islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. पारंपरिक चिकित्सा शैली-18

    पारंपरिक चिकित्सा शैली-18

    पारंपरिक चिकित्सा शैली-18
    Rate this post

    ईरान की पारंपरिक चिकित्सा शैली में स्वस्थ जीवन के छह आवश्यक सिद्धांत में खाने और पीने को विशेष स्थान प्राप्त है। पानी के प्रयोग की शैली और उसकी आहार उपयोगिता स्वास्थय की रक्षा और विभिन्न स्वभावों में संतुलन लाने में बहुत प्रभावी होती है।

    विशेषज्ञ डाक्टर मीनाई का कहना है कि लोगों को चाहिए कि भोजन के पश्चात कुछ मीठा खाएं। इसे अनिवार्य समझें। काश लोग जब दही खाते हैं उसे मुरब्बे के साथ खाएं। उदाहरण स्वरूप पतझड़ या शीत ऋतु में मुरब्बे का प्रयोग बहुत अच्छा है। मुरब्बा बनाने के लिए प्रयोग होने वाले पानी को स्वच्छ होना चाहिए। कुछ लोग यह कह सकते हैं कि वे मुरब्बा नहीं बना सकते। ठीक है अगर मुरब्बा नहीं बना सकते तो पतझड़ और शीत ऋतु में शर्बत बना लें क्योंकि इन ऋतुओं में बहुत से रोग फैलते हैं और शरीर की रचना को ऐसी ऊर्जावान चीज़ों की आवश्यकता होती है कि गर्मी पैदा हो।

    विशेषज्ञ डाक्टर मीनाई कहते हैं कि ईश्वर ने ज़मीन पर मनुष्य को चार काल दिया है। बचपन का काल शून्य से 15 वर्ष की आयु तक, जवानी का काल 15 से 35 वर्ष की आयु तक, प्रौढ़ काल 35 से 60 वर्ष तक और 60 वर्ष के बाद बूढ़ा है। हमारे जीवन के हर काल में पानी का प्रयोग भिन्न होता है। पानी की सहायता से बनने वाले भोजन का प्रयोग भी भिन्न स्तर का होता और मिठाइयों और शर्बतों का प्रयोग भी अलग स्तर का होता है। प्रौढ़ और वृद्ध लोगों के लिए खाने के बाद शर्बत का प्रयोग बहुत लाभदायक होता है। ऐसे शर्बत हैं जो वनस्पतियों से निकाले गए सार से बनते हैं। ऐसे शर्बत हमारे जवानों के लिए अर्थात 15 से 35 वर्ष की आयु के वर्ग के लोगों के लिए और शून्य से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए बहुत लाभदायक हैं। इनके क्या लाभ हैं? इनसे भोजन बेहतर ढंग से अवशोषित होता है। इनसे भोजन बेहतर ढंग से पच जाता है। जब भोजन सरलता से पचेगा तो शांति का आभास होगा और फिर हमें दूसरे पदार्थों की आवश्यकता नहीं रहेगी।

    हमे यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि हर व्यक्ति के लिए उसकी तबीयत, आयु, और उसके जीवन यापन के स्थान की जलवायु के दृष्टिगत पानी के उपभोग का स्तर अलग अलग होता है। जिन लोगों की तबीयत ठंडी और तर है उन्हें कम पानी पीना चाहिए जबकि जिन लोगों की तबीयत गर्म और शुष्क हो उन्हें अधिक पीना चाहिए।

    विशेषज्ञ डाक्टर मीनाई कहते हैं कि क्या आप स्वस्थ यकृत नहीं चाहते? तो फिर नींबू के शर्बत के स्थान पर सिकन्जबीन का शर्बत बनाइये और उसे केसर से सुगंधित कीजिए। यह बात सदैव याद रखें कि जीवन में सुगंधित वस्तुओं का प्रयोग करें। जिस प्रकार आप अपनी त्वचा पर सुगंध का प्रयोग करते हैं ताकि वह सुगंधित रहे उसी प्रकार सुगंधित भोजन खाने से आपके शरीर से सुगंध निकलेगी। जब आप सुगंधित भोजन करेंगे तो जान लीजिए कि आपके शरीर से बुरी महक नहीं निकलेगी। बहुत से लोग जब शौच के लिए जाते हैं तो ट्वाएलेट में उनके शौच के कारण बहुत अधिक दुर्गन्ध फैली रहती है। इसका कारण भोजन का सही ढंग से पच न पाना है।

