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    बिस्मिल्लाह से आऱम्भ करने का कारण 3

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    पुस्तक का नामः दुआए कुमैल का वर्णन

    लेखकः आयतुल्लाह अनसारीयान

    5. रसूले ख़ुदा (स.अ.व.आ.व.) से रिवायत हैः

    जब कोई शिक्षक अपने शिष्य को (बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम) की शिक्षा देता है तो ईश्वर उस छात्र के माता पिता तथा उसके अध्यापक हेतु नरक से मुक्ति का पंजीकरण करता है।[1]

    6. पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ.व.आ.व.) से रिवायत हैः

    पुनरुत्थान के दिन मेरी उम्मत (मुझे मानने वाले) बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम का जपन करते हुए प्रवेश करेगी, उनके अच्छे कर्मो वाला तराजू का पडला भारी होगा, (दूसरे धर्मो का पालन करने वालो ने) प्रश्न कियाः कि मुहम्मद को मानने वालो के कर्मो का पडला भारी कैसा हुआ (जबकि उनके अपराध -बुरे कर्म- अधिक है) उनके पैगम्बरो ने उत्तर दियाः

    क्योकि उनके प्रत्येक कार्य का आरम्भ ईश्वर के तीन नामो (अल्लाह), (रहमान) तथा (रहीम) से होता है, यदि इन नामो को तराजु के एक पडले मे रखा जाए और संसार के प्राणीयो की बुराईयो को दूसरे पडले मे रखा जाए, तो इन तीन नामो की ब्लेसिंग (बरकत) से अच्छाई वाला पडला भारी रहेगा।[2]


    [1]  إِذَا قَالَ المُعَلِّمَ لِلصَّبِیِّ: قُل: بِسمِ أللہ ألرَّحمٰنِ ألرَّحِیم فَقَالَ الصَّبَیُّ بِسمِ أللہ ألرَّحمٰنِ ألرَّحِیم کَتَبَ أللہُ بَرَاءَۃً لِلصَّبِیِّ وَ بَرَاءَۃً لِاَبَوَیہِ وَ بَرَاءَۃً لِلمُعَلِّمِ

    (एज़ा क़ालल्मोअलेमो लिस्सबीयेः क़ुलः बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम फ़क़ालस्सबीयो बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम कतबल्लाहो बराअतन लिस्सबिये वबराअतन लेअबवयहे व बराअतन लिलमोअल्लेमे) जामेउल अख़बार, पेज 42, अध्याय 22; मुस्तदरकुल वसाएल, भाग 4, पेज 386, अध्याय 45, हदीस 4988; बिहारुल अनवार, भाग 89, पेज 257, अध्याय 29, हदीस 53

    [2]  أُمَّتِی یَأتُونَ یَومَ القِیَامَۃِ وَ ھُم یَقُولُونَ:( بِسمِ أللہ ألرَّحمٰنِ ألرَّحِیم ) فَتَثقَل حَسَنَاتَھُم فِی المِیزَانِ، فَیُقَال: آلَا مَا آرَاجَحَ مَوَازِینَ أُمَّۃَ مُحَمَّد صلی اللہ علیہ و آل وسلم فَتَقُول الأَنبِیَاءُ علیہم السلام: إن إبتَدَاء کَلَامَھُم ثَلَاثَۃُ أسمَاء مِن أسمَاءِ أللہِ لَو وَضَعَت فِی کَفَّۃِ المِیزَانِ وَ وَضَعَت سَئِّاتُ الخَلقِ فِی کَفَّۃ أُخرَی لَرَجَحَت حَسَنَاتَھُم

    (उम्मती यातुनल कियामता वहुम यक़ूलूनः (बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम) फ़तसक़्क़ल हसनातहुम फ़िल मीज़ाने, फ़योक़ालोः अला मा अराजहा मवाज़ीना उम्मतो मुहम्मदिन (स.अ.व.आ.व.) फ़तक़ूलूलअमबियाओ अलैहेमुस्सलामः इन इबतदआ कलामहुम सलासता असमाए मिन असमाइल्लाहे लो वज़अत फ़ी कफ़्फ़तिलमीज़ाने ववज़अत सय्येआतल ख़लक़े फ़ी कफ़्फ़तिन उख़रा लारजहत  हसनाताहुम) मजमूअए वर्राम (तनबीहुल ख़वातिर) भाग 1, पेज 32