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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-20

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    जैसा कि आप जानते हैं कि ईरान की पारंपरिक चिकित्सा शैली के बहुत से समर्थक हैं और यह शैली मानसिक स्वास्थय को बहुत महत्व देती है।

    विशेषज्ञ डाक्टर शीरवान इस बारे में कहते हैं कि प्राचीन ईरान के चिकित्सकों व वैधों के अनुसार खाने भी उन चीज़ों में शामिल हैं जिनसे मन में बुरे विचार घर कर जाते हैं या जिनसे मनोविकार बढ़ता है। इन खाने वाली चीज़ों में बैगन, मसूर की दाल, पत्तागोभी, पुराना गोश्त या कालबास, सॉसिज, हैम्बरगर के रूप में आज के औद्योगिक गोश्त ईरानी वैधों के अनुसार उन लोगों के लिए उचित नहीं हैं जो दुख में घिरे हुए या मनोविकार से ग्रस्त हैं। इसी प्रकार बहुत तीव्र स्वाद वाली चीज़ें जैसे अदरक, सरसो, मिर्च, तेज़ मिर्च वाली चटनियां, अधिक मात्रा में दालचीनी या वे चीज़े जिनसे शरीर में ख़ुश्की बढ़ती है और मनुष्य के स्वभाव पर उसका प्रभाव पड़ता है, ऐसी चीज़ें नहीं खानी चाहिए। ऐसी चीज़ें अधिक दुख या मनोविकार सहित ब्लैकबाइल से होने वाले रोगों में बहुत अधिक हानिकारक होते हैं।

    जो लोग मनोविकार से ग्रस्त हैं उन्हें ऐसी चीज़ें खाने से सावधान रहना चाहिए जो स्नायुतंत्र के लिए हानिकारक हैं। जैसे अचार। अचार के संबंध में लगभग सभी वैध एकमत हैं और विशेष रूप से सिरका और खट्टे फल के रस के सेवन से बचना चाहिए। खट्टे फलों या अचार में नारंज नामक विशेष सिट्रस फल के रस उन लोगों के लिए कम नुक़सानदेह है जो संशय से ग्रस्त रहते हैं किन्तु फिर भी इस बिन्दु पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि नारंज का रस हालांकि अन्य खट्टे रस व अचारों में कम हानिकारक है किन्तु फिर भी वैध अवसादग्रस्त, संशय ग्रस्त और मेलनकोली से ग्रस्त लोगों के लिए इसके नुक़सान से इंकार नहीं करते।

    मनोस्थिति का मानसिक घटनाओं के साथ मनुष्य के शरीर पर बहुत तेज़ व अधिक प्रभाव पड़ता है और स्वास्थ रहने या रोग ग्रस्त होने में इनकी बहुत बड़ी भूमिका होती है।

    विशेषज्ञ डाक्टर शीरवानी का कहना है कि कुछ खाने की वस्तुएं अवसाद या संशय पैदा करने में क्रूर भूमिका निभाती हैं। वैधों के अनुसार जिस चीज़ से शरीर में विशेष रूप से हृदय और मस्तिष्क में ख़ुश्की अधिक होती है उससे मनुष्य में उदासी बढ़ती है, संशयग्रस्त हो जाता है और इसी प्रकार अनिद्रा का शिकार हो जाता है। इसलिए जो भी चीज़ बहुत अधिक ख़ुश्क हो या उसकी तासीर बहुत गर्म हो, इस प्रकार के लोगों के लिए हानिककारक है। इस प्रकार की वस्तुएं बहुत गर्म व ख़ुश्क चीज़ों की श्रेणी में आती हैं। इसी प्रकार पुराना शहद, छोहारा, काजू, मूंगफली, अखरोट सहित सभी सूखे मेवे केवल बादाम को छोड़ कर। बादाम उन लोगों के लिए बहुत लाभदायक है जो मस्तिष्क संबंधी समस्याओं से ग्रस्त होते हैं जैसे देर से समझने की समस्या या कमज़ोर दिमाग़ के लोगों के लिए। ऐसे लोगों के लिए विभिन्न प्रकार से बादाम का सेवन लाभदायक होता है। जैसे आपको एक बहुत ही सरल पेय के बारे में बताते चलें उन लोगों के लिए जो दुख ग्रस्त या मस्तिष्क में ख़ुश्की या इससे जुड़े विकार जैसे अनिद्रा और संशय ग्रस्त लोग हैं। उन्हें चाहिए कि 12 से 14 मीठे बादाम को एक प्याला खौले हुए पानी में भिगो दें और सुबह उसका छिलका उतारकर उसे एक कप पानी और मुरब्बे चम्मच से एक या दो चम्मच शहद के साथ मिक्सर में डाल कर भलिभांति मिला लें उसे नाश्ता करने के एक दो घंटे बाद एक स्वादिष्ट पेय के रूप में पिये। इसके पीने से मस्तिष्क और स्नायुतंत्र को बुरे व नकारात्मक विचारों व भावनाओं, दुख, संशय और उदासी का मुक़ाबला करने की शक्ति मिलती है।

