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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-15

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    साधारणतः यह देखा गया है कि मनुष्य अपने जीवन का एक तिहाई भाग नींद में बिताता है। ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा ने मनुष्य की आयु के इस भाग पर भी विशेष ध्यान दिया है और नींद से बेहतरीन ढंग से लाभ उठाने की उत्तम बेहतरीन युक्ति बयान की है।

    इस संबंध में डाक्टर हुसैन रेज़ाई ज़ादे का कहना है कि जिस बात से आम तौर पर निश्चेतना बरती जाती है वह सही ढंग से सोने और जागने का बिन्दु है क्योंकि उचित नींद और जागना मनुष्य के स्वास्थ पर प्रभावी होता है और नींद के पूरे न होने से मनुष्य विभिन्न बीमारियों में ग्रस्त हो जाता है। आज के मशीनी जीवन में हम इस महत्त्वपूर्ण बात से निश्चेत रहते हैं। यदि हम सही समय पर और सही ढंग से सोने की आदत डालें तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो सकता है और हमें बहुत सी बीमारियों से भी बचा सकता है किन्तु खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि आजकल हमारे काम काज कुछ इस प्रकार के हो गये हैं कि हम न तो अपनी नींद पर ध्यान देते है और न ही बौद्धिक और शारीरिक विश्राम पर। प्राचीन चिकित्सा के विशेषज्ञों और चिकित्सकों का मानना है कि यदि सही समय पर और उचित ढंग से सोया जाए तो इससे आहार के पचने की क्रिया और आहार के शरीर में शोषित होने या दूसरे शब्दों में बेहतर मेटाबोलिज़्म में सहायता मिलती है, इससे बौद्धिक और शारीरिक शक्तियों को सुदुढ़ता मिलती है, शरीर से विषैले पदार्थ निकलते हैं और मनुष्य प्रफुल्लता का आभास करने लगता है। हकीमों ने नींद के समय निर्धारित किए हैं और बल दिया है कि मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए किस समय नींद की आवश्यकता होती है। हो सकता है विभिन्न क्षेत्रों में इस समय में कुछ अंतर हो किन्तु कुछ हकीमों का कहना है कि मनुष्य को रात दस बजे से लेकर सूर्योदय से पूर्व तक सोना चाहिए। आज के आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और उसकी एक शाखा फ़िज़ियालोजी के अनुसार यही नींद का सबसे उचित समय है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है कि रात से सुबह तक सोने से शरीर में हारमोन अच्छे ढंग से बनते हैं और शरीर को शक्ति व सुदृढ़ता प्रदान करते हैं। आज के आधुनिक समाज में इसके विपरीत हो रहा है, आज लोग देर तक जागते हैं और देर से सोकर उठते हैं, यह बात हकीमों के निकट अच्छी व उचित नहीं है।

    सोते समय बेहतर है कि पहले दायीं करवट और फिर बायीं करवट सोएं। पेट के बल सोने से बचा जाए और जहां तक संभव हो सीधा सोया जाए।

