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    पैग़म्बरे अकरम (स.) की पूत्री

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    अहले बैत (अ) खा़न्दाने वही है

    ज़रुरी है कि सार के तौर पर गुज़ारीश के साथ अहले बैत गिरामी हज़रत फातिमा ज़हरा व अएम्माह अतहार (अ) के इतिहास को बयान करुँ।

     

    पैग़म्बरे अकरम (स.) की पूत्री

    हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) की, वलीदे गिरामी अल्लाह की तरफ़ से भेजा हुआ बन्दा मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह, व आपकी सम्मानिता माता बानोये ईस्लाम हज़रत ख़दीजा (उम्मुल मोमेंनीन )) है।

    हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) आप जानशीने बर हक़ पैग़म्बरे (स.) हज़रत अली अमिरुल मोमेंनीन (अ) की स्त्री और ग्यारह इमामों की माता जो सबके सब हुज्जते ख़ुदा है।

    हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) ने बीस जमादिउस सानी को विलादत पाई, और तीसरे जमादिउस सानी मगंल के दिन पैग़म्बरे अकरम (स.) के हिज़रत के ग्यारा साल बाद 18 बर्स की उम्र में शाहादत पाई।

    आपकी वसीयत के मुताबीक़ गुस्ल व कफन का मरासीम हज़रत अली (अ) के दायित्व थी,आपका जानाज़ह मदीना शहर में ख़ूफिया स्थान पर और मख़फियाने तौर पर मिट्टी दि गई,ताकि आपकी मज़लूमियत ग़ासीबे हक़ के लिए क़यामत के दिन तक प्रमाण रहे। यह पवित्रता महिला, अल्लाह की इबादत, परहेज़गार और फज़िलत में आपने पिता रसूल (स.) के सम्पू्र्ण आयेनाह थीं, जिसके सम्पर्क अल्लाह ने पवित्र ग्रंथ क़ुरआन मज़ीद में कई आयतें नाज़िल किया हैः पैग़म्बरे अकरम (स.) अल्लाह के निर्देश के मुताबिक़ (سيدة نساء العالمين) का उपाधी दिया है। और रसूले ख़ुदा हज़रत फातिमा ज़हरा (साला0) को बहुत प्यार करते थे जब फातिमा ज़हरा (साला0) रसुलूल्लह के पवित्र सेवा में जाती थी तो रसूले ख़ुदा फातिमा के सम्मान के लिए ख़ड़े हो जाते थें और आने के लिए उन को मुबारक पेश करते थें, और आपने बग़ल में बैठाके हाथ को चूमते थे, आपने कई बार फरमयाः

    ((ख़ुदाया फातिमा की ख़ुशी मेंरी ख़ुशी, और उन की नाराज़ी मेंरी नाराज़ी)) और हज़रत अमिरुल मोमेंनीन अली (अ) के लिए कई औलाद का नाम लिए पूत्रीयों में से हज़रत ज़ैनब,उम्मे कुलसूम और पूत्रों में से हज़रत इमाम हसने और इमाम हुसैन (अ) का नाम फरमयाः और ज़नाब मोहसिन ( ग़ासीबे ख़िलाफत वालों ने ) फातिमा (स.) को कष्ट व दुःख देने के कारण से शहीद हो गये।