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    पारम्परिक चिकित्सा-3

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    आज के औद्योगिक संसार में विकास और प्रगति का एक महत्त्वपूर्ण मापदंड समाज का स्वास्थ और तन्दुरूस्ती है। स्वास्थ और तन्दुरूस्ती के यह अर्थ नहीं हैं कि देश के निवासी हर बीमारी और हर प्रकार के रोग से दो हों बल्कि शारीरिक और मानसिक सुख चैन भी स्वास्थ के अर्थ में शामिल है। प्राचीन चिकित्सा ने भी स्वास्थ के यही अर्थ बयान किए हैं।

    टीकाकार डाक्टर शम्स अर्देकान का कहना है कि अनुचित नहीं होगा कि यदि हम इस बात की समीक्षा करें कि प्राचीन चिकित्सा समाज को स्वस्थ रखने में कैसी भूमिका अदा कर सकता है। यदि अतीत की ओर लौट कर जाएं और कई सौ वर्षों पीछे मुड़कर देखें तो हमें हिदायतुल्ल मुअल्लेमीन पुस्तक के लेखक अबू बक्र अख़वीनी यह कहते दिखाई देंगे कि चिकित्सा एसा व्यवसाय है जो मनुष्य स्वस्थ रखता है और यदि स्वास्थ बिगड़ जाए तो उसे वापस लाता है ज्ञान और व्यवहार द्वारा।

    अबू बक्र अख़वीनी की बात का यह अर्थ है कि चिकित्सा विज्ञान का उद्देश्य वास्तव में मनुष्यों को स्वस्थ रखना है। हमारा प्राचीन चिकित्सा अर्थात जड़ी बूटियों द्वारा उपचार, समाज का स्वास्थ देने की गैरेटी में मूलभूत भूमिका अदा कर सकता है। प्राचीन चिकित्सा उपचार करने से पूर्व स्वास्थ और रक्षा की बात करता है और जैसा कि आप जानते हैं कि स्वास्थ की परिधि उपचार से बड़ी और विस्तृत है और स्वस्थ रहने के लिए मनुष्य को विभिन्न सिद्घांतों पर कटिबद्ध रहना पड़ता है। मुख्य बात यह है कि मनुष्य स्वयं को स्वस्थ्य रखे अर्थात अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे, इसे हमारे प्राचीन चिकित्सा में स्वास्थ्य की रक्षा के नाम से जाना जाता है। यह इस अर्थ में है कि मनुष्य स्वास्थ्य की रक्षा के सिद्धांतों का पालन करके जैसे खाना, नींद और आस पास व जीवन के विभिन्न सिद्धांतों का पालन करके स्वस्थ रह सकता है।

    प्राचीन चिकित्सा कहता है कि मनुष्य को इस प्रकार जीवन बिताना चाहिए कि वह स्वस्थ रहे अर्थात प्राचीन चिकित्सा स्वास्थ औ तंदुरूस्ती को उपचार पर वरीयता देता है और बल देता है कि मनुष्य सोने, खाने पीने और विश्राम तथा प्रकृति व आस पास के संबंध से यथासंभव ऐसे सिद्धांत अपनाए जिन से उसका स्वास्थ और तन्दुरूस्ती ख़तरे न पड़ जाए।

    डाक्टर शम्स अर्दोकानी कहते हैं कि यदि मनुष्य के स्वास्थ को हानि पहुंचे, उसका स्वास्थ जाता रहे और मनुष्य अपने स्वास्थ की रक्षा में सफल न हो सके तो प्राचीन चिकित्सा कहता है कि मनुष्य ऐसे अवसर पर उचित आहार के सहारे अपने स्वास्थ को लौटा सकता है। ईरान के प्राचीन चिकित्सा में स्वास्थ की रक्षा के सिद्धांत सबसे अधिक महत्त्व रखते हैं किन्तु किसी कारण वश मनुष्य का स्वास्थ बिगड़ जाता है तो प्राचीन चिकित्सा के अनुसार उचित आहार खाकर स्वस्थ हुआ जा सकता है। अब यदि इस चरण के बाद भी किसी का स्वास्थ संभल नहीं रहा है और स्वास्थ निरंतर बिगड़ता चला जा रहा है तो उसका उपचार दवा से किया जाता है और दवा भी एक होती है अर्थात उसे मिलावटी दवा नहीं दी जाती बल्कि एक बूटी या जड़ की दवा दी जाती है। इस प्रकार यदि बीमार ठीक हो जाए तो बहुत अच्छा है वरना उसके बाद के चरण में शैख़ अबू अली सीना और ज़करीया राज़ी कहते हैं कि उसे सर्जरी की आवश्यकता होगी। इन महान विद्वानों की पुस्तकों में कैंसर के आप्रेशन और उसके उपचार का भी विवरण बयान किया गया है।

    ईरानी चिकित्सा उपचार को आहार से आरंभ करता है और इस बात पर बहुत अधिक बल देता है कि मनुष्य क्या खाए और क्या न खाए, किस प्रकार खाए, यदि इसके बताए हुए सिद्धांतों का पालन किया जाए तो फिर दवा की आवश्यकता नहीं होती।

    इस संबंध में डाक्टर अर्दोकानी कहते हैं कि यदि हम स्वास्था व्यवस्था में ईरानी चिकित्सा के स्थान की समीक्षा करना चाहें तो हमें पता चलेगा कि ईरानी चिकित्सा का स्थान श्रेष्ठ है। ईरानी चिकित्सा स्वास्थ की रक्षा पर बहुत अधिक बल देता है। व्यक्तिगत स्वास्थ नहीं बल्कि सामूहिक व सामाजिक स्वास्थ की रक्षा पर बल देता है। मेरा मानना है कि आज के आधुनिक चिकित्सा विज्ञान एलोपैथिक के साथ शायद ही कोई ऐसा उपचार का तरीक़ा हो जो ईरानी चिकित्सा की भांति स्वास्थ की रक्षा पर बल देता हो। ईरानी चिकित्सा का समस्त सार यह है कि समाज स्वस्थ रहे, शारीरिक और मानसिक आयाम से, इसीलिए ईरानी चिकित्सा का केवल रोगियों से संबंध नहीं है बल्कि स्वस्थ लोगों से भी उसका संबंध है क्योंकि वह रोगियों को अच्छा करने और स्वस्थ लोगों को स्वस्थ रखने के बारे में सोचता है। मेरा मानना है कि एक औषधीय व चिकित्सा विचारधारा की इससे व्यापक परिभाषा नहीं की जा सकती, इससे हम पता लगा सकते हैं कि ईरानी चिकित्सा एक संपूर्ण उपचार है जिसका मूल उद्देश्य समाज को स्वस्थ रखना है।

    पिछले वर्षों में ईरान में प्राचीन चिकित्सा को पुनः प्रचलित करने का प्रयास किया गया और तेहरान विश्वविद्यालय में इसी उद्देश्य से एक संकाय की स्थापना की गई जो प्राचीन चिकित्सा संकाय के नाम से प्रसिद्ध है। इस संकाय में प्राचीन चिकित्सा की शिक्षा दी जाती है और इसमें विस्तार आ रहा है।