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    बदलाव, लेकिन किस क़ीमत पर?!

    बदलाव, लेकिन किस क़ीमत पर?!
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    किसी समय एक जंगल के निकट एक घर में तीन भेंडें साथ-साथ जीवन व्यतीत करती थीं। इनमें से एक सफ़ेद रंग की थी, दूसरी भूरे रंग की और तीसरी काले रंग की। यह तीनों सदैव ही साथ-साथ रहा करती थीं। वे साथ-साथ घूमने जातीं। साथ-साथ खाने की तलाश में निकलती और इसके अतिरिक्त भी सारे काम साथ-साथ ही किया करती थीं। इसी शैली में उनका जीवन बीत रहा था। इसी बीच तीनों भेड़ों में से एक ने कुछ अलग ढंग से जीवन व्यतीत करने का निर्णय किया। एक दिन जब तीनों भेड़ें पहले ही तरह घूमने के लिए एक साथ घर से निकलीं तो सफ़ेद भेड़ ने कहा कि मैं इस प्रकार के जीवन से थक गई हूं। मैं अलग एक घर बनाकर अकेले जीवन व्यतीत करना चाहती हूं। भूरे रंग वाली भेड़ ने थोड़ी देर सोच-विचार किया और फिर स्वयं से कहा कि यह कोई बुरा विचार नहीं है। उचित यह है कि मैं भी इसी प्रकार के जीवन का अनुभव करूं। काले रंग वाली भेड़ ने, जो तीनों में सबसे बुद्धिमान थी, दोनों भेड़ों से कहा कि उचित यह होगा कि तुम यह कार्य न करो। हम लोग साथ-साथ रहकर शांति और चैन से सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। तुम क्यों इस सुन्दर घर को छोड़ना चाहती हो? जबतक हम साथ-साथ रहेंगे उस समय तक शत्रु से मुक़ाबले में हमारी क्षमता भी अधिक रहेगी किंतु यदि हम अलग हो जाते हैं तो आने वाले ख़तरों का हम डटकर मुक़ाबला नहीं कर सकते। काले रंग वाली भेड़ की बातों का प्रभाव दोनों अन्य भेड़ों पर नहीं पड़ा और वे अपने ही निर्णय पर डटी रहीं। उन्होंने अपने मित्र की बातों पर ध्यान नहीं दिया। उसी समय वहां से एक व्यक्ति गुज़रा जिसके पास भूसे और पुआल का एक बड़ा गटठर था। जब वह वहां से गुज़र रहा था तो सफ़ेद रंग वाली भेड़ ने कहा कि मैं पुआल से अपना घर बनाना चाहती हूं। एसा घर जो आरामदेह और सुन्दर हो ताकि मैं उसमें शांतिपूर्ण ढंग से जीवन व्यतीत कर सकूं। सफ़ेद रंग वाली भेड़, भूसा बेचने वाले के पास गई और उसने सारा पुआल ख़रीद लिया। पुआल ख़रीदते ही उसने काम आरंभ कर दिया और बहुत ही कम समय में पुआल से बना एक सुन्दर घर तैयार कर लिया। उसके पश्चात वह अपने पुआल से बने घर के सामने खड़ी हो गई और कहने लगी कि यह घर कितना सुन्दर है! मैं इसमें अकेले ही जीवन व्यतीत करूंगी। उसने अपने साथियों से विदा ली और आराम करने के उद्देश्य से वह अपने घर चली गई ताकि एकांत का आनंद ले सके। भूरे रंग वाली भेड़ ने, जिसने सफ़ेद रंग वाली भेड़ की ही भांति एकांत में रहने का निर्णय कर लिया था, देखा कि एक व्यक्ति लकड़ी लादे हुए जा रहा है। उसने स्वयं से कहा कि क्यों न मैं अपना घर लकड़ी से बनाऊं? उसके पश्चात उसने सारी लकड़ी ख़रीद ली और उससे एक सुन्दर घर बनाया। अपने नवनिर्मित घर को देखते हुए भूरे रंग वाली भेड़ ने कहा कि मेरा घर कितना सुन्दर है! मैं इसी में अकेले जीवन व्यतीत करूंगी। घर बनाने के कारण वह बुरी तरह से थक गई थी इसलिए उसने अपने साथियों से विदा ली और लकड़ी से बने अपने घर की ओर गई ताकि वहां पर आराम कर सके। इसी बीच काले रंग वाली भेड़ ने देखा कि एक व्यक्ति ईंटें लिए हुए जा रहा है। यह देखकर उसने सोचा कि क्यों न ईंटों से एक मज़बूत घर बनाया जाए। उसने उस व्यक्ति से सारी ईंटें ख़रीदीं और एक बहुत ही सुन्दर एवं मज़बूत घर बनाया। फिर यह सोचकर उसे दुख हुआ कि वह नए घर में अकेले ही रहेगी। अब तीनों भेड़ें अपने-अपने नए घरों