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    प्रकृति का संगम, रश्त

    प्रकृति का संगम, रश्त
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    जंगल, वर्षा, चावल, रेशम, उफनती नदियों, बैगनी फूलों के विशाल स्थान, बसंती गुलाब, कमल के फूल, मुर्ग़ाबियों, हंसों, और विविधतापूर्ण वनस्पतियों जैसी विशेषताओं से संपन्न प्रांत का नाम गीलान है। गीलान प्रांत के नगर अपनी वास्तुकला, आर्थिक गतिविधियों, प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महत्व के कारण इस क्षेत्र के पर्यटन आकर्षण समझते जाते हैं। गीलान प्रांत में लगभग तीस नगर हैं कि इनमें से हर एक अपनी स्थिति, व्यापकता, जनसंख्या और क्षेत्रीय विशिष्टता के लिए जाना जाता है। यद्यपि गीलान के नगर आबादी की दृष्टि से समान नहीं हैं किन्तु एक दूसरे के निकट स्थित होने के कारण बड़ी सरलता से एक नगर से दूसरे नगर पहुंचा जा सकता है। इसी प्रकार ये नगर अपनी स्थिति के अनुरूप जनकल्याण सुविधाओं से संपन्न हैं। यहां तक कि इस क्षेत्र के छोटे से छोटे नगर में भी बड़े शहर जैसी चहल पहल दिखाई देती है।

    सबसे पहले आपको गीलान प्रांत के रश्त नगर से परिचित कराते हैं। ऐसा शाहर जो अपनी उपजाउ ज़मीन और अच्छी जलवायु के कारण आर्थिक दृष्टि से विशेष स्थान रखता है। यह नगर चावल, तम्बाकू, चाय और रेशम के कीड़े के पालन का केन्द्र है। यह वह नगर है जो प्राचीन समय में ईरान से योरोप तक एकमात्र संपर्क व वाणिज्यिक मार्ग समझा जाता था। रश्त ज़िला कैस्पियन सागर से 30 किलोमीटर दूर अल्बुर्ज़ पर्वत श्रंख्ला के उत्तर में एक विशाल पठार पर स्थित है जिसकी भूमि सिल्टी (silty ) है । यह नगर बंदर अंज़ली ज़िले के दक्षिण में स्थित है। इसी प्रकार इस नगर की ऊंचाई समुद्र तल के समान है। यह नगर पूरब से सियाह रूदबार नामक नदी और पश्चिम से गौहर रूद नामक नदी के बीच में स्थित है। यह नदियां उत्तर में जाकर मिल जाती हैं और अंज़ली के सुदंर सरोवर में गिरती हैं।

    रश्त नगर में वर्षा बहुत होती है इसका कारण कैस्पियन सागर से निकटता तथा इस सागर के पूर्वोत्तर से दक्षिण-पश्चिम की ओर बहने वाली हवा है इसलिए रश्त की गिनती ईरान के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में होती है।

    रश्त नगर के मुख्य निवासी गील नामक जाति के सदस्य हैं। यह जाति बहुत पहले ईसा पूर्व से वर्तमान स्थान में रहती आ रही है। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार यह नगर इस्लाम से पूर्व भी मौजूद था और इसका इतिहास सासानी शासन श्रंख्ला से मिलता है।

    इस्लामी काल में सफ़वी शासन काल तक रश्त नगर में बहुत विकास नहीं हुआ था किन्तु शाह अब्बास द्वितीय के समय से क़ाजारी शासन के अंत तक रश्त बहुत बड़ा व्यापारिक केन्द्र रहा और इस नगर में रुकने वाले कारवां इस नगर द्वारा भूमध्यसागर के तटवर्ती देशों को अपनी वस्तुएं भेजते थे।

    रश्त नगर में बहुत से पर्यटन आकर्षण हैं। वास्तुकला की दृष्टि से इसकी अनुपम शैली है कि जिसका प्रतिबिंबन नगर का मुख्य मैदान है जो मैदाने शोहदा के नाम से प्रसिद्ध है। इस मैदान के चारों ओर मौजूद इमारतें एक जैसी हैं जो अपने समय की वास्तुकला का परिचय कराती हैं। रश्त के कुछ प्राचीन घर वास्तुकला, चित्रकला, और प्लास्टर के काम की दृष्टि से बहुत मूल्यवान हैं और इन घरों में बहुत ही मूल्यवान अवशेष हैं इसलिए सांस्कृतिक धरोहर के रूप में इन्हें पंजीकृत किया गया है।

