islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. पारंपरिक चिकित्सा शैली-19

    पारंपरिक चिकित्सा शैली-19

    पारंपरिक चिकित्सा शैली-19
    Rate this post

    पानी चाहे वह ज़मीन के भीरत या ऊपर से गुज़रते समय खनिज पदार्थों व विभिन्न प्रकार के नमक को अपने भीतर विलय कर लेता है। इस प्रकार ज़मीन में पानी किन क्षेत्रों से गुज़र कर आया है इस आधार पर मनुष्य के शरीर पर उसके प्रभाव पड़ते हैं।

    विशेषज्ञ डाक्टर मीनाई कहते हैं कि हम जो भी खाना खाते हैं उनमें से अधिकांश पानी से पकते हैं इसलिए हमें इस बात ध्यान रखना चाहिए कि हम जिस पानी का प्रयोग कर रहे हैं वह स्वच्छ हों। कुछ नगर व स्थल के पानी क़ब्ज़ पैदा करते हैं ऐसे नगर व स्थान पर रहने वालों को चाहिए कि पानी को प्रयोग करने के से पहले भलिभांति पका लें और फिर उससे खाना पकाएं।

    कभी कभी इस प्रकार के पानी का ऐसी स्थिति में प्रयोग किया जाता है कि ये क़ब्ज़ के बढ़ने का कारण बनते हैं। आप जानते हैं कि बड़ी आंत की भीतरी झिल्ली में प्याले के आकार की कोशिकाओं से स्राव के कारण शौच सही से होता है और आप जानते ही होंगे पानी वह तत्व है जो इन कोशिकाएं सहायता करता है इसलिए जब हम पानी का प्रयोग करना चाहें तो उसमें उसकी मुख्य विशेषता होनी चाहिए। एक शब्दावली है जिसे आबे आहन ताब कहते हैं। यह आहन ताब पानी किसे कहते हैं? और इसे किस प्रकार तय्यार करते हैं? लोहे का एक टुकड़ा लीजिए और उसे पानी में रख कर पानी को खौलाइये। जब पानी खौल जाए तो उसे ख़ाली कर उसमें फिर पानी डाल कर खौलाइये जब खौल जाए तो उसे ख़ाली कर लीजिए और फिर ऐसे पानी का खाना पकाने के लिए प्रयोग कीजिए क्योंकि अब ये पानी लौह युक्त है। जैसा कि हमारी पारंपरिक चिकित्सा शैली में नैनो पार्टिकल्स का विचार मौजूद है। नैनो पार्टिकल्स पर हुए नए शोध ये दर्शाते हैं कि ये नैनो पार्टिकल्स हमारे शरीर की बहुत की कमियों को दूर कर सकते हैं। आहन ताब पानी शरीर से लौह की कमी को दूर करता है और आप इस पानी को अपने लिए भोजन पकाने में प्रयोग कर सकते हैं।

    यह बिन्दु भी महत्वपूर्ण है कि आहन ताब पानी या संग-ताब पानी का निरंतर प्रयोग किया जाए तब शरीर पर इसके सकारात्मक प्रभाव प्रकट होंगे।

    विशेषज्ञ डाक्टर मीनाई का कहना है कि जो भोजन प्राकृतिक खनिज पदार्थ युक्त होते हैं वे जल्दी से पच जाते हैं और इससे शरीर राहता का आभास करता है और जिस शरीर में भोजन जल्दी पच जाता है उस शरीर की आयु  भी अधिक होती है और व्यक्ति स्वस्थ भी रहता है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि जब लोग मट्ठा बनाते हैं यदि उसमें या उसके पानी में संग ताब पानी मिला ले क्योंकि जो भी मट्ठा प्राकृतिक हो उसमें पत्थर होना चाहिए। ऐसा मट्ठा बनाने के लिए पहले बर्तन में पानी के साथ एक पत्थर रख कर उसे खौलाएं और फिर उस पानी को फेक कर पत्थर को संक्रमण रहित बनाएं और फिर उस बर्तन में पानी डाल कर उसे खौलाएं और उस पानी को ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद उस पानी से मट्ठे को पतला करें उपभोग करें। आप जानते होंगे कि मट्ठा दर्द निवारक है। कभी कभी कुछ लोगों को रात में किन्हीं कारणों से नींद नहीं आती। इस प्राकृतिक दर्द निवारक से बेहतर कोई चीज़ नहीं है। आप जानते हैं कि संग ताब किया हुआ एक या दो कप मट्ठा शरीर के लिए बहुत लाभदायक है। एक तो इससे जल्दी नींद आती है और दूसरे यह कि भोजन हज़्म करता है और तीसरे यह कि चौबीस घंटे में शौच अवश्य होता है। इस बात पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है कि चौबीस घंटे में एक बार शौच अवश्य होना चाहिए यदि ऐसा न हुआ हो तो तुरंत संग ताब किया हुआ मट्ठा पीजिए ताकि यह समस्या दूर हो जाए।

    जिन महिलाओं के शरीर में लौह की कमी है उन्हें चाहिए कि आहन ताब पानी का निरंतर प्रयोग करें क्योंकि शरीर में लौह के अवशोषित होने का एक मार्ग पानी में मौजूद इल्क्ट्रिक चार्ज हुए लौह का प्रयोग है।

    विशेषज्ञ डाक्टर मीनाई कहते हैं आप जानते होंगे कि तांबे के बर्तन में खाना पकाना ठीक नहीं है किन्तु इसके बर्तन में भोजन करना ठीक है और जिन लोगों के शरीर का कोई अंग सुन हो जाता है या उनके किसी अंग में भीतरी चोट लगी हो या जो लोग यह कहते हैं कि उनके शरीर में चुनचुनाहट हो रही है, उन्हें तांबा युक्त पानी पीना चाहिए या तांबे के बर्तन में भोजन करना चाहिए। खाने या पानी के बर्तन में विविधता होनी चाहिए। पानी को तांबे के ग्लास में पीएं क्योंकि ऐसा करने से पानी पर तांबे का प्रभाव पड़ता है और यह लाभदायक है या यह कि पानी पत्थर के ग्लास में पीएं तो इस प्रकार हम पानी के माध्यम से शरीर के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ ग्रहण कर सकते हैं।

    हसन ज़िन्दा दिल ने एक किताब लिखी है जिसका शीर्षक है राहनुमाए आबे दरमानी व चश्मेहाए मअदनीए ईरान। इस किताब में हर प्रांत में मौजूद सोतों और खनिज पान का अलग अलग परिचय दिया गया है। इसी प्रकार इस किताब में इन प्रांतों के पानी के उपचारिक विशेषताओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है। जो लोग पानी द्वारा उपचार में रूचि रखते हैं उन्हें इस किताब से अवश्य लाभ उठाना चाहिए।