islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. पारंपरिक चिकित्सा शैली-9 (1)

    पारंपरिक चिकित्सा शैली-9 (1)

    Rate this post

    प्रकृति में हवा, जारी रहने और चलने की प्रतीक है। हवा हल्की और तरल होती है और उसकी वास्तविक विशेषता गर्म होती है। इसी आधार पर ईरान के प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा के विद्वानों और हकीमों ने चार तत्वों में से इस तत्व का नाम तात्विक हवा रखा है। तात्विक हवा का स्वभाव गर्म और तरल होता है।

    डाक्टर नासीरी कहते हैं कि तात्विक हवा  की मात्रा मनुष्य के शरीर में बहुत होती है अलबत्ता तात्विक जल की मात्रा भी अधिक होती है जैसा कि हमने बताया कि तात्विक हवा का स्वभाव गर्म और तरल होता है। आप जानते हैं कि प्रत्येक वस्तु के विकास के लिए गर्मी और तरलता दोनों आवश्यक हैं इनके बिना कोई भी चीज़ विकास नहीं कर सकती यह दोनों तत्व बहुत ही आवश्यक होते हैं। इक्वेटोरियल क्षेत्रों में पेड़ पौधे बहुत अच्छी तरह से बढ़ते हैं और पूरे वर्ष हरे भरे रहते हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में पेड़ पौधों और वृक्षों को उचित गर्मी और मौसम मिलता है जो उनके विकास में सहायक होता है। वह लोग जिनके शरीर में तात्विक हवा दूसरों की तुलना में अधिक होती है, उनका शरीर बड़ा और चौड़ा होता है। हकीमों के अनुसार सबसे बड़े डीलडौल के लोग वह होते हैं जिनके शरीर में तात्विक हवा अधिक होती है उनका चेहरा तनिक लाल, शरीर बड़ा और गठा हुआ होता है। यह लोग तात्विक हवा के कारण सक्रिय व गतिशील होते हैं। भरपूर ढंग से सामाजिक होते हैं और बहुत से लोगों से उनके संबंध होते हैं। उनके पास सबके टेलीफ़ोन नंबर होते हैं और यदि कोई बात हो जाती है तो वह सबको बता देते हैं। बहुत बातूनी होते हैं, उनके संबंध सबसे होते हैं और विस्तृत होते हैं और उनके शरीर का भार भी बहुत अधिक होता है और यह लोग चीज़ों को बहुत शीघ्र ही भूल जाते हैं।

    जिन लोगों के शरीर में तात्विक हवा अधिक होती है उन्हें दमवी स्वभाव वाला कहा जाता है उनके चेहरे का रंग ख़ून के कारण लाल होता है, शरीर भारी होता है और आम तौर पर सुस्त होते हैं। उनकी नींद बहुत गहरी होती है, हमेशा जमाही लेते रहते हैं। शरीर को खींचना और मोड़ना इन लोगों के विशेष चिन्ह हैं।

    डाक्टर नासीरी कहते हैं कि नींद और लेटे रहने की ओर यह लोग विशेष रूझहान रखते हैं। आम तौर पर गहरी नींद सोते हैं जिस प्रकार तात्विक जल के लोग होते हैं, यह लोग भी गहरी नींद वाले होते हैं। आप जानते हैं कि गर्मी ऊंचाई की ओर बढ़ती है। इस स्वभाव के लोग भरपूर समाजिक प्रवृत्ति के होते हैं और सामाजिक गतिविधियां अंजाम देने की भरपूर योग्यता रखते हैं।

    इस संबंध में डाक्टर नासीरी कहते हैं कि कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा के अनुसार, चार मूल तत्वों से बना मनुष्य का स्वभाव एक दूसरे से भिन्न होता है। यह भिन्नता, तत्वों की भिन्नता के कारण है जो मनुष्य के शरीर में पाये जाते हैं। इस प्रकार हर मनुष्य यह समझ जाता है कि वह दूसरे से भिन्न है। इसका व्यवहारिक परिणाम यह है कि विभिन्न स्वभाव के  लोगों को स्वस्थ रखने और उनकी बीमारियों का उपचार करने के लिए विभिन्न मार्गों की आवश्यकता होती है। जिस व्यक्ति के शरीर में तात्विक अग्नि अधिक हेती है उसके लिए बेहतर है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का प्रयोग करे जिनमें तात्विक जल अधिक हो। ऐसे लोग यदि दूध दही का प्रयोग अधिक करें तो उनके शरीर में बेहतर ढंग से संतुलन बना रहेगा। जिन लोगों के शरीर में तात्विक मिट्टी की मात्रा अधिक होती है उन्हें ऐसे खाने खाने चाहिए जिनमें गर्मी और तरलता अधिक हो जैसे बादाम। बादाम बच्चों के विकास के लिए बहुत ही लाभदायक पदार्थ है या बकरे का मांस जिसमें गर्मी और तरलता अधिक होती है। प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा की दृष्टि से बकरे का मांस भी बच्चे के विकास के लिए बहुत अच्छा होता है किन्तु बूढ़ी गाय का मांस ठंडा और शुष्क होता है। यदि उसे मात्रा से अधिक प्रयोग किया जाए तो हानिकारक हो सकता है।

    एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि हर व्यक्ति का स्वभाव दो प्रकार का होता है जन्मजात या प्राप्त किया हुआ। प्राप्त किए हुए स्वभाव का अर्थ यह है कि जलवायु मनुष्य के स्वभाव पर बहुत प्रभावी होती है और सीधे मनुष्य को प्रभावित करती है। अर्थात जहां मनुष्य जीवन व्यतीत कर रहा है वहां की जलवायु मनुष्य के स्वभाव को बनाने में सीधी भूमिका निभाती है। संक्षेप में यह कि वर्ष के चारो मौसमों और फ़सलों और विशेषताओं का मनुष्य के स्वभाव पर पूरा पूरा प्रभाव होता है।

    आज हम आप को मिर्ज़ा तोनेकाबोनी की पुस्तकों के बारे में बता रहे हैं। मिर्ज़ा तोनेकाबोनी क़ाजारी शासन काल के हकीम और चिकित्सा विशेषज्ञ थे जिनका जीवन काल तेरहवीं हिजरी क़मरी में बीता था। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान में बहुत ही महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं जिनमें महत्त्वपूर्ण पुस्तक अस्सूआल फ़ित्तिब है। इस पुस्तक में लेखक ने बीमारियों की पहचान के संबंध में प्रश्नोत्तर प्रस्तुत किए हैं। इस पुस्तक के तीन खंड हैं। इस पुस्तक से ऐसा प्रतीत होता है कि लेखक को बीमारियों की पहचान, उनके उपचार और दवा निर्माण के बारे में मुहम्मद बिन ज़करिया की शैलियां अधिक पसंद हैं। चिकित्सा में रूची रखने वालों के लिए यह पुस्तक बहुत ही लाभदायक है।