    गीलान की सैर करने वाले पर्यटकों में अधिकांश पर्यटकों ने रश्त नगर के संबंध में यात्रावृत्तांत लिखा है। उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में गीलान की यात्रा करने वाले जर्मन पर्यटक टेरज़ेल अपने यात्रा वृत्तांत में रश्त के घरों के बारे में इस प्रकार वर्णन करते हैः रश्त के घर ईंट के बने हैं जिनकी छतें नरियों-खपड़ों की हैं। नरियों-खपड़ों की छतें गीलान की वास्तुकला व भौगोलिक स्थिति के अनुरूप हैं।

    मोहतशम बाग़ या नगरपालिका पार्क भी रश्त नगर का एक दर्शनीय स्थल है। यह बाग़ लगभग 130 वर्ष पुराना है जिसमें चेनार के ऊंचे ऊंचे वृक्ष देख कर ऐसा लगता है मानो ये वृक्ष इस बाग़ की गाथा सुनातें हैं। यही कारण है कि रश्त नगर की सैर करने वाले अधिकांश लोग कुछ समय इस घने व ऊंचे ऊंचे वृक्षों वाले बाग़ में अवश्य बिताते हैं।

    मोहतशम बाग़ में मौजूद दो मंज़िला सुदंर इमारत भी इस बाग़ का अनुपम आकर्षण है। इस इमारत की हर मंज़िल पर दो बड़े बड़े कमरे हैं। यह इमारत लगभग 240 वर्गमीटर के क्षेत्रफल पर बहुकोणीय रूप में बनी है। इस इमारत के खंबे नीले रंग के और लाल रंग के नरियों-खपड़ों से सुसज्जित इसकी छत रश्त नगर की अन्य इमारतों से इसे विशिष्टता दिलाती है। विगत में इस इमारत में 7 हज़ार वर्गमीटर, लकड़ी की चारदिवारी से घिरा एक प्रांगण था जिसमें गीलान के शासक ठहरते थे।

    रश्त का एक और दर्शनीय स्थल इस नगर का बाज़ार है। रश्त नगर के विशाल बाज़ार की संरचना प्राचीन है और यह नगर के केन्द्र में स्थित है और इसकी गीलान प्रांत की वाणिज्यिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण भाग के रूप में गणना होती है। हर दिन रश्त नगर के पड़ोसी नगरों व गावों से इस बाज़ार में हज़ारों लोगों का लेन-देन के लिए तांता बंधा रहता है। इस बाज़ार में नाना प्रकार के कृषि उत्पादों के अतिरिक्त दैनिक जीवन की आवश्यक वस्तुएं भी मिलती हैं।

    रश्त का पारंपरिक बाज़ार बड़े व छोटे मैदानों, चौराहों और कारवांसरायों पर आधारित है। कारवांसरायों की वास्तुकला और रश्त के बाज़ार में बने मेहराब, इस बाज़ार का एक अन्य पर्यटन आकर्षण हैं कि जिसे देखने के लिए विशेष रूप से पर्यटक आते हैं। कृषि उत्पादों का बड़े ही मनकोहक ढंग से सजाया जाना भी रश्त नगर का एक और महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण समझा जाता है। रश्त के बाज़ार में जगह जगह पर इस प्रांत की फ़ोल्कोरिक संस्कृति के सुंदर नमूने दिखाई देते हैं जो बाज़ार में उपस्थित हर व्यक्ति को अपनी ओर सम्मोहित करते हैं।

    रश्त का बाज़ार 24 हेक्टर पर फैला है और इसमें 14 कारवांसराय हैं। ये कारवांसराय विभिन्न गलियों से एक दूसरे से जुड़ी हुयी हैं। ये कारवांसराय क़ाजारी शासन और पहलवी शासन के आरंभिक काल में वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए बनाई गयी थीं।

