islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. प्राचीन काल में एक राजा था

    प्राचीन काल में एक राजा था

    प्राचीन काल में एक राजा था
    Rate this post

    लोक कथाओं में पात्रों की मोटी-२ बातों और दशाओं का उल्लेख किय जाता है तथा नैतिक, चारित्रिक और आध्यात्मिक विशेषताओं और सूक्ष्मता एवं विस्तार की ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता। एसी कथाओं में मूल रूप से तो घटनाओं का विवरण ही किया जाता है और उसके सूक्ष्म बिंदुओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। उदाहरण स्वरूप एक राजा था जिसके दो पुत्र थे। एक अच्छा और दूसरा बुरा। राजकुमारों के अच्छे या बुरे होने का कोई कारण नहीं बताया गया। लोगों में पाई जाने वाली विशेषताएं सामान्यतःसार्वजनिक होती हैं। उदाहरण स्वरूप रूस्तम की पहलवानी की विशेषता उसके जन्म के समय से ही उसके साथ है और यह विशेषता हर पहलवान के साथ पाई जाती है। यदि किसी नायक या खलनायक में कोई परिवर्तन आता है तो यह उसकी विशेषताओं तक ही सीमित है और वास्तव में यह कोई मूलभूत आध्यात्मिक या मानसिक परिवर्तन नहीं है। लोक कथाओं में पात्र, विशेष व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं जो आम लोगों से अलग होते हैं। इस प्रकार उन्हें आम लोगों के लिए आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

    लोक कथाओं की विशेषताओं में से एक यह है कि इन कहानियों के पात्र, बातें करने में समान होते हैं। इस प्रकार की कहानियों में केवल बात करने के अंदाज़ से नायक को दूसरों से अलग नहीं किया जात सकता। एसी कहानियों में प्रशिक्षण प्राप्त एक राजकुमार और आम आदमी के मध्य वार्ता की दृष्टि से कोई अंतर नहीं होता है। इसमें महिलाएं पुरुषों की भांति और बच्चे बड़ों की तरह बात करते हैं। इस तरह की कहानियों में केवल पात्रों की वार्ता से उनकी किसी भी प्रकार की विशेषता को समझा नहीं जा सकता।

    लोक कहानियों में भाग्य की मूलभूत भूमिका होती ह । इन कहानियों के पात्र अपने लिए निर्धारित किये गए भाग्य या भविष्य से भाग नहीं सकते। अंतर केवल इतना है कि उनके भाग्य अलग-अलग होते हैं। लोककथाओं के बहुत से शोधकर्ताओं के अनुसार इन कहानियों का वास्तविक नायक भाग्य होता है। वास्तव में इन कहानियों के पात्र अपने भाग्य का खिलौना होते हैं।

    लोककथाओं में चौकाने वाली और अदभुत बातें उसकी एक अन्य विशेषता है। इन कहानियों के पाठक, कहानी के दौरान इस बात का आभास करते हैं कि कथाकार इस बात का प्रयास कर रहा है कि वह पाठक या सुनने वाले को अनोखी व अदभुत घटनाएं सुनाकर आश्चर्य चकित कर दे। हो सकता है कि यह इसलिए हो कि इन कथाओं को बस दूसरों को सुनाने के लिए तैयार किया गया था परन्तु बाद में इन्हें लिखित रूप दे दिया गया। इस प्रकार की कहानियों को सुनाने वालों का यह मानना था कि हर बार कुछ नए श्रोता आएंगे जिनके लिए यह कहानी नई होगी।

    कहानीः- प्राचीन काल में एक राजा था जिसकी एक बहुत ही सुन्दर पुत्री थी। राजकुमारी की सुन्दरता की चर्चा हर ओर होती थी। जो भी व्यक्ति राजकुमारी से विवाह करने के लिए आता था उसके सामने इतनी कठिन शर्तें लगा दी जाती थीं कि वह थककर भाग जाता था। एक बार एक गंजे व्यक्ति ने राजकुमारी से विवाह करने का निर्णय किया। उस गंजे ने कुछ रोटियां एक पोटली में बांधीं और उसे लेकर राजमहल की ओर निकल पड़ा। चलते-चलते वह एक घने में जंगल पहुंचा। जंगल में उसने देखा कि एक देव बैठा हुआ है। जिस अवस्था में देव बैठा हुआ था उससे यह लगता था कि मानो वह कई दिनों से भूखा है। गंजे ने सोचा कि यह देव बहुत भूखा है इसलिए उचित होगा कि मैं अपनी रोटियां उसे देदूं। गंजे ने अपनी रोटियां देव को दे दीं। देव को अपनी रोटियां देकर वह वापस जाना ही चाहता था कि देव ने कहा तुम कहां जा रहे हो? जाने से पहले तुम मेरा एक बाल तोड़कर अपने साथ ले जाओ। इसपर गंजे ने कहा कि तुम्हारा बाल मेरे किस काम का? इसपर देव ने कहा कि एक न एक दिन यह तुम्हारे काम आएगा। गंजे ने देव का एक बाल तोड़ा और अपने रास्ते पर आगे बढ़ गया। चलते-चलते वह एक नदी के किनारे पहुंचा। गंजे ने देखा कि नदी के किनारे एक अन्य देव बैठा हुआ कांप रहा है। ठंड के कारण उसके दांत किटकिटा रहे थे। गंजे ने सोचा कि इस देव को बहुत अधिक ठंड लग रही है। क्यों न मैं अपना कोट उसे दे दूं। उसको तो बहुत ठंड लग रही है। यह सोचते हुए गंजे ने अपना कोट देव के कांधे पर डाल दिया। यह काम करके वह आगे ही बढ़ने वाला था कि देव ने गंजे से कहा कि तुम मेरा एक बाल तोड़कर ले जाओ। इसपर गंजे ने कहा कि तुम्हारा बाल मेरे किस काम का? इसपर देव ने कहा कि एक न एक दिन यह अवश्य तुम्हारे काम आएगा। गंजे ने देव का एक बाल तोड़ा और आगे चल पड़ा। चलते-चलते वह फिर एक नदी के पास पहुंचा। उसने देखा कि एक लाइन में बहुत सी चींटियां नदी को पार करना चाह रही हैं किंतु एक एक करके वे नदी में गिरकर डूब रही हैं। गंजे ने एक लंबी सी लकड़ी उठाई और चींटियों के सामने रख दी। इस प्रकार से एक पुल बन गया। गंजा अभी आगे बढ़ना चाह ही रहा था कि उसे एक आवाज़ सुनाई दी। उसने सुना कि एक चींटी कह रही है कि तुम मेरा एक पर तोड़कर अपने पास रख लो। उसने कहा कि मैं चींटियों की रानी हूं। जो भलाई तुमने मेरे साथ की है उसे मैं कभी भूल नहीं सकती। शायद कभी मैं तुम्हारे काम आ सकूं। गंजे ने चींटी का पर लिया और राजमहल की ओर बढ़ गया। चलते-चलते वह राजमहल पहुंचा।

