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    पैग़म्बरे ईलाही दो प्रकार है

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    1- ग़ैरे उलुल अज़म वह है जो लोग़ मात्र तबलीग़ करते है, और उन लोगों के लिए कोई आसमानी पूस्तक नहीं है।

    2- उलुल अज़मः वह लोग है जिन लोगों को अल्लाह ने दीनि व आसमानी ग्रंथ प्रदान किया है. और इस्लाम को प्रचार किया है, और यह पाँच अज़ीम व्यक्तित्व हैं जिन लोगों को अल्लाह ने प्रत्येक नबी (अ) को विशेष विशेष स्थान व अल्लाह के निर्देश को इंसानों तक पहुचाना और उन इंसानों को पथ प्रदर्शन करने के लिए पश्चिम ता पौरब दायित्व पर थे, जिन लोगों का नाम तर्तीब के साथ बयान हो रहा हैः

    1- हज़रत नूह (अ)

    2- हज़रत इब्राहीम (अ)

    3- हज़रत मूसा (अ)

    4- हज़रत ईसा (अ)

    5- हज़रत मुहम्मद (स.)

    जिन के उपर नबूवत (समाप्त घोषणा हो चुकी है) और अम्बिंया ईलाही की मोहर समस्त हो चूकी है, और आप आख़री पैग़म्बार ईलाही है।

    आप पर इस्लाम -धर्म की समस्त प्रकार क़वानीन परिपूर्ण हो चूका है. और यह इस्लाम इंसानो के समस्त प्रकार नियाज़ को दूर करेगें, चाहे जिस यूग में क्यों न हो, यह आख़री शरीयत है, और अल्लाह ने दूसरी शरीयत को मनसूख़ किया है। और अपर शरीयत की अनुशरण करने के लिए निर्देश नहीं दिया है।

    ( अगर कोई व्यक्ति इस्लाम धर्म के व्यतीत किसी अपर धर्म को क़बूल करे, वह धर्म क़बूल करने के उपयुक्त नहीं है, और वह आखेरत में घाटा उठायेगा)। (5)

     

    पैग़म्बरे गिरामी (स.)

    पैग़म्बरे अकरम (स.) की मशहूर व मारुफ़-प्रसिद्ध रुहानी जीवन के सम्पर्क में सार के तौर आपकी मौति वाली जीवन और ज़िन्दगी के सम्पर्क इस अध्याय में कुछ बयान करुँ।

    आपके पवित्र नाम मूहम्मद (स.) जिस का शब्दार्थ यह है कि प्रसंसा व पछन्दिदा, आप के सम्मानी पिता अब्दुल्लाह और सम्मनिता माता जो फ़ज़ीलत की मालिका थी, आमिना बिन्ते वहाब। राह्मातूल लील् अलामीन रोज़े जुमआ सुबह सादिक़ से पहले 17 रबिउल अव्वल साले अमले फ़िल नोशिरवान अदिल के यूग में पृथ्वी में क़दम रख़ा। और 27 रजब साले 610मिलादी 40 साल की पवित्र उम्र में अल्लाह की तरफ़ से रिसालत के मालिक हूए. प्रथम बार जिब्राईल आमीन आल्लाह की तरफ़ से सूरा अल्क़ की 5 आयत लेकर आप पर नाज़िल हूए,जिस में इर्शाद होता हैं किः

    पैग़म्बरे तुम आपने पर्वरदिगार का नाम याद करो, जिस ने इंसान को जमा हुआ रक्त से पैदा किया, शुरू करो तुमहारे परवर्दिगार के नाम जो बडा़ करीम है. जिस ने इंसान को क़ल्म के माध्यम लिख़ना व पड़ना सिख़ाया जिस सम्पर्क में इंसान किसी प्रकार का ज्ञान नहीं रखता था …..। (6)

    दुश्मनों के सख़्त दुश्मनी व विभिन्न प्रकार के बाधा होने के बावजूद आल्लाह के निर्देशों को लोगों तक पहुचाना शुरू किया और कुछ दिनों के बाद अल्लाह की तरफ़ से वही नाज़िल हुई,पैग़म्बरे सब से पहले आप आपने निकटतम रिश्तेदारों को भय प्रदर्शन करो। (7) फिर दीन इस्लाम की तब्लीग़ करने के लिए जन साधारण को आमंत्रन का पैग़ाम भेज़ो।

    ((…. पैग़म्बरे (साः) ने जिस चीज़ का तुम को प्रचार करने का निर्देश दिया गया हैं उस को प्रचार करो और मुशरीक़िनियों से भय व परवा न करो मैं तुम को दुश्मनों के शर से संरक्षण करुगाँ। (8)

    पैग़म्बरे अकरम (स.) अल्लाह के समस्त प्रकार निर्देशों को पहचाने के लिए मसजिदुल हराम और शहर के समस्त प्रकार जनसाधारण मर्कज़ में सून्दर कलेमा साथ तब्लीग़ करना शुरू क्या

    بسم الله الرحمن الرحيم

    قولوا لااله الا الله تفلحوا

    तौहीद की शब्द ध्वनी की, और सर सख्त दुश्मन का मुख़ालिफ़ में आगये और विभिन्न प्रकार मज़ाक़ में गिरफ़तार हो गये. (इतना आपको कष्ट पहँचाया) कि आपने फरमायाः (( हमारे जैसा कोई पैग़म्बरे नहीं हैं कि कष्ट भोगा हो))।

    प्रथम मूमिन व मूमिना

    समस्त प्रकार अतीत इतिहास लिख़ने वालों का एकत्रित दृष्ट है कि प्रथम ईमान लाने वाले और पैग़म्बरे अकरम (स.) के इस्लाम को अमंत्रन ग्रहण करने वाले बहादुर व्यक्ति हज़रत अली (अ) है। और नारींयों में प्रथम ईमान लानी वाली पाक व पवित्रा नारी बावफ़ा बीबी हज़रत ख़ादीजतूल कुब्रा (सालाः). सिपासः बहूत कम हि लोग थें कि आपकी आस्मानी अमंत्रन व इस्लाम को दिल व जान से ग्रहण किया था, लेकिन इसके बावजूद, कष्ट, अर्थव्यबस्था का मुहासिरह करना और मुशरिकीन समाज की तरफ़ से आप लोगों पर दबाउ सृष्ट करना वगैरह……।