में अलग-अलग जीवन व्यतीत करने लगीं। इसी बीच एक भेड़िया वहां पर आया और उसने वहां पर तीन नए घर देखे। एक पुआल से बना घर, दूसरा लकड़ी से बना और तीसरा ईंट से बना। इसी बीच उसने देखा की सफेद रंग की एक भेड़ अपने घर की खिड़की से बाहर झांक रही है। भेड़िये ने कुछ सोचते हुए मन में कहा कि मेरा आज का भोजन यह सुन्दर भेड़ बनेगी। भेड़िया, भेड़ के पुआल से बने घर के निकट गया और उसने अपनी आवाज़ को थोड़ा भारी बनाते हुए कहा, हे सफेद सुन्दर भेड़! मैं तेरे घर पधारना चाहता हूं। इसपर सफ़ेद भेड़ ने कहा कि नहीं। अपनी इस भयानक सूरत और बड़े-बड़े बालों के साथ तुम मेरे घर में न आओ। इसपर भेड़िये ने कहा कि मैं फूंकें मारकर तेरे पुआल से बने घर को गिरा दूंगा। थोड़ी ही देर में भेड़िये की फूंकों से सफेद भेड़ का घर गिरकर नष्ट हो गया। घर गिरता देख भेड़ वहां से भाग खड़ी हुई और उसने जंगल में जाकर शरण ली। भेड़िये ने उसको बहुत ढूंढा किंतु वह उसे नहीं मिली। इसके पश्चात भेड़ियें ने लकड़ी से बने घर की ओर जाने का निर्णय किया। उसने भूरे रंग वाली भेड़ के साथ भी वैसा ही कार्य किया जैसा उसने सफ़ेद रंग वाली भेड़ के साथ किया था। उसने भूरे रंग वाली भेड़ को चेतावनी देते हुए कहा कि हे भूरे रंग वाली सुन्दर भेड़ मैं तेरे घर में आना चाहता हूं। भेड़ ने, जो भेड़िये की भारी आवाज़ से बहुत भयभीत थी, कहा कि नहीं एसा न करो। तुम अपनी इस भयानक वेषभूशा में मेरे घर में प्रविष्ट नहीं हो सकते। भेड़िये ने कहा कि मैं फूंकें मारकर तेरे घर को गिरा दूंगा। यह कहकर उसने अपना कार्य आरंभ किया। जब भेड़िये ने यह देखा कि भेड़ का घर फूंकों से नहीं टूट रहा है तो उसने कहा कि मैं तेरे घर को तोड़ दूंगा और तुझको खा जाऊंगा। इसक पश्चात उसने कड़े प्रहार करके भूरे रंग वाली भेड़ के घर को तोड़ दिया। यह देखकर भेड़ बहुत डर गई और वह जंगल की ओर भाग गई। वह वहां पर जाकर छिप गई। भेड़िया ने कुछ समय तक भेड़ को जंगल में ढूंगा कितु वह भी उसे नहीं मिली। अब भेड़िया काले रंग वाली भेड़ के घर की ओर गया। वहीं घर जो ईंटों से बना हुआ था। उसने घर के निकट जाकर भेड़ से कहा कि मैं तुम्हारे घर में आना चाहता हूं। काली भेड़ ने कहा कि नहीं, बिल्कुल नहीं। तुम अपने बड़े-बड़े बालों और भयानक हुलिये के साथ मेरे घर में नही आ सकते। यह सुनने के बाद भेड़िये ने घर पर फूकना आरंभ किया। उसने कई बार फूंका किंतु उसका घर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि वह घर बहुत ही मज़बूत था। यह देखकर भेड़िया बहुत क्रोधित हो गया। उसने काली भेड़ से कहा कि अब जबकि तुम अपने घर का दरवाज़ा नहीं खोल रही हो मैं तुम्हारे घर में लगी चिमनी से घर में प्रवेश करूंगा। यह कहकर वह घर की चिमनी की ओर गया। भेड़िये की यह बात सुनकर काली भेड़ ने एक देग में पानी भरकर चिमनी के ठीक नीचे रख दिया और देग के नीचे आग जला दी। जब पानी ख़ूब गर्म हो गया तो उसने चिल्ला कर कहा कि हे मेरे मित्र भेड़िये तुम चिमनी के रास्ते घर में आओ मैं तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही हूं। यह सुनकर भेड़िया बड़ी प्रसन्नता से चिमनी में घुसा और उसमें घुसते ही वह चिमनी के नीचे रखी गर्म देग में जा गिरा। भेड़िये ने चिल्लाना आरंभ किया मैं जल गया, मैं जल गया। मेरी सहायता करो। भेड़िये की बात सुनकर काली भेड़ उसपर हंसी और उसने देग पर ढक्कन ढांप दिया। इसके पश्चात वह अपने मित्रों को अपने घर लाने गई। सफेद और भूरे रंग की भेड़े, काले रंग वाली भेड़ के घर पर आ गईं और फिर वे पहले की ही भांति साथ-साथ रहने लगीं।