    इस संबंध में डाक्टर रेज़ाई ज़ादे मनुष्य के शरीर पर नींद के प्रभाव की समीक्षा करते हुए कहते हैं। हकीमों के निकट नींद, शांति और आराम का दूसरा नाम है, इसी लिए इससे नमी और आर्द्रता में वृद्धि होती है और चूंकि मस्तिष्क और स्नायुतंत्र की प्रकृति ठंडी और नम होती है नींद को मस्तिष्क और स्नायुतंत्र की प्रफुलता के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण बताया गया है। दूसरी ओर जागना, गतिविधि और सक्रियता का दूसरा नाम है। इससे शरीर में गर्मी और सूखापन बढ़ता है। जब मनुष्य सोता है तो उसकी शक्ति व ऊर्जा का प्रवाह शरीर के भीतर की ओर होता है जिससे रक्त के बहाव में बेहतरी आती है, रक्त बेहतर ढंग से पूरे शरीर में दौड़ता है, इसी आधार पर रात में नींद के अवसर पर खाना भी बेहतर ढंग से पच जाता है और शरीर में घुल मिल जाता है। नींद का सबसे उचित समय रात का खाना खाने के बाद दो से चार घंटों के बाद है, औसतन तीन घंटे रख सकते हैं, अलबत्ता यह बात मनुष्य की पाचन क्रिया पर निर्भर है कि मनुष्य की पाचन क्रिया कमज़ोर है या सामान्य है। यदि इस प्रकार समय का ध्यान न रखा जाए तो मनुष्य की पाचन क्रिया प्रभावित होगी और उसे उल्टे सीधे सपनें दिखेंगे। यदि इस समय का ध्यान रखा जाए तो खाना भी सही ढंग से पच जाएगा और सामान्य रूप से पाचन क्रिया सक्रिय रहेगी और चिंताजनक स्वपन भी नहीं दिखेंगे बल्कि मनुष्य सुख चैन का जीवन व्यतीत करेगा।

    संगीत और आकर्षक ध्वनि स्वस्थ लोगों को बहुत ही सरलता से नींद की गोद में पहुंचा देते हैं, इसी प्रकार मालिश भी थकावट से होने वाली अनिंद्रा का प्रभावी और लाभदायक उपचार है।

    डाक्टर रेज़ाई ज़ादे इस बारे में कहते हैं कि सामान्य रूप से वह लोग जो नमी वाले स्वभाव के हैं अर्थात उन पर आर्द्रता का नियंत्रण रहता है या वह लोग जो तरल और गर्म स्वभाव के हैं या ठंडे या तरल स्वभाव के हैं उन्हें अधिक नींद की आवश्यकता होती है और उनके स्वभाव के अनुसार छह से सात घंटों की नींद आवश्यक होती है। यह उनकी मूलाधार आवश्यकता है, इससे कम नींद से उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस बात को दृष्टिगत रखना चाहिए कि यदि यह लोग दस घंटों से अधिक सोएं तो यह उनके लिए बीमारी का रूप धारण कर लेता है और उनकी नींद की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है क्योंकि उनमें तरलता की मात्रा और अधिक बढ़ जाती है और यह लोग धीरे धीरे मोटापे का शिकार होने लगते हैं। जो लोग गर्म स्वभाव के हैं उन्हें अधिक नींद की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि वह चार से छह घंटे सोने के बाद प्रफुल्लता का आभास करने लगते हैं, यह लोग चौबीस घंटों में अधिक से अधिक सात घंटे तक ही सोते हैं, उनके लिए इतनी मात्रा में नींद पर्याप्त होती है। सैद्धांतिक रूप से यह लोग इससे अधिक सो भी नहीं सकते। गर्म स्वभाव विशेषकर गर्म और शुष्क स्वभाव वाले लोगों के लिए प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा का कहना है कि यह लोग चौबीस घंटे कदापि जागते न रहें और इनके लिए परामर्श दिया जाता है कि रात को आवश्यक नींद पूरी कर लें ताकि वह स्वस्थ और चुस्त तंदुरूस्त रहें। यदि यह लोग रात के समय नहीं सोएंगे तो मस्तिष्क के शुष्क होने और मानसिक दबाव का शिकार हो जाएंगे। जिन लोगों को नींद बहुत कठिनाइ से आती है और बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं उनके लिए यह सरल नुस्ख़ा बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो सकता है कि रात में सोते समय मीठे बादाम के तेल की एक बूंद नाक में डाल लें, इससे उन्हें सोने में सहायता मिलेगी और गहरी और अच्छी नींद आएगी और बिस्तर पर करवटें बदलने की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

    बेहतर है कि हर स्वभाव के लोग अपनी आयु पर विशेष ध्यान देते हुए और मौसव व जलवायु को दृष्टिगत रखकर अपनी नींद के समय को निर्धारित कर लें ताकि अच्छी नींद सो सकें और अपने स्वास्थ को बनाए रख सकें।