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    बच्चों का ह़ज

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    सवालः मैं ढ़ाई साल के बच्चे को ह़ज पर ले जाना चाहता हूँ एह़राम के लिबास व और दूसरे आमाल के लिह़ाज़ से उसका क्या ह़ुक्म है?
    जवाबः जो बच्चे अभी अच्छे और बुरे के बीच अंतर नहीं समझते उनके वली (गार्जियन)

    द्वारा उनको इस तरह़ मोह़रिम (एहराम पहनाना) किया जाए कि एह़राम का लिबास पहना कर वली नियत करेगा कि

    “ मैं ह़ज्जे तमत्तो (जिन लोगा का घर मक्के से 16 फरसख़ यानी 88 किलो मीटर या उससे ज़यादा के फासले पर हो)

    के लिए इस बच्चे को मोह़रिम करता हूँ” या “ मैं इस बच्चे को मोतमिर करता हूँ उमरए तमत्तो के लिए”

    उसके बाद अगर हो सके तो उससे तलबिया (लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक) कहलाये वरना उसके बजाये ख़ुद ही कहे

    और सभी आमाल को शरई ज़िम्मेदारी समझ के अंजाम दे वरना वह बच्चा एह़राम की ह़ालत में बाक़ी रह जायेगा

    और जब तक सभी आमाल कवर न करले शादी नहीं कर सकता है।