    इनमें से कुछ प्रसिद्ध कारवांसराय के नाम हैं, कारवांसराय ताक़ीहाए बुज़ुर्ग व कूचिक अर्थात बड़ी व छोटी मेहराबों वाली कारवांसराय, सआदत कारवांसराय, मोहतशम कारवांसराय, चीनी-चियान कारवांसराय, मलिक कारवांसराय इत्यादि।

    ताक़ी बुज़ुर्ग कारवांसराय का निर्माण 1321 हिजरी क़मरी में किया गया। यह कारवांसराय ताक़ी कूचिक कारवांसराय और सोनारों की गली क्रमांक दो के दक्षिणी छोर पर और क़ैसरिये फ़ख़्र नामक सराय के पश्चिमी छोर पर स्थित है।

    ताक़ी कूचिक कारवांसराय हाज मुजतहिद मस्जिद के बग़ल में स्थित है और मस्जिद का दक्षिणी प्रांगण इस कारवांसराय से जुड़ा हुआ है।

    ताक़ी सआदत नामक कारवांसराय बड़े मैदान के निकट स्थित है और नगर के भीतर मौजूद बाज़ार की संरचना में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह कारवांसराय क़ाजारी शासन काल में बनाई गयी है और विगत में महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र में इसकी गणना होती थी।

    मोहतशम कारवांसराय भी अन्य कारवांसराय की भांति बाज़ार के 24 हेक्टर के क्षेत्रफल में स्थित है। इसका निर्माण 1300 हिजरी शम्सी बराबर वर्ष 1921 ईसवी में किया गया।

    चीनी-चियान कारवांसराय बाज़ार के पश्चिमोत्तर भाग में चौराहे के निकट स्थित है। इसे चीनी-चियान बंधुओं ने वर्ष 1308 हिजरी शम्सी में बनवाया था।

    मलिक कारवांसराय की संरचना भी नगर के भीतर मौजूद बाज़ार की संरचना जैसी है और इसका निर्माण क़ाजारी शासन काल में किया गया। यह कारवांसराय रूस को चावल निर्यात करने और काशान और यज़्द को रेशम भेजने के लिए प्रयोग की जाती थी।

    रश्त का बाज़ार, गीलान के दर्शनीय स्थलों में गिना जाता है। रश्त के बाज़ार में उपहार या अपनी दृष्टिगत वस्तुएं ख़रीदने के लिए जाने वाला पर्यटक इस बाज़ार की प्राचीन कारवांसरायों विशेष रूप से ताक़ी बुज़ुर्ग और ताक़ी कूचिक नामक कारवांसराय को अवश्य देखता है।

    रश्त का संग्रहालय भी ईरान के प्रसिद्ध संग्रहालयों में गिना जाता है। ईरान का सांस्कृतिक धरोहर संगठन इसकी देखरेख करता है। रश्त नगर का संग्रहालय विगत में ईरान की संविधान क्रान्ति की महत्वपूर्ण हस्ती, शायर व पत्रकार मीरज़ा हुसैन ख़ान कस्माई का घर था। वर्ष 1349 हिजरी शम्सी में रश्त के संग्रहालय की आधारशिला रखी गयी। इसकी इमारत लगभग 70 वर्ष पुरानी और लगभग 560 वर्गमीटर पर फैली हुयी है। रश्त का संग्रहालय सांस्कृतिक धरोहर संगठन की स्थापना के साथ संग्रहालयों व प्रदर्शनियों के प्रबंधन विभाग के अधीन हो गया और मूलभूत मरम्मत के पश्चात 1 अक्तूबर 1988 को पुनः इसे खोला गया। रश्त के संग्रहालय के दो विभाग मानव शास्त्र और पुरातनशस्त्र हैं। मानव शास्त्र के विभाग में जनता के जीवन और गीलान की स्थानीय प्रतिमाओं के मंच बने हुए हैं जबकि इस संग्रहालय के पुरातनशास्त्र विभाग में गीलान के विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से रूदबार के मार्लिक टीलों में मिली पुरातात्विक वस्तुएं रखी हुयी हैं।