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    पारम्परिक चिकित्सा-4

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    चिकित्सा की हर विचारधारा या थ्योरी अपने विशेष दृष्टिकोण से चिकित्सा के विषय अर्थात मनुष्य के शरीर को देखता है और अपनी विशेष परिभाषा और शब्दकोश रखता है। इन विचाधाराओं से अवगत होने के लिए इन शब्दावलियों, परिभाषाओं और शब्दकोशों का जानना आवश्यक है।

    डाक्टर नासीरी का कहना है कि ईरान का पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा भी मनुष्य और सृष्टि तथा मनुष्य के स्वास्थ और बीमारी के बारे में अपना विशेष दृष्टिकोण रखता है। ईरान के पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा के हकीमों का मानना है कि सृष्टि चार पदार्थों से मिलकर बनी है। यह पदार्थ समस्त जीवों के आधार हैं और इन्हें सृष्टि का आधार कहा जाता है। यह चार पदार्थ मिट्टी, पानी, हवा और आग हैं। इन्हें अनासिरे अरबा अर्थात चार तत्व कहा जाता है।

    अलबत्ता ईरान के पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा में इन चार तत्वों की परिभाषा, मेडलीफ़ की परिभाषा से अलग है, यहां पर इससे चर्चा नहीं की जा सकती और मैं संक्षेप में यह कहना चाहता हूं कि पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा की दृष्टि में तत्व एक विशुद्ध शरीर है अर्थात जब तक दूसरे से नहीं मिल जाता इसमें परिवर्तन नहीं आते, जबकि मेडलीफ़ का कहना है कि तत्व उस पदार्थ को कहते हैं जिसमें एक प्रकार के मोलीक्यूल हों। आप जानते हैं कि मोलीक्यूल, इलेक्ट्रान, न्यूट्रान और दूसरे अणुओं से मिलकर बनते हैं। दूसरे शब्दों में हमारे विद्वान यह कहते हैं कि तत्व अशुद्ध शरीर के लिए आक्सीजन के अर्थ में है। इस आधार पर हमारे बुद्धिजीवी और विशेषज्ञ यह दृष्टिकोण रखते हैं कि सृष्टि चार विशुद्ध तत्वों से मिलकर बने हैं या मिट्टी से या पानी से या हवा से या आग से। अब ये मिट्टी का तत्व उस मिट्टी से अलग है जिसे हम देखते रहते हैं।

    तात्वविद जल उस जल से अलग है जिसे हम सदैव प्रयोग करते रहते हैं क्योंकि समुद्र या नदी का पानी या वह पानी जो हम पीते हैं वह हाइड्रोजन, आक्सीजन और अन्य मूल अणुओं से मिलकर बना हुआ है। तात्विक हवा भी वह नहीं जिसे हम और आप सांस लेते हैं। हमारे विद्वानों के नअसार यह चार तत्व सृष्टि मे अपनी अपनी भूमिका रखते हैं।

    यह जानना आवश्यक है कि पानी, मिट्टी, हवा और आग के शब्द बुद्धि को अर्थों से परिचित करने के लिए हैं और तात्विक मिट्टी का अर्थ सामान्य मिट्टी नहीं है क्योंकि मिट्टी भी स्वयं विभिन्न अणुओं से मिलकर बनी है और इसमें विभिन्न पदार्थ जैसे लोहा, ज़िन्क, पीतल, तांबा और विभिन्न धातें शामिल हैं।

