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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-12

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    आहार मनुष्य को स्वस्थ रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आहार का प्रयोग एक अटल आवश्यकता है ताकि मनुष्य के शरीर में भीतरी और बाहरी कारकों के अंतर्गत जो ऊर्जा ख़र्च होती है उसे पुनर्जीवित किया जा सके। यह आहार की मुख्य भूमिका है। ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा की दृष्टि में हर मनुष्य का स्वाभाव भिन्न होता है जिसके आधार पर यह आवश्यक है कि मनुष्य के विशेष स्वाभाव के अनुरूप उसे आहार का सुझाव दिया जाए।

    डाक्टर ख़ादिम का इस संबंध में कहना है कि एक दृष्टिकोण के आधार पर आहार को हल्के, भारी और संतुलित खानों में विभाजित किया गया है। हल्के आहार क्या हैं? हल्के आहार उन खानों को कहते हैं जो शरीर में जाने के बाद सरलता से पच जाए और शरीर उसे सरलता से शोषित कर सके। अर्थात उसके पचने के बाद शरीर में अधिक अनुपयोगी पदार्थ न बने, एसे आहार को हल्का आहार कहा जाता है। हल्के आहार किन लोगों के लिए उचित है? यह आहार उन लोगों के लिए उचित है जो कमज़ोर हैं और उनका अमाशय कमज़ोर है जैसे बच्चे, वृद्ध और वे लोग जो लंबी बीमारी के बाद कमज़ोरी के चरण से गुज़र रहे हों। हमारे निकट कौन से आहार हल्के हैं इनमें से सबसे पहले अंडे की ज़र्दी है। पुराने लोग हाफ़ बोएल्ड अंडे को भी हल्का समझते थे। अर्थात वह अंडा जिसे पानी में उबाला जाए और उसकी ज़र्दी पूरी तरह से न पकी हो अर्थात थोड़ी सी कच्ची हो और उसे हल्के आहारों में शामिल करते हैं। इस आहार से आमाशय को कोई हानि नहीं पहुंचती और बहुत ही सरलता से यह पच जाता है। हाफ़ बोएल्ड अंडे बच्चों के लिए बहुत ही उचित है और बहुत ही सरलता से पच जाता है और यह बच्चों के विकास में भी प्रभावी सिद्ध होता है और उन्हें शक्ति प्रदान करता है।

    अधिक फ़ाइबर वाले आहार का प्रयोग करें ताकि क़ब्ज़ न हो और शौच की समस्या न रहे। आहार का उस समय सेवन करना चाहिए जब मनुष्य को भूख लगी हो। ऐसे अवसर पर आहार का सेवन जबकि पहले वाला आहार अभी अमाशय में मौजूद है पाचन क्रिया में गड़बड़ी का कारण बन सकता है और मनुष्य विभिन्न बीमारियों में ग्रस्त हो सकता है।

    इस संबंध में डाक्टर ख़ादिम कहते हैं कि एक और उदाहरण जो हम हल्के आहार का दे सकते हैं यही ईरान के पारंपारिक खाने हैं जिनमें आबगोश्त नामक एक विशेष प्रकार के आहार का नाम लिया जा सकता है। आब गोश्त विशेषकर यदि भेड़ के बच्चे के मांस से बनाया गया हो तो बहुत ही लाभदायक है। यह बड़ी ही सरलता से पच जाता है और इससे कोई अतिरिक्त व अनुपयोगी पदार्थ भी नहीं बचते। आब गोश्त बहुत ही शक्तिवर्धक आहार है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। यहां पर आपको यह भी बताते चलें कि आप जब घर में आब गोश्त बना रहे हों तो इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि इसका शोरबा सबसे अधिक शक्तिवर्धक पदार्थों का स्वामी हो। इस आबगोश्त को आप बच्चों को भी खिला सकते हैं क्योंकि बच्चे मांग नहीं खा सकते। इसी आधार पर इसका शोरबा बहुत ही शक्तिवर्धक होना चाहिए कि कमज़ोर व्यक्ति भी इससे लाभ उठा सकें। इसके लिए आपको मांस के छोटे छोटे टुकड़े करने होंगे और उसके बाद आप मांस को ठंडे पानी  में डाल दें, हल्की आंच पर रखें तथा आधे घंटे या 45 मिनट तक पकाएं यहां तक कि पानी खौल जाए,  मांस को इस प्रकार पानी में पकाने से उसके अंदर मौजूद प्रोटीन और एमीनो एसिड पानी में मिल जाते हैं, अब शोरबे को वह लोग भी प्रयोग कर सकते हैं जो मांस नहीं खा सकते जैसे बीमार, वृद्ध या बच्चे। इस शोरबे में मांस की समस्त विशेषताएं होगीं और कमज़ोर लोग भी मांस जैसी ही ऊर्जा प्राप्त कर सकेंगे। अब यदि आप यह चाहते हैं कि मांस खाएं और उसके स्वाद से आनंदित हों तो आपको पानी को उबाल करके उसमें मांस डालना चाहिए यहां आपको मांस के बड़े बड़े टुकड़े करने होगें और इस प्रकार मांस के शक्तिवर्धक पदार्थ मांस में ही बाक़ी रहते हैं और पानी में नहीं मिलते और इस प्रकार आपका मांस स्वादिष्ट भी होगा और शक्तिवर्धक भी।

