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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-17

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    जैसा कि आप जानते हैं कि शरीर का एक तिहाई भाग पानी और द्रव से मिलकर बनता है। हम जो पानी का प्रयोग करते हैं उसकी विशेषताएं क्या हैं, कहां से आता है? इन समस्त बातों पर भी ईरान के प्राचीन पारंपरिक चिकित्सकों ने विशेष रूप से ध्यान दिया है।

    इस संबंध में तेहरान विश्व विद्यालय के चिकित्सा विज्ञान के सहशोधकर्ता डाक्टर बाक़िर मीनाई कहते हैं कि हम जिस वातावरण में अर्थात जिस प्रकृति में जीवन व्यतीत करते हैं उसमें बहुत ही सादा व सरल सिद्धांत मौजूद हैं जिनके सहारे हम अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं और इसी प्रकार बीमारियों से स्वयं को बचा सकते हैं। एक वस्तु जो जीवन की मूल आवश्यकताओं में गिनी जाती है पानी है। आप जानते हैं कि इस संसार में समस्त जीवों का जीवन और समस्त वस्तुओं का जीवन पानी पर निर्भर है, जब मनुष्य स्वच्छ पानी देखता है तो उसे प्रसन्नता का आभास होता है जिन लोगों को सिर में निरंतर दर्द रहता है वह पानी का दृश्य देखकर सुख व शांति पा सकते हैं, बहते हुए पानी और उसके साथ चलती हुई हवाओं और हरे भरे वृक्षों और हरियाली का दृश्य देखने से सिर दर्द से छुटकारा मिलता है और मनुष्य को शांति प्राप्त होती है इसी कारण कहा जाता है कि पानी के दृश्य से मनुष्य को शांति व सुख प्राप्त होता है।

    पानी और उसमें मौजूद पदार्थ खाद्य पदार्थों को पकाने में बहुत ही लाभदायक सिद्ध होते हैं। यदि स्वच्छ व साफ़ जल से खाना पकाया जाए तो बहुत शीघ्र ही पच जाता है और शरीर के लिए बहुत ही लाभ दायक सिद्ध होता है।

    इस बारे में डाक्टर बाक़िर मीनाई कहते हैं कि पानी की क्या विशेषताएं हैं? हम किस प्रकार पानी के प्रयोग से लाभ उठा सकते हैं? पानी को केवल साफ़ व स्वच्छ और बिना गंध का होना चाहिए। यदि पानी का स्वाद और रंग व गंध परिवर्तित हो गया है तो उसे प्रयोग नहीं किया जा सकता किन्तु यदि साफ़ सुथरा है जो उसे पीने और खाना पकाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। एक आम सा उदाहरण पेश करता हूं, आप के शरीर में ऐसे अंग हैं जो स्वयं आहार को पचाने का काम करते हैं जैसे अमाशय और यकृत। यह अंग बहुत ही अच्छे ढंग से आहार को पचाते हैं और उन्हें भी पानी की आवश्यकता होती है, शायद इसी कारण भोजन ग्रहण करते समय आपका दिल पानी पीना चाहता है और आप पानी पीते हैं। आहार की पाचन क्रिया में पानी की महत्त्वपूर्ण भूमिका है इसीलिए आप पानी पीते हैं।

    पीने के पानी को ठंडा करने के लिए अच्छा है कि उसे ठंडी हवा में रख दें ताकि वह प्राकृतिक ढंग से ठंडा हो जाए और जहां तक संभव हो फ्रिज में ठंडा हुआ पानी न पीये और फ़्रिज और बर्फ़ से ठंडे किये गये पानी से बचें।

    डाक्टर मीनाई कहते हैं कि जो लोग बर्फ़ का पानी पीते हैं उन्हें क़ब्ज़ की शिकायत हो सकती है उनकी पाचन क्रिया बिगड़ सकती है इसीलिए अपने अमाशय और पाचन क्रिया को सही रखने के लिए ऐसे पानी का प्रयोग करें जो प्राकृतिक ढंग से ठंडा हुआ हो।

    डाक्टर मीनाई का कहना है कि जब आहार शीघ्र पच जाये तो आपको इस आहार के सेवन से प्रफुल्लता का आभास होता है। आपने देखा होगा और अनुभव किया होगा कि वह लोग जो आहार का सेवन नहीं करते वे चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं। वे हर एक से लड़ने झगड़ने पर तैयार रहते हैं और दूसरे लोगों की तुलना में समाज में होने वाले ऊतार चढ़ाव और परिवर्तनों को सहन शक्ति बहुत ही कम होती है किन्तु जो लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार खाना खाते हैं और जिनका पाचन तंत्र अच्छा होता है उनकी सहन शक्ति बहुत अच्छी होती है और वह स्वभाव की दृष्टि से अच्छे होते हैं और हंस कर दूसरों से मिलते हैं और स्वस्थ रहते हैं और उनकी त्वचा भी साफ़ व स्वच्छ होती है। इसका क्या कारण है? इसका कारण यह है कि यह लोग पानी को अच्छे ढंग से प्रयोग करते हैं।

    तेहरान के शहीद विश्व विद्यालय में मेडिकल कालेज प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा की भी शिक्षा दी जाती है जिसमें देश विदेश डाक्टरों को प्राचीन चिकित्सा की शिक्षा दी जाती है। यहां लोग प्राचीन चिकित्सा के सिद्धांतों और मार्गों द्वारा उपचार की शैली से अवगत होते हैं। यह केन्द्र शोधकर्ताओं के लिए बहुत ही लाभदायक है और यहां से उन्हें प्राचीन चिकित्सा के बारे में शोध सामग्री मिल सकती है।

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