    डाक्टर नासीरी का कहना है कि मैं इस बात को एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार स्वीकार करता हूं, ईरान के पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा के दृष्टिकोण के रूप में। आप जानते हैं कि दृष्टिकोण और सिद्धांत अपनी सीमा में कुछ प्रश्नों के उत्तर देते हैं और कुछ स्थान पर उत्तर नहीं दे पाते, भौतिक विज्ञान में न्यूटन के दृष्टिकोण कुछ बातों को विस्तारपूर्वक बयान करते हैं तो कुछ बातों को बयान नहीं कर पाते। इसी प्रकार सापेक्षता का सिद्धांत भी अपने विशेष मामलों को बयान करता है और मनुष्य के दूसरे मामलों का उत्तर नहीं दे सकते। इसी प्रकार से सारे सिद्धांत हैं। आधुनिक और नवीन चिकित्सा भी अपने कार्यक्षेत्र में मनुष्य की कुछ समस्याओं का समाधान पेश करता है उदाहरण स्वरूप यदि किसी को अपेन्डिक्स हो गया तो नवीन चिकित्सा विशेष शैली अर्थात सरजरी से उसका उपचार करती है। या यदि कोई हाई ब्लटप्रेशर के रोग में ग्रस्त है तो उसे कुछ दवाएं दी जाती हैं किन्तु कुछ मामलों में नवीन चिकित्सा लाभदायक सिद्ध नहीं होता। इस उपचार शैली में कुछ दवाओं द्वारा बीमारी का उपचार किया जाता है अब या तो रोगी दवाएं बंद कर देता है या उसे लंबी अवधि तक दवाएं लेनी पड़ती हैं। जैसा कि हमने कहा कि विभिन्न बीमारियों में नवीन चिकित्सा के पास कोई उपचार नहीं है। कहा जाता है कि बहुत सारी बीमारियां हैं। कुछ लोग तो यह कहते हैं कि तीन हज़ार बीमारियां हैं जिसका उपचार नवीन चिकित्सा के पास नहीं हैं। कुछ लोग पुराने सिरदर्द की पीड़ा में ग्रस्त हो जाते हैं ऐसी बीमारियों में नवीन चिकित्सा की शैलिया काम नहीं आतीं।

    ईरान का पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा कुछ बीमारियों का उपचार करने की योग्यता रखता है और कुछ बीमारियों का उपचार भी उसके पास नहीं है। चिकित्सा की विभिन्न शैलियों और विचारधाराओं का उद्देश्य यह है कि मनुष्य को स्वस्थ रहने में सहायता प्रदान करें, उसकी बीमारियों का उपचार और उसके जीवन को बेहतर बनाने में सहायता प्रदान करें। ईरान का पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा कुछ बीमारियों को ठीक करने की योग्यता रखता है इस आधार पर वह आधुनिक चिकित्सा की सहायता करना चाहता है जैसा कि मैंने कहा कि वास्तव में चिकित्सा की इन विचारधाराओं का उद्देश्य, मनुष्य के जीवन को बेहतर बनाने में सहायता प्रदान करना है।

    यह बात समझना आवश्यक है कि पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा भी आधुनिक चिकित्सा की तरह समस्त बीमारियों का उपचार करने की क्षमता नहीं रखता और न उसे आधुनिक चिकित्सा की जगह दी जा सकती है बल्कि ईरान का पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा आधुनिक चिकित्सा को पूरा कर सकता है और उसकी सहायता कर सकता है और कुछ स्थानों पर जहां आधुनिक चिकित्सा की रासायनिक दवाएं प्रभाव नहीं रखतीं। पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा अपनी जड़ी बूटियों की दवाओं से उसकी सहायता कर सकता है।

    यहां पर हम आपको ईरान के पारंपरिक चिकित्सा सिद्धांत नामक पुस्तक से आपको परिचित करा रहे हैं। इस पुस्तक को लिखने में ईरान के प्राचीन चिकित्सा विशेषज्ञों ने बहुत परिश्रम किया और बेहतरीन व व्यापक पुस्तक चिकित्सा समुदाय के हवाले की। इस पुस्तक को लिखने वाले डाक्टर मोहसिन नासीरी, डाक्टर हुसैन रेज़ाई ज़ादे और डाक्टर रसूल चौपानी और डाक्टर मजीद अनुशेरवानी हैं। इन महापुरूषों ने ईरान के पारंपरिक चिकित्सा को आज की भाषा में पेश किया है। इस पुस्तक में पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा के सिद्धांत, प्राकृतिक मामले और बीमारियों के कारक व कारण और चिन्हों का उल्लेख है। स्वास्थ की रक्षा की युक्तियां, उपचार की शैली व मार्ग, दवाओं की पहचान के सिद्धांत और बहुत सी बातें बहुत ही सरल भाषा में बयान किए गए हैं और इस पुस्तक का अध्ययन पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा से रूची रखने वालों के लिए बहुत लाभदायक हो सकता है।