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    प्रत्येक यूग के लिए क़ूरआन मोज़ेज़ा है ((पैग़म्बरे अकरम साः के लिए))

    प्रत्येक यूग के लिए क़ूरआन मोज़ेज़ा है ((पैग़म्बरे अकरम साः के लिए))
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    पाक-पवित्र क़ुरआन मजीद पैग़म्बरे अकरम (स.) के लिए प्रमाण और प्रत्येक यूग के लिए अश्चर्च मोज़ेज़ा है। इस क़ुरआन मजीद में मानव जीवन के लिए समस्त प्रकार ज़िन्दगी की बिधानें उपस्थित (मौजूद) है। जो बीस साल में विभिन्न प्रकार मूनासिबात और विभिन्न घटना पर नाज़िल हूई है. बिसात से लेकर हिज़रत की यूग तक जो आयतें नाज़िल हूई है उन समस्त प्रकार आयातों को मक्कि कहा जाता हैं। और हिज़रत की यूग से लेकर आपकी मौत तक जो आयतें मदीना या उसके चारों तरफ़ नाज़िल हूई है उस को मदीना कहा जाता है।

    सिपासः पैग़म्बरे अकरम (स.) की पवित्र निदेश और उनकी देख़ भाल के माध्यम से पवित्र क़ुरआन को एकत्रीत किया गया था. उसी प्रकार से कूरआन अभी तक चलता हुआ आरहा है (जिस में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं आया)।

    हाँ, हाज़ारों साल पहले इंसान का बना हुआ ख़ूदा और बनी हुई राष्ट्र, अज्ञानों यूग में बुत की अनुशरण. हिजाज़ की बूत पूजारी, और विभिन्न प्रकार कौमों की पथ भ्रष्ट फ़िक्रे, और नस्ल, रगं और जात-पात की इख़्तिलाफ़ इस हद तक बड़ गई थी, कि एक बेगूनाह जीवित पूत्री को जिन्दा गूर -दफन करता था और सब आपने को गौरब व फख़्र अनुभव करता था। यह सब हलचल मची हूई इन समस्त प्रकार शरायेत के साथ एक अल्लाह के शूजाअत व बहादुर बन्दा, और अल्लाह का भेजा हुआ रसूल इन समस्त प्रकार पथ भ्रष्ट और गुमराही को दूर करके अल्लाह के निदेश और उनके निदेश को प्रचार करने में सफलता अर्जन की। और मूरदे हूए क़ौम के अन्दर एक रुह फूक दी. जेहल व अंधेरों को ईमानी हिदायेत व ईमानी मशअल के माध्यम उस को निस्त व नबूद करके जाहिलियत को हिदायेत में, और बिदअत को अल्लाह के निदेश में इन समस्त प्रकार भ्रष्ट आचरण को एक भक्ति व विजयी में परिबर्तण करने में सफलता अर्जन की।

    हाँ, रसूल व क़ुरआन मजीद की समस्त प्रकार के समस्त विधान क़यामत तक जीवित रहेगा,और क़ुरआन रसूल के लिए एक गवाह व हक़्क़ानीयात है. की लोगों के लिए दीन व दूनियावी की सफलता दिलाने के लिए नाज़िल हूआ है।

     

    कूरआन की फ़साहत व बलाग़त

    अल्लाह के पवित्र कूरआन मजीद, और प्रसिद्ध ग्रंथ एक ज्ञान व हुनर, फ़िक्री व अक़ली, मददी व मानबी के व्यतीत एक आसमानी मोज़ेज़ा भी है, क्योंकी कूरआन मजीद बूलन्द ध्वनी के साथ जनसाधारण को अमंत्रन किया है. कि हमारे उदाहरण एक पवित्र कूरआन को ले आएं, इस का कारण यह है की अरब के लोग एक विशेष लतीफ़ बयान में जौक़ व शौक़ रख़ते थे, और उन लोगों के ज़बान की फ़साहत व बलाग़त एक विशेष स्थान व उन्नती पर थी. लेकिन इस के बावजूद कूरआन के सम्मुख़ और उस का उत्तर लाने में कोई शक्ति नहीं रख़ता था, अगर वह लोग कूरआन की विरुद्ध में कोई शक्ति रख़ता यक़ीनन युद्ध के मैदाने में प्रवेश करता। और विसात व कूरआन के प्रकाश के यूग तक, इस का विरुद्ध करता, क्योंकि ख़ूद कूरआन मजीद आपनी विरुद्ध दल को उसी तरह एक प्रसिद्ध और ग्रंथ लाने के लिए दवत की है ताकि हमारे जैसा एक प्रसिद्ध ग्रंथ लेके अएं। लेकिन अरब के दर्मियान समस्त प्रकार कविता कहने वालें और उस समय के अपनी ज़बान में फ़साहत व बलाग़त रख़ने वालें जो उस यूग से लेकर आज के यूग तक अरब ज़बान पर एक हल-चल मचा के रख़े है. उन लोगों ने भी क़बूल किया हैं कि कूरआन की ज़बानी और रसुल की बयानी में कोई पार्थक नहीं है। कूरआन उन सब अदबीयात और भाषा की मिठी को दफ़न कर दिया है।

    अतीत इतिहास लिख़ने वालों और अरब के इतिहास लिख़ने वालों ने क़बूल करके बयान दिया हैः कि कूरआन प्रत्येक यूग के लिए मोज़ेज़ा व वेनज़ीर है। कोई उस के विरुद्ध नहीं कर सकता और सब समय और सब यूग के लिए मोज़ेज़ा है।

    हाँ, कूरआन एक ऐसा प्रसिद्ध ग्रंथ है जो सब समय के लिए जीवित और इंसान को इंनसानीयत की तरफ़ उन्नती कराता है। ख़ूश वख्ति, साआदत, परित्राण को एक भीत्ति क़रार दिया है (( यक़ीनन पवित्र कूरआन इंसानों को एक ऐसा सही पथ का निर्देशना करता है जो मूस्तक़ीम और सीधा रास्ता है। और इमान्दार व्यक्तियों को खूश ख़बरी देते है. कि उन लोगों को अच्छे पूरष्कार मिलेगा)) (12) इस विनापर पवित्र कूरआन मजीद पैग़म्बरे अकरम (स.) के लिए सब समय मोज़ेज़ा और सूरज की किरण कि तरह चमकने वाला है। और अल्लाह के वही है, और अल्लाह के वही कभी ख़ामोश होने वाला नहीं है। अल्लाह का फ़रमान है ((मैं ने इस पवित्र कूरआन को नाज़िल किया हूँ और मैं उस को संरक्षण करुऊँगा))। (13)