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    पूर्वी आज़रबाइजान प्रांत-1

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    प्राचीनकाल की धरोहरों को पहचनवाने के लिए संग्रहालयों को एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है और वर्तमान काल में मनुष्य के सांस्कृतिक जीवन में संग्रहालय, महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। १४ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक संग्रहालयों तथा इसके अतिरिक्त कई अन्य निजी छोटे-बड़े संग्रहालयों की उपस्थिति के कारण पूर्वी आज़बाइजान को संग्रहालयों का शोकेस भी कहा जा सकता है। विभिन्न राजाओं के शासन कालों में ५ बार राजधानी रहने के कारण तबरीज़ नगर में बहुत सी ऐतिहासिक इमारतें तथा धरोहरें हैं और यह नगर समृद्ध संग्रहालयों का स्वामी है। इनमें से प्रत्येक, ईरान के इस भूभाग के इतिहास के एक भाग को प्रतिबिंबित करता है। आज़रबाइजान संग्रहालय जो ईरान के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक माना जाता है, तबरीज़ नगर के केन्द्र में स्थित है जो मस्जिदे कबूद के निकट है। वर्ष १९६२ से आज़रबाइजान संग्रहालय खुला हुआ है। यह संग्रहालय तीन हज़ार वर्गमीटर श्रेत्र की आधारभूत संरचना में तीन मंज़िलों में बना हुआ है। आज़रबाइजान संग्रहालय तीन कालों अर्थात इतिहास से पूर्व, इतिहास के काल और इस्लामी काल से संबन्धित है। पांच शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर अबतक के बहुत से अवशेषों के कारण यह संग्रहालय ईरान के पश्चिमोत्तरी क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और कला के जीवंत प्रतीक में परिवर्तित हो गया है। इस संग्रहालय में पाई जाने वाली प्राचीन धरोहरों में पांच शताब्दी ईसापूर्व के कुछ मिट्टी के बर्तन मौजूद हैं। इतिहास से पूर्व के काल के अन्य महत्वपूर्ण अवशेषों में, पत्थरों पर बने फूलों तथा जानवरों के चित्र हैं जिनका संबन्ध तीन शताब्दी ईसापूर्व से है। संग्रहालय के प्राचीन धरोहरों वाले भाग में एक शोकेस में एक हज़ार वर्ष ईसापूर्व के पुरुष और महिला के शव रखे हुए हैं। यह शव १९९९ में कबूद मस्जिद के इर्द-गिर्द की जाने वाली खुदाई में मिले थे।आज़रबाइजान संग्रहालय का एक नया भाग पत्थरों पर लिखे हुए प्रचानी लेखों से संबन्धित हैं। संग्रहालय के इस भाग में विभिन्न कालों के क़ब्रों के पत्थरों को प्रदर्शित किया गया है। इसी प्रकार पत्थर के बने पहाड़ी भेड़ें, पत्थर की मूर्तियां, मानव प्रतिमाएं और पत्थर के शिलालेख आदि संग्रहालय के इस भाग में रखे गए हैं। इसी प्रकार इस संग्रहालय के एक भाग में विभिन्न कालों के बहुमूल्य सिक्के भी मौजूद हैं जो स्वयं में अद्वितीय हैं। आज़रबाइजान संग्रहालय में विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों के साथ ही साथ इसके एक भाग को समकालीन कला से विशेष किया गया है। संग्रहालय के इस भाग में “वर्तमान समय में मनुष्य” शीर्षक के अन्तर्गत तबरीज़ के एक प्रतिभाशाली कलाकार अहद हुसैनी द्वारा बनाई गई बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं रखी हुई हैं। इस ईरानी प्रतिभाशाली कलाकार के अनुसार वर्तमान काल का मानव युद्ध, निर्धन्ता और अन्याय जैसी समस्याओं में घिरा हुआ है। यह भी बताते चलें कि आज़रबाइजान संग्रहालय में ग्यारह हज़ार से अधिक पंजीकृत सांस्कृतिक कलाकृतियां मौजूद हैं और स्थान तथा संभावनाओं की कमी के कारण इनमें से केवल २३०० कलाकृतियां ही देखने वालों के लिए रखी गई हैं। बहरहाल यह कहा जा सकता है कि आज़रबाइजान का संग्रहालय ऐसा मूल्यवान एवं महत्वपूर्ण संग्रहालय है जिसे प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देश और विदेश से लोग देखने आते हैं। तबरीज़ नगर के पुराने मुहल्लों में पहुंचकर हम एसे घरों को देखते हैं जिन्होंने वास्तुकला के रोचक दृश्य उत्पन्न कर दिये हैं। ईरान की नगर निर्माण एवं वास्तुकला की उच्च परिषद की ओर से तबरीज़ को ईरान के छह सांस्कृतिक एवं एतिहासिक नगरों की सूचि में सम्मिलित करने के कारण तबरीज़ नगर के प्राचीन घरों को पहचनवाने और उन्हें लोगों को दिखाने के लिए बहुत से प्रयास किये गए हैं। इन इमारतों या घरों के पुनर्निमाण के साथ इनमें से कुछ के नए रूप में उपयोग बहुत बढ़ गया है। उदाहरण स्वरूप इस संबन्ध में “शर्बत ओग़ली” के घर की ओर संकेत किया जा सकता है जो “क़दकी” नामक अकादमी में परिवर्तित हो चुका है और वर्तमान समय में यह सहंद विश्वविद्यालय का इन्जीनियरिंग कालेज है। इस बीच “मशरूता ख़ाने” को विशेष महत्व प्राप्त है। क़ाजार काल की वास्तुकला शैली वाली यह प्राचीन इमारत, तबरीज़ बाज़ार के पश्चिमी छोर पर स्थित है और वर्तमान समय में यह “तबरीज़ मशरूते संग्रहालय” के नाम से जानी जाती है।