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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-14

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    ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा शैली मनुष्य को कभी भी उसके आस पास के वातावरण और प्रकृति से अलग नहीं समझती। मनुष्य के आस पास के वातावरण में जो कुछ है वह उस पर प्रभाव डालता है। उनमें से एक हवा है। हवा मनुष्य की त्वचा पर प्रभाव डालती है। यह प्रभाव कभी अच्छे होते हैं और कभी बुरे । आज के कार्यक्रम में हम मनुष्य पर हवा के प्रभाव पर चर्चा करेंगे, कृपया हमारे साथ रहिए।

    डाक्टर रेज़ाइ ज़ादे इस संबंध में कहते हैं कि जलवायु के बारे में हकीमों का मानना है कि हर क्षेत्र की जलवायु, देश या क्षेत्र की जलवायु से अलग विशेष प्रभाव रखती है। उदाहरण स्वरूप तटवर्तीय क्षेत्रों, मरूस्थलीय क्षेत्रों और जंगलीय क्षेत्रों की जलवायु के प्रभाव अलग होते हैं। इसी प्रकार हवा का चलना और किस ओर से चल रही है और कौन से समय चल रही है, इन क्षेत्रों के अनुसार वह भी अपने विशेष प्रभाव रखती हैं और हर स्वाभाव के मनुष्यों पर अपने प्रभाव डालती हैं। हवाओं के बारे में कई बातों को ध्यान में रखना अतिआवश्यक है। हवाएं कभी समुद्र की ओर से चलती हैं, सुबह को चलती हैं, शाम को चलती हैं, इसी प्रकार दोपहर को भी चलती हैं, हवाओं के बारे में यह भी देखना चाहिए कि उनकी तीव्रता कैसी है, हल्की हैं या भारी, जिस ओर वह चल रही हैं उस ओर आबादी और नगर हैं, अब उस नगर की जलवायु को भी देखना होगा, गर्म है या ठंडी, इसके अतिरिक्त क्या हवाएं वर्षा वाली हैं या केवल शुष्क, यह सारी विशेषताएं ईरान के पारंपरिक चिकित्सा में बयान की गयी हैं। ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा का कहना है कि हवाएं पूर्ण रूप से मनुष्य पर प्रभाव डालती हैं, यदि हवा थोड़ी सी शुष्क और ठंडी हो तो मनुष्य की त्वचा के लिए लाभदायक हो सकती है और इससे रक्त का बहाव भी अच्छा हो जाता है और यह त्वचा को नर्म और स्वस्थ बनाती हैं।

    आज का मनुष्य अधिकतर समय इमारतों और घरों अर्थात दूसरे शब्दों में बंद स्थानों पर व्यतीत करता है और यदि इन बंद स्थानों में हवा आने लगे तो यह उसके स्वास्थ के लिए लाभदायक हो सकती है।

    डाक्टर रेज़ाई ज़ादे इस संबंध में कहते हैं कि वह हवाएं जो गर्म और शुष्क होती हैं, शुष्क होने के कारण और यदि तेज़ भी चलती हों तो अपनी गति के कारण भी लोगों पर प्रभाव डालती हैं और जो हवाएं गर्म और तर होती हैं आर्द्र होने के कारण उन लोगों पर जो तटवर्ती क्षेत्रों में रहते हैं विशेषकर यदि हवाएं गर्म हों तो अपना नमी वाला प्रभाव डालती हैं और वातावरण को आर्द्र बना देती हैं। इसी प्रकार जो हवाएं मरूस्थलीय और जंगली क्षेत्रों से चलती हैं और सीमा से अधिक शुष्क होती हैं यह सब मनुष्य की त्वचा और स्वाभाव को प्रभावित करती हैं। इन हवाओं की विशेषता स्वाभाव में आ जाती है और त्वचा शुष्क हो जाती है। इन हवाओं से बचने के लिए मनुष्य को अपने शरीर को सही ढंग से ढांकना चाहिए। स्वयं को इन हवाओं की कृपा और दया पर नहीं छोड़ना चाहिए। विभिन्न मौसमों में चलने वाली हवाओं के बुरे प्रभाव से बचने के लिए अपने स्वाभाव के अनुरूप कपड़े पहनने चाहिए और अपनी रक्षा करनी चाहिए अलबत्ता यह सिद्धांत सब के लिए है बच्चों व बीमारों को तो अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। अलबत्ता भोर के समय चलने वाली हवाएं जिन्हें हमारे शायरों ने नसीमें सहरी या बादे सहरी के नाम से याद किया है और उसकी प्रशंसाएं की हैं यह हवाएं समस्त स्वाभावों के लिए लाभदायक होती हैं और इनसे किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचती। इन हवाओं से भरपूर लाभ उठाना चाहिए और इन्हें अपने शरीर पर लगने देना चाहिए। इन से रक्त का बहाव अच्छा होता है किन्तु दूसरी हवाओं के बारे में हकीमों का कहना है कि मनुष्यों को इनसे बचना चाहिए और शरीर को उचित कपड़ों से ढांकना चाहिए। बसंत ऋतु में चलने वाली हवाओं के बारे में हकीमों का यह कहना है कि सब लोग विशेषकर वह लोग जो बहुत अधिक ठंडे स्वभाव के हैं बसंत ऋतु की हवाओं से आनंदित हो सकते हैं किन्तु सर्द स्वाभाव के लोगों को परेशानी हो सकती है। पतझड़ में चलने वाली हवाओं के बारे में हकीमों का कहना है कि इन हवाओं से बचना चाहिए और स्वयं को सुरक्षित रखना चाहिए। इस हवा से शरीर के तापमान में परिवर्तन नहीं आने देना चाहिए।

