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    बुद्धिमान पत्नी (1)

    बुद्धिमान पत्नी (1)
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    प्राचीन काल में क़ुली नाम का एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ रहा करता था। उनका जीवन बड़ा शांत और अच्छा गुज़र रहा था। उनके जीवन में बहुत सी कहानियों की भांति केवल एक ही दुख था और वह था संतान का न होना। उनके विवाह को कई वर्ष बीत चुके थे किंतु वे संतान सुख से वंचित थे। अंततः काफ़ी समय बीत जाने के बाद ईश्वर ने उन पर कृपा दृष्टि की और पत्नी गर्भवती हो गई। उसने यह शुभ सूचना अपने पति को दी और कहा कि शीघ्र ही हमारे घर एक नन्हा मेहमान आने वाला है। क़ुली को विश्वास नहीं हो रहा था और ख़ुशी के मारे वह बोल ही नहीं पा रहा था। उसने ईश्वर का आभार प्रकट किया और पत्नी से कहा कि तुमने कितनी अच्छी ख़बर सुनाई है। वह प्रसन्नता से कमरे में दौड़ने और चिल्लाने लगा। उसकी सबसे बड़ी इच्छा पूरी हो गई थी। उसने ख़ुशी से झूमते हुए अपनी पत्नी से कहा कि मेरे बुढ़ापे का सहारा आ रहा है, मेरा बेटा इस संसार में आ रहा है। उसकी पत्नी ने कहा कि तुम्हें कहां से पता कि वह लड़का ही है? इतना उत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है। क़ुली ने कहा, मुझे पता है, मेरा मन कहता है कि तुम बेटे को ही जन्म दोगी। जब वह संसार में आएगा तो हमें उसका एक अच्छा सा नाम रखना होगा ताकि जब हम उसे पुकारें तो वह लज्जित होने के बजाए अपने नाम पर गर्व करे। हम उसे स्कूल भेजेंगे ताकि वह अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और भली भांति ज्ञान व शिष्टाचार सीखे। तब सभी पड़ोसी और दूसरे लोग कामना करेंगे कि काश उनका भी ऐसा ही पुत्र होता। उन्हें मुझसे ईर्ष्या होगी और वे इशारे करके मुझे एक दूसरे को दिखाएंगे और ऐसे पुत्र का पिता होने के कारण मेरी छाती गर्व से फूल जाएगी। सभी मेरा सम्मान करेंगे और उनकी आशा होगी काश वे मेरे स्थान पर होते। क़ुली की पत्नी उसकी बातों से ऊब गई थी उसने आश्चर्य से उसे देखा और कहा कि अभी कुछ हुआ भी नहीं है और तुम शैख़ चिल्ली की भांति मन में खिचड़ी पकाने लगे? थोड़ा संयम से काम लो, हर बात अपने समय और स्थान पर अच्छी लगती है। अधिक बोलने व मन में खिचड़ी पकाने से मनुष्य सफल नहीं हो सकता। ईश्वर पर भरोसा रखो और उससे प्रार्थना करो कि वह हमें स्वस्थ संतान प्रदान करे, चाहे वह लड़का हो या लड़की। तुम्हारी कहानी तो उस व्यक्ति जैसी है जो हाथों में शहद का मटका लिए जा रहा था। क़ुली ने कहा। कैसी कहानी? कौन व्यक्ति? उसकी पत्नी ने कहा कि तुम शांति से बैठो तो मैं बताऊं। फिर उसने क़ुली को कहानी सुनानी आरंभ की। उसने कहाः एक ग़रीब व दरिद्र व्यक्ति था जो एक छोटी से झोंपड़ी में अकेले जीवन बिताया करता था। उसके पड़ोस में एक धनवान व्यापारी रहता था जिसका काम शहद ख़रीदना और बेचना था। वह प्रतिदिन एक बर्तन में थोड़ा से शहद डाल कर अपने ग़रीब पड़ोसी के घर भेजा करता था। वह व्यक्ति थोड़ा सा शहद खाता और बाक़ी एक मटके में डाल कर उसका मुंह बंद कर दिया करता था। कुछ समय के बाद मटका, शहद से भर गया। एक दिन वह व्यक्ति अपनी झोंपड़ी में बैठा हुआ अपनी लाठी से खेल रहा था कि अचानक उसकी दृष्टि, शहद से भरे मटके पर पड़ी। थोड़ी देर तक वह उसे निहारता रहा और फिर विचारों में डूब गया। उसने सोचा आजकल नगर में शहद काफ़ी महंगा हो गया है। यदि मैं शहद से भरे हुए इस मटके को शहर से बाहर ले जाकर बेच दूं तो उसके मूल्य से मैं चार हट्टी कट्टी भेड़ें ख़रीद सकता हूं। कुछ समय बाद भेड़ों के बच्चे होंगे और उनकी संख्या बढ़ती जाएगी। फिर मैं दस भेड़ें बेच कर एक दुधारू गाए और एक बैल ख़रीद लूंगा। बैल को मैं खेती में हल जोतने के लिए लगा दूंगा और गाए से दूध दूहूंगा। कुछ समय के बाद गाए और बैलों की संख्य भी बढ़ जाएगी और फिर मैं उन्हें बेच कर एक बड़ा घर कई दास व दासियों को ख़रीद लूंगा। फिर मै। शादी करूंगा और मेरे कई बच्चे होंगे। मैं अपने बच्चों का प्रशिक्षण इस प्रकार करूंगा कि वे सभ्य, शिष्ट व शिक्षित हों ताकि मैं उन पर गर्व कर सकूं। जब वे बड़े हो जाएंगे तो मेरा सहारा बनेंगे किंतु यदि उनमें से कोई एक बिगड़ गया और उसने कोई बुरा काम किया तो मैं अपनी इसी लाठी से उसका सिर फार दूंगा। अचानक किसी वस्तु के टूटने की आवाज़ से उस व्यक्ति के सोचने का सिलसिला टूट गया। उसने देखा कि उसकी झोंपड़ी में चारों तरफ़ शहद फैला हुआ है। अब उसकी समझ में आया कि वह क्या कर बैठा है। उसने विचार में अपने बच्चे को मारने के लिए अपने हाथ में मौजूद लाठी को घुमाया को वह सीधे जा कर शहद के मटके पर लगी और वह मटका टूट गया। इस प्रकार पलक झपकते में घड़े के साथ उसकी आशाएं भी टूट गईं। यह कहानी सुना कर क़ुली की पत्नी ने उससे कहा कि तुम्हारा मामला भी उसी ग़रीब व्यक्ति की भांति है। सोच और कल्पना से बाहर निकलो और जैसा कि मैंने कहा, ईश्वर पर भरोसा करो। हर किसी का भविष्य उसके विचारों व कल्पनाओं से नहीं बल्कि कर्म से बनता है। इसके बाद कई महीने बीत गए और बच्चे के जन्म का समय निकट आ गया। क़ुली की पत्नी दर्द से कराह रही थी और वह घबरा कर इधर उधर दौड़ रहा था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे, कहीं ऐसा न हो कि बच्चे और उसकी मां को कोई क्षति पहुंच जाए। उसने सोचा कि उसे जाकर कहीं से दर्द से तड़प रही अपनी पत्नी के लिए दाया लानी चाहिए। वह अपनी पत्नी के पास गया और उससे बोलाः कुछ देर और सहन करो मैं अभी जा कर दाया को लाता हूं। इसके बाद वह दौड़ता हुआ घर से निकल गया। (जारी है)