    ईरान की पारंपरिक चिकित्सा शैली के वैधों की दृष्टि में महत्वपूर्ण मनोस्थिति क्रोध, प्रसन्नता, भय, चिंता, दुख, और तिरस्कार है।

    विशेषज्ञ डाक्टर शीरवानी कहते हैं कि गाय का ताज़ा दूध भी उन पेय मे शामिल है जिससे मस्तिष्क की शुष्कता दूर होती है और यह सौदावी स्वभाव और संशय व उदासी ग्रस्त लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक पेय है। अलबत्ता इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सिफ़ारिश यह है कि लोगों को चाहिए कि दूध को नहारमुंह या ख़ाली पेट न पिएं बल्कि कुछ खाने पीने के बाद पिएं। और बेहतर होगा कि दूध पीते समय उसमें थोड़ा सा शहद मिला लें जैसे एक कप दूध में एक मोरब्बे के चम्मम से एक चम्मच शहद मिला लें ताकि शरीर में संतुलित गर्मी पहुंचे और शरीर को इससे लाभ पहुंचे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग मालिख़ूलिया या संशय या अवसाद ग्रस्त हैं उनके लिए अंजीर बहुत लाभदायक है विशेष रूप से यदि अंजीर ताज़ा हो। यदि ताज़ा अंजीर न हो तो सात से दस सूखे अंजीर को रात में एक कप पानी और गुलाब जब में इस प्रकार भिगोएं कि पानी की मात्रा एक तिहाई और गुलाब जल की मात्रा दो तिहाई हो। जब सुबह हो तो नहारमुंह इसे खाएं। या यूं करे कि सुबह भिगो दें और रात को सोने से पहले खाएं। अंगूर भी उन फलों में है जिससे शरीर में ख़ून बनता है और उसे शक्ति प्रदान करता है। इसी प्रकार अंगूर उन लोगों के लिए भी लाभदायक है जो इस प्रकार के मनोविकार से ग्रस्त हैं।

    अप्रिय मानसिक कारक के शरीर पर दुष्प्रभाव शरीर के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थ, या दूषित हवा, या अधिक थकन सहित रोग लाने वाले दूसरे कारणों की तुलना में तेज़ी से प्रकट होते हैं जो ख़तरनाक भी हो सकते हैं।

    विशेषज्ञ डाक्टर शीरवानी कहते हैं कि दुखी और संशय ग्रस्त लोगों के लिए सबसे उचित मांस भेड़ बकरे का मांस है। वैधों के अनुसार ऐसे लोगों को छ महीने से एक वर्ष की आयु वाले भेड़ बकरे के अगले दस्त के मांस को पानी में पका कर देना चाहिए। इसी प्रकार ये मांस उन लोगों के लिए भी लाभदायक है जो शरीर में ख़ुश्की या मस्तिष्क में ख़ुश्की से ग्रस्त हैं। जो लोग सौदावी स्वभाव के हैं या अवसाद ग्रस्त या मनोविकार के शिकार हैं उनके लिए औद्योगिक मांस जैसे कालबास, हैमबर्गर या पुराना मांस नहीं खाना चाहिए। इसी प्रकार बछड़े, गाय और ऊंट के मांस के सीमा से अधिक सेवन से संशय व अवसाद ग्रस्त लोगों का रोग और भयंकर हो सकता है। इस प्रकार के लोगों के लिए एक और महत्वपूर्ण बिन्दु जिसका उल्लेख आवश्यक है वह मांस पकाने की शैली के संबंध में है। इस प्रकार के लोगों के लिए मांस को तेल में भूनने के बजाए पानी में पकाना चाहिए। इसी प्रकार मांस में तेज़ मसाले का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि मसाले या भूनने के कारण मांस के भीतर मौजूद उसकी नमी चली जाती है जिससे इससे पहुंचने वाला लाभ व्यक्ति को नहीं मिल पाता। एक बार फिर इस बिन्दु का उल्लेख करना आवश्यक लगता है कि पकाने वाले मांस को ऐसे भेड़-बकरे का होना चाहिए जिसकी आयु 6 महीने से एक वर्ष के बीच हो। वैधों के निकट अगला दस्त सबसे अच्छा मांस होता है।

    तेहरान स्थित चिकित्सा विश्वविद्यालय में पारंपरिक चिकित्सा विद्यालय की वेबसाइट का एड्रेस हैः www.tim.tum.ac.ir

    इस वेबसाइट पर आप ईरान में पारंपरिक चिकित्सा शैली से संबंधित ताज़ा ख़बरें पढ़ सकते हैं। इसी प्रकार इस वेबसाइट द्वारा चिकित्सा इतिहास के राष्ट्रीय संग्रहालय, चिकित्सकों से विशेष भाग, पारंपरिक चिकित्सा शैली के शैक्षणिक सेशन से संबंधित समाचार और इसी प्रकार ईरान की पारंपरिक चिकित्सा शैली के बारे में विषय-वस्तु से आप लाभान्वित हो सकते हैं।