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    प्रकृति का अमृत-मधु

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    पूरे इतिहास में मधुमक्खी का सम्मान मनुष्य करते रहे हैं। क़ुरआने मजीद, इन्जील और तौरैत जैसी सभी ईश्वरीय ग्रंथों में इसी प्रकार हिन्दुओं की पुस्तकों में और इसी प्रकार यूनान और रूम के प्राचीन आलेखों में एक प्रयत्नशील और लाभ दायक कीड़े के रूप में मधु मक्खी को और बहुत बीमारियों की दवा और शक्तिवर्धक चीज़ के रूप में मधु को याद किया गया है। इन्जील ने मधु को बहुत सी अनुकंपाओं का प्रतीक बताया है। क़ुरआने मजीद में भी मधु को ईश्वरीय उपहार के रूप में याद किया है। पवित्र क़ुरआन की एक सूरे का नाम नहल अर्थात मधुमक्खी है। अल्लाह ने पवित्र क़ुरआन में मधु को लोगों के लिए विभिन्न प्रकार की बीमारियों की दवा और लाभदायक बताया है।प्राचीन समय में भी बहुत से बुद्धजीवी इस मीठे और स्वादिष्ट द्रव के प्रयोग की सलाह देते थे और इसे अपने आहार में प्रयोग करते थे। अरस्तू ने अपनी पुस्तक प्राचीन सूर्य और मधुमक्खियों का पालन पोषण में मधु की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया है। तत्वज्ञानी गैलेन्यूस अर्थात जालीन्यूस का भी मानना है कि मधु कुछ बीमारियों के उपचार में चमत्कार दिखाता है। यूनानी दार्शनिक और तत्वज्ञानी हिप्पोक्रेटिस अर्थात बुक़रात जिन्होंने 107 वर्ष की आयु पायी थी, निरंतर मधु का प्रयोग करते थे और अधिकांश बीमारियों के उपचार के लिए इसका चयन करते थे। हिप्पोक्रेटिस अर्थात बुक़रात अधिकांशतः मधु को दस्त लाने वाला और स्नायुतंत्र, यकृत और गुर्दों की पीड़ा के उपचार लिए सलाह देते थे। प्रसिद्ध ईरानी विद्वान अबू अली सीना ने भी क़ानून नामक अपनी चिकित्सा की पुस्तक में विभिन्न बीमारियों के उपचार में मधु की लाभदायक विशेषता को बयान किया है और इस पर विशेष ध्यान देते थे।जीवनदायक द्रव के रूप में प्राकृतिक मधु में प्रचुर मात्रा में विभिन्न विटामिनें पायी जाती है। यह विटामिन्स जीवन की गतिविधियों और प्रक्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्रप बी की विटामिनें जो अधिक महत्त्वपूर्ण हैं, विटामिन ई, के, सी, और ए मधु में पायी जाने वाली विटामिन्स हैं किन्तु मधु में पाये जाने वाले अधिकांश द्रव शरकरा होते हैं। आहार विज्ञान के विद्वान अपने नवीन शोध में इस परिणाम पर पहुंचे कि मधु में मौजूद शरकरा का स्तर मधु के वज़न से 75 से 79 प्रतिशत होता है। इस दृष्टि से मधु के समान किसी भी फ़ल या शीरे में इतनी शरकरा नहीं पायी जाती। मधु में पाये जाने वाले प्रोटीन भी ध्यान योग्य हैं। यह प्रोटीन बहुत शीघ्र पच जाते हैं और शरीर के विभिन्न भागों में समा जाता है। इसी प्रकार मधु में पाये जाने वाले एन्ज़ाइम भी आहार की पाचन प्रक्रिया में प्रभावी हैं। आहार विज्ञान के विद्वान और पर्यावरण विशेषज्ञ मधु के समावेश की समीक्षा में इस परिणाम पर पहुंचे कि मधु, मनुष्य के शरीर के आवश्यकता के खनिज लवण का सबसे समृद्ध स्रोत है। इसिलिए मधु मनुष्यों के लिए सबसे मूल्यवान और महत्त्वपूर्ण आहार समझा जाता है। सोडियम, फ़ास्फ़ोरस, पोटैशियम, कैलशियम, मैगनिशियम, लोहा और तांबे जैसे तत्व जो मधु में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, शरीर की मांसपेशियों, हड्डियों के निर्माण और इसको सुदृढ़ करने में बहुत प्रभावी हैं। शोधकर्ता शोध केन्द्रों में मधु में पाए जाने वाले अन्य स्रोतों की खोज का प्रयास कर रहे हैं। वे मधु में पायी जाने वाली असंख्य विशेताओं की खोज में व्यस्त हैं जिसे क़ुरआन ने मनुष्यों के लिए प्रस्तुत किया है।मधु के बारे में पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लो अलैहे व आलेही व सल्लम कहते हैं। अल्लाह ने मधु में अनुकंपाए रखी हैं इसमें बीमारियों का उपचार है और 70 ईश्वरीय दूतों ने ईश्वर से इसके लाभ को जारी रखने की मांग की है।ईश्वर सूरए नहल की 68वीं और 69वीं आयतों में इस मूल्यवान द्रव के बारे में कहता है और तुम्हारे ईश्वर ने मधुमक्खी को आदेश दिया कि पर्वतों, वृक्षों और घरों की ऊंचाईयों पर अपने घर बनाए। इसके बाद विभिन्न फलों से आहार प्राप्त करें और नर्मी के साथ ईश्वरीय मार्ग पर चले जिसके बाद उसके पेट से विभिन्न रंगों के पेय निकलते होंगे जिसमें पूरे मानवीय समाज के लिए उपचार है और उसमें भी विचार करने वाली जातियों के लिए एक निशानी है।क़ुरआन की दृष्टि से मधुमक्खी के जीवन की घटना और यह कि यह जीव मनुष्य के लिए उपहार है, उन लोगों के लिए जो विचारक और बुद्धजीवी हैं, ईश्वरीय विभूतियों का स्पष्ट चिन्ह है।

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