वर से मेरे लिए प्रार्थना कर दें कि वह मेरे पापों को क्षमा कर दे और मुझको इस समस्या से मुक्ति दिला दें। ह़रत मूसा ने अप्रसन्नता की स्थिति में अपने सिर को हिलाते हुए कहा कि हाथ से निकली हुई चीज़ फिर वापस नहीं आती। क्या तुमको पता नहीं है कि यह कार्य संभव नहीं है। मैं ईश्वर से यह प्रार्थना करूंगा कि तुम इस संसार से ईमान के साथ जाओ क्योंकि यदि तुम ईमान के साथ मरोगे तो अमर रहोगे। इस बीच युवा की हालत बिगड़ गई। कुछ लोग उसकी सहायता के लिए आगे बढ़े और अधमरी अवस्था में पहुंच चुके उस युवा को उसके घर ले गए। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने ईश्वर से प्रार्थना आरंभ की कि वह उस युवा को इस संसार में क्षमा कर दे और संसार से ईमान के साथ उठाए।