    यदि आपको तीनों खानों के मध्य भूख लग जाए तो आप फल खा सकते हैं या सालाद भी ले सकते हैं। अलबत्ता यदि सालाद में ज़ैतून के तेल, आवीशन अर्थात अजवाइन का बुरादा मिलाया गया हो तो बहुत अच्छा है। आहार को प्रोटीन और फ़ाइबर से ओत प्रोत होना चाहिए। जैसे मुर्ग़ी के अंडे, झींगे, मांस, यकृत। सर्दियों में और रात के समय ठंडे खानों से बचना चाहिए।

    डाक्टर ख़ादिम इस संबंध में कहते हैं कि हल्के खानों का एक अन्य उदाहरण बेहतरीन गेहूं से पकाई गयी रोटी का उपयोग है। अच्छे, स्वच्छ और साफ़ गेहूं की पकी रोटी जो प्राकृतिक ढंग से ख़मीर हुई हो और उसमें सोडा इत्यादि चीज़ों का प्रयोग न किया गया हो। जब हमारे पास प्राकृतिक ख़मीर है तो हम क्यों प्राकृतिक ख़मीर का विकल्प खोजें। जब प्राकृतिक ख़मीर अर्थात यीस्ट से आटे को ख़मीर किया जाता है तो यीस्ट में मौजूद प्रोटीन और एमीनो एसिड रोटी को अत्यंत पोषक बना देता है। इस प्रकार के ख़मीर से तैयार की गयी रोटी शरीर के लिए लाभदायक और शक्तिवर्धक होती है। यह उदारहण था हल्के आहार का। यह आहार उन लोगों के लिए लाभदायक है जो अधिक सक्रिय नहीं होते और बैठे बैठे समस्त कार्य अंजाम देते हैं या वैचारिक कार्य करते हैं । अब आइये देखते हैं कि भारी खाने कौन से हैं, वह आहार जो बहुत कठिनाई से पचते हैं और जिन्हें पचाने के लिए अमाशय को बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है और जिनसे शरीर में अतिरिक्त पदार्थ पैदा होते हैं उन्हें भारी आहार कहा जाता है। इस प्रकार के आहार किन लोगों के लिए उचित हैं?  भारी खाने कठिन परिश्रम करने वालों के लिए उचित है जैसे खिलाड़ियों और मज़दूरों के लिए इस प्रकार के आहार का सुझाव दिया जाता है क्योंकि यह लोग जो बहुत अधिक परिश्रम करते हैं उनके शरीर में आहार बहुत ही सरलता से पच जाते हैं इसीलिए उनको ऐसे आहार की आवश्यकता होती है जो अमाशय में अधिक समय तक बाक़ी रह सकें। इसी आधार पर कठिन परिश्रम करने वालों के लिए   भारी खाने उचित हैं। संतुलित आहार, भारी और सरलता से पच जाने और उनसे जो अतिरिक्त पदार्थ बनते हैं उनके दृष्टिगत हल्के और भारी खानों के बीच के होते हैं अर्थात न बहुत ही हल्के और न ही बहुत भारी।

    आइये अंत में आपको तेहरान में जड़ी बूटियों से संबंधित एक प्रतिष्ठान से परिचित कराते हैं। तेहरान में जड़ी बूटियों के संबंध में एक महत्त्वपूर्ण शोध संस्था तेहरान विश्वविद्यालय का दवा निर्माण संकाय है। यहां पर विभिन्न विभागों में काम हो रहा है और जैसा कि हमने पहले भी बताया था कि इस संकाय में बड़े ही अच्छे हरबेरियम हैं जिनमें विभन्न प्रकार की जड़ी बूटियां पायी जाती हैं और शोधकर्ता यहां पर अपनी योजनाओं और प्रोजेक्ट पर काम करते हैं।