    उसने महल का दरवाज़ा खटखटाया। दरवाज़े पर एक चौकीदार आया। उसने गंजे से पूछा कि तुमको क्या काम है? गंजे ने बताया कि मैं राजकुमारी से विवाह करना चाहता हूं। चौकीदार ने जाकर राजा को बताया कि एक गंजा व्यक्ति राजकुमारी से विवाह करने की बात कह रहा है। राजा ने आदेश दिया कि गंजे को लेजाकर हमाम में डाल दो। राजा ने गंजे को जिस हमाम में डालने का आदेश दिया था वह बहुत गर्म था। उस हमाम को सात दिन और सात रातों तक गर्म किया जाता था। जो भी व्यक्ति राजकुमारी से विवाह करने की बात कहता था उसे इस गर्म हमाम में डाल दिया जाता था। आज तक कोई भी व्यक्ति उस हमाम से जीवित वापस नहीं आया था। गंजे को हमाम में ले जाया गया। उससे कहा गया कि यदि तुम राजकुमारी से विवाह करने के इच्छुक हो तो पहले इस हमाम में जाओ। गंजा जैसे ही हमाम के भीतर गया तो वहां की गर्मी से समझ गया कि यह कैसा होगा और क्यों कोई इस हमाम से वापस नहीं जाता है? गर्मी के कारण हमाम की दीवारें लाल हो चुकी थीं। हमाम का पानी बुरी तरह से उबल रहा था। एसे में गंजे को उस देव की याद आई जो नदी के किनारे ठंड से कांप रहा था। उसने देव का बाल निकाला और आग के सामने ले गया। एक ही क्षण में देव उसके सामने उपस्थित था। देव ने गंजे से कहा कि बताओ तुम्हें क्या काम है? गंजे ने देव को हमाम दिखाते हुए उसके बारे में विस्तार से बताया। इसपर देव ने कहा कि तुम चिंता न करो। उसके बाद देव ने एक लंबी सांस ली तथा हमाम की सारी गर्मी उसके भीतर चली गई और हमाम ठंडा हो गया। अगले दिन जब राजा के नौकर वहां पर आए तो उन्होंने गंजे को उस स्थान पर पाया जहां पर गर्म करने के लिए पानी रखा जाता था। वह गर्म हमाम अब बिल्कुल ही ठंडा हो चुका था। इस बात की सूचना राजा को दी गई।

    राजा ने कहा कि कोई बात नहीं है। जाओ ३०० किलग्राम गोश्त और ३०० किलोग्राम चावल का खाना तैयार करो और गंजे से कहो कि वह सारा खाना एक बार में खाए अन्यथा उसकी गर्दन उड़ा दी जाएगी। राजा के नौकरों ने गंजे को राजा की शर्त बताई। यह बात सुनकर गंजा व्यक्ति चिंता करने लगा और इसी बीच उसे भूखे देव की याद आई। उसने अपने पास रखा हुआ देव का बाल निकाला और उसे चूल्हें पर आग के सामने ले गया। अगले ही क्षण वह देव उसके सामने मौजूद था। उधर खाने को तैयार करके सीनियों में रखा जा चुका था। देव ने सारा खाना एक बार में ही खा लिया। यह सूचना राजा को दी गई। उसके नौकरों ने कहा कि हे राजा, गंजे ने सारा खाना खा लिया और एक दाना भी नहीं बचा। राजा ने कहा कि कोई बात नहीं लेकिन इस बार मैं एसा काम करूंगा कि वह बचकर जा नहीं सकेगा।

    http://hindi.irib.ir/