    पानी के तत्व शर्बतों की भांति शीघ्र पचने की योग्यता के कारण शरीर में तेज़ी से संतुलन लाने और स्वास्थय रक्षा में बहुत सहायता करते हैं।

    विशेषज्ञ डाक्टर मीनाई कहते हैं कि हम जो पानी पीते हैं उसे सुगंधित कर ले उदाहरण स्वरूप बीदमुश्क अर्थात विलो के रस से। युवा जब खाना खाए तो भोजन की समाप्ति से पूर्व मां उसे विलो का रस और सिकन्जबीन मिला कर उसे दे दे। विलो की तासीर ठंडी है। तासीर ठंडी होने के बावजूद इससे ख़ून बनता है। चूंकि युवा गर्म स्वभाव के होते हैं इसलिए उन्हें विलो के रस का प्रयोग करना चाहिए इससे उन्हें शांति मिलती है। उनके शरीर की गर्मी संतुलित हो जाती है। जब युवा के शरीर की गर्मी संतुलित हो जाती है तो भोजन पच जाता है और जब भोजन पच जाएगा तो युवा संतुलित हो जाएगा। न दुर्व्यवहार करेगा और न अधिक बोलेगा। इसी प्रकार वह ऊंची आवाज़ में नहीं बात करेगा और उसका व्यवहार सहन करने योग्य होगा।

    विशेषज्ञ डाक्टर मीनाई कहते हैं कि कुछ लोगों को प्रौढ़ या वृद्ध अवस्था में जब प्यास लगे तो जितना संभव हो उसे सहन करने का प्रयास करें। ऐसा करने से शरीर में एकत्रित आर्द्रता इस प्यास के कारण दूर हो जाएगी और वे स्वस्थ आभास करेंगे और यदि ऐसे लोग कि जिनके शरीर का तापमान अधिक होता है जैसे युवा और बच्चे उनके लिए अधिक पानी पीना लाभदायक है क्योंकि इससे उनके शरीर की गर्मी कम हो जाएगी। तो यह निष्कर्श निकला कि कभी पानी पीना लाभदायक होता है तो कभी पानी पीना शरीर के लिए हानिकारक होता है।

    विशेषज्ञः डाक्टर मीनाई इस संबंध में कहते हैं कि हमें अपने घर में बड़ों से लेकर बच्चों के लिए रस के उपभोग का एक व्यवस्थित कार्यक्रम बनाना चाहिए। मां बाप को ऐसा रस दें जिसकी तासीर गर्म हो क्योंकि वे आयु के उस चरण में होते हैं कि उनका स्वभाव सर्द होता है और बच्चों के लिए ठंडी तासीर वाले रस का प्रयोग करें क्योंकि बच्चे स्वभाव के गर्म होते हैं। इस प्रकार इन लोगों के जीवन में संतुलन पैदा होगा और रस का सही उपभोग लोगों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है।

    हर क्षेत्र में जड़ी बूटियों द्वारा उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण किताबें फ़्लोर किताब श्रंख्ला है। फ़्लोर ऐसी किताबें हैं जिनमें एक क्षेत्र की वनस्पतियों की उपचारिक विशेषताओं का उल्लेख होता है। जैसे ईरान के पठार के फ़्लोर, तुर्की के फ़्लोर, रूस के फ़्लोर या दूसरे क्षेत्रों के फ़्लोर। छात्र और दवानिर्माण व जड़ी बूटियों द्वारा उपचार के क्षेत्र में शोध करने वालों सहित दूसरे रूचि रखने वाले लोग भी इन किताबों से विश्वस्त स्रोत के रूप में लाभ उठाते हैं।