१०० वर्षों से अधिक समय पूर्व संविधान क्रांति की सफलता में आज़रबाइजान और वहां की जनता की महत्वपूर्ण भूमिका के दृष्टिगत इस क्रांति के राजनेताओं की यादगारों के साथ ही इस क्रांति की घटनाओं के चित्रों, दस्तावेज़ों और प्रमाणों को सुरक्षित रखने के लिए मशरूते ख़ाने में किसी संग्रहालय की आवश्यकता थी। इसी आधार पर वर्ष १९९६ से ईरान में संविधान क्रांति के काल से संबन्धित समस्त वस्तुओं को आज़रबाइजान संग्रहालय से लेकर और साथ ही संविधान क्रांति के नेताओं तथा संघर्षकर्ताओं की वस्तुओं और जनता द्वारा दान की गई वस्तुओं से मशरूते संग्रहालय का उद्घाटन किया गया। इस संग्रहालय की इमारत तबरीज़ के सुन्दरतम घरों में से एक है जिसके प्रथम स्वामी “हाज मेहदी कूज़े कनानी” थे। यह घर तत्कालीन तानाशाही सरकार के विरुद्व हुए ग्यारह महीने के युद्ध के दौरान, जो संविधान प्रेमियों की विजय पर समाप्त हुआ संषर्घ के लिए स्वतंत्रता प्रेमियों का केन्द्र समझा जाता था। १२०० वर्गमीटर में फैली इस इमारत को वर्ष १९७५ में ईरान की राष्ट्रीय धरोहर की सूचि में पंजीकृत किया गया। मशरूते संग्रहालय में संविधान क्रांति के काल के समस्त प्रमाणों और दस्तावेज़ों को प्रदर्शित किया गया है। इस संग्रहालय में संविधान क्रांति के नेताओं की निजी वस्तुएं, दस्तावेज़, लिखित आदेश, क्रांतिकारियों के साथ ही तत्कालीन सरकारी बलों की लिखित बातें, स्वतंत्रता प्रेमियों के उस काल के समाचारपत्र और पत्रिकाएं तथा इसी प्रकार की अन्य बहुत सी सामग्रियां रखी हुई हैं। मशरूते संग्रहालय में रखी गई वस्तुओं के महत्व के दृष्टिगत इसे ईरान के तत्कालीन इतिहास का विशेष संग्रहालय कहा जा सकता है। प्रिय श्रोताओ, आज़रबाइजान संग्रहालय में कुछ समय व्यतीत करने के पश्चात हम आपको तबरीज़ के एक पर्यटन स्थल चलने का निमंत्रण देते हैं जिसका नाम है “ईलगुली।”ईलगुली, तबरीज़ नगर का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है जो तबरीज़ के विस्तार के साथ इस समय नगर के भीतर है। यह पर्यटन स्थल वास्तव में एक सुन्दर उद्यान है जिसके बीच में एक बहुत बड़ा हौज़ बना हुआ है। पांच दश्मलव पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली ईलगुली झील में २००० घनमीटर पानी की क्षमता है। अपनी वैभवता तथा व्यापकता के कारण इस झील को विगत में शाह गुली या बड़ी झील के नाम से पुकारा जाता था। इस्लामी क्रांति की सफलता के पश्चात इस झील का नाम ईलगुली रखा गया।सफ़वियों के सत्ता में आने से पहले तक ईलगुली झील, तबरीज़ के पूर्वी क्षेत्रों के बाग़ों की सिंचाई के लिए जल का सबसे बड़ा स्रोत थी। सफ़वियों के सत्ताकाल के दौरान इसके चारों ओर पत्थर की दीवार बनाई गई और क़ाजारी काल में इसके इर्दगिर्द आने-जाने के उद्देश्य से सड़कों का निर्माण किया गया और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने तथा पर्यटक स्थल को सुन्दर बनाने के उद्देश्य से इन मार्गो के किनारे-किनारे विभिन्न प्रकार के फूलों और फलों के वृक्ष लगाए गए।जलकुण्ड के बीच में स्थित ईलगुली महल को सुल्तान याक़ूब आक़ क़ूयून्लू के शासनकाल में बनाया गया था जिसमें विस्तार, सफ़वीकाल में हुआ। सफ़वीकाल के क़हरमान मिर्ज़ा नामक एक युवराज ने इस इमारत को पूरा करवाया और उसे एक राजशाही पर्यटक स्थल का रूप दिया। हालिया कुछ वर्षों के दौरान पहली इमारत के स्थान पर एक नई इमारत बनाई गई है जो वर्तमान समय में रेस्टोरेंट के रूप में प्रयोग हो रही है। इस पर्यटक स्थल के किनारे पांच सितारा होटल बनने से पर्यटकों के लिए यहां के वातावरण और यहां पाई जाने वाली संभावनाओं से अधिक से अधिक लाभ उठाने का अवसर उपलब्ध हुआ है।