    वेन्टीलेश्न इस क्रिया को कहते हैं कि किसी बंद कमरे या हाल में हवा का आना जाना बिना किसी रुकावट के होता रहे और कमरे या हाल की हवा परिवर्तित होती रहे। आज कल यह काम घरों, कार्यालयों और काम करने के स्थान पर कृतिम ढंग से किया जाता है।

    इस संबंध में डाक्टर रेज़ाई ज़ादे कहते हैं कि अब हम घरों में वेन्टीलेश्न के बारे में बात करेंगे। वेन्टीलेश्न हवा के आने जाने को कहते हैं, आजकल हमारे जीवन में जो परिवर्तन आए हैं और जो ढंग हमने जीवन बिताने के लिए अपनाएं हैं और ऊर्जा की बचत के लिए जो उपाय हैं उनके दृष्टिगत अब हम लोग बंद कमरों में जीवन बिताने लगे हैं। हकीम बंद कमरों को पसंद नहीं करते और बल देते हैं कि कमरों में उचित वेन्टीलेश्न होना अतिआवश्यक है, प्राचीन काल के घरों के हर कमरे में विभिन्न खिड़कियां होती थीं, रोशनदान हुआ करते थे जिनसे स्वच्छ हवा का आना जाना बहुत सरल होता था, ठंडी हवा कमरे में आती थी और गर्म हवा कमरे से बड़ी सरलता से निकल जाती थी और कमरे की हवा हर क्षण परिवर्तित होती रहती थी अर्थात कमरे का वातावरण तरोताज़ा रहता था किन्तु आज यह जीवन व्यवस्था नहीं रही, आज के जीवन में ऊर्जा की बचत को प्राथमिकता प्राप्त है, जहां भीषण सर्दी पड़ती है वहां लोग खिड़कियों और दरवाज़े तक की दराड़ें बंद कर देते हैं, खिड़किया और द्वार खोलने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। इस प्रकार से एक प्रकार की घुटन होने लगती है। हमें इस पर ध्यान रखना चाहिए कि ठंडे मौसम में अवश्य ही कुछ देर के लिए खिड़कियां और द्वार खुले रखें ताकि कमरों में ताज़ा हवा आ जाए और गर्म हवा बाहर निकल जाए। इससे रक्त के बहाव में सहायता मिलती है, रक्त बेहतरीन ढंग से शरीर में दौड़ता है, वैचारिक और बौद्धिक शक्ति भी तरोताज़ा हो जाती है, मनुष्य प्रफुल्लता का आभास करने लगता है। मैं आपको यह भी बताता चलूं कि बंद कमरों के वातावरण में मनुष्य थकावट और अवसाद का आभास करने लगता है और एक प्रकार की सुस्ती छा जाती है। हमें इस समस्या पर अवश्य ध्यान देना चाहिए यदि हमारे घरों में अच्छा वेन्टीलेश्न हो और हवा का आना जाना सही हो तो यह समस्त समस्याएं सामने नहीं आएंगी बल्कि हम सदैव तरोताज़ा रहेंगे।

    अब आइये ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित एक पुस्तक से आपका परिचय कराते हैं। मजमूए मूतून व मक़ालात नामक पुस्तक डाक्टर मेहदी मुहक़्क़िक़ ने लिखी है। इस पुस्तक में ईरान और इस्लाम में चिकित्सा के शिष्टाचार पर चर्चा की गयी है। इस पुस्तक के आरंभ में डाक्टर मेहदी मुहक़्क़िक़ ने इब्ने हिन्दु की स्थिति का वर्णन किया है और उसके बाद इब्ने हिन्दु की पुस्तक मफ़ातीहुत्तिब का संक्षेप में वर्णन किया है। उसके बाद कुछ दर्शनशास्त्र और चिकित्सा से संबंधित शब्दावलियों की व्याख्या की है जो इब्ने हिन्दु की पुस्तक में आई हैं। अंत में इब्ने मतरान और उनकी पुस्तक का वर्णन किया है। इस पुस्तक के एक भाग में अबू रैहान बैरूनी और ख़लील इब्ने इस्हाक़ की स्थिति का वर्णन है और इब्ने रिज़वान मिस्र की पुस्तक का उल्लेख भी मिलता है। यह चिकित्सा और चिकित्सा के शिष्टाचार के बारे में एक लाभदायक पुस्तक है।