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    बुद्धिमान पत्नी (2)

    बुद्धिमान पत्नी (2)
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    पिछली कड़ी में आप क़ुली नामक व्यक्ति से परिचित हुए जो अपनी पत्नी के साथ रहता था मगर उसके कोई संतान न थी। बाप बनना उसकी सबसे बड़ी इच्छा थी और ईश्वर ने उसकी यह प्रार्थना सुन ली। जब उसे पता चला कि वह बाप बनने वाला है तो वह फूले नहीं समा रहा था और सदैव बच्चे के बारे में सोचता रहता था। महीने बीत गए यहां तक कि नवजात के जन्म लेने का समय बहुत निकट आ पहुंचा। क़ुली, बौखलाया हुआ दाई का पता लगाने निकला।

    और अब आगे की कहानीः दाई के घर पहुंचते पहुंचते उसके मन में नाना प्रकार के विचार आए। दाई घर में मौजूद थी। जल्दी से क़ुली ने उसे पुकारा और दोनों साथ चल पड़े। दाई वृद्ध थी इसलिए क़ुली जितना तेज़ नहीं चल सकती थी। वह धीरे-धीरे चल रही थी। दोनों झोपड़ी के निकट पहुंचे थे कि रोने की आवाज़ सुनाई दी। क़ुली को लगा कि उसे भ्रम हो गया है। फिर ध्यान दिया तो उसे विश्वास हो गया कि भ्रम नहीं था। हां बच्चे के रोने की आवाज़ थी। दोनों तेज़ी से घर में प्रविष्ट हुए। बच्चे का जन्म हो चुका था। क़ुली ख़ुशी से रो रहा था। अपने हाथों को ऊपर उठा कर उसने ईश्वर का आभार व्यक्त किया। नवजात बेटा था औज्ञ क़ुली की इच्छा भी बेटे की ही थी। बेटा बहुत सुंदर व हृष्ट पुष्ट था। क़ुली ने अपनी अंगुलियों से नवजात के चेहरे को छुआ और बच्चे के नर्म चेहरे को छूकर उसे बहुत अच्छा लगा। कुछ समय बीता, बच्चा बड़ा हो गया और धीरे-धीरे उसने चलना शुरु किया। बच्चे के चलने और गिरने से भी क़ुली आनंदित होता था। कुल मिलाकर यह कि बच्चे के जन्म से पूरा घर ख़ुशियों से भर गया था। एक दिन क़ुली की पत्नी ने उससे कहा कि बच्चा सो रहा है उसका ध्यान रखिएगा मैं कपड़ा धुलने जा रही हूं और जल्दी ही वापस लौटूंगी। क़ुली की पत्नी ने कपड़े का गट्ठर उठाया और घज्ञ से निकल गयी। क़ुली अपने बच्चे के पास लेट गया जो बेख़बर सो रहा था और उसके बालों से खेलने लगा। क़ुली के पास एक नेवला था जिसके उसने उस समय से पाला था जब वह बच्चा था। क़ुली नेवले को बहुत चाहता था। नेवला भी क़ुली को बहुत चाहता था। जिस समय क़ुली अपने बेटे के बालों से खेल रहा था नेवला भी कमरे में एक कोने में बैठा हुआ था। क़ुली अपने बच्चे के बालों से खेलने में मगन था कि अचानक बाहर से किसी ने उसे नाम से पुकारते हुए कहा क़ुली! क़ुली! क्या तुम घर पर हो? क़ुली ने यह सोचते हुए कि कहीं बहर से चिल्ला रहे व्यक्ति की चिल्लाहट से बच्चा उठ न जाए इसलिए बाहर गया तो देखा कि गांव के प्रधान का आदमी उसके लिए संदेश लाया है। क़ुली ने कुछ देर उससे बात की और वह घोड़े पर सवार होकर वापस चला गया किन्तु उसरी ओर क़ुली घर से बाहर की ओर जाते समय बच्चे को अकेला छोड़ कर गया था कि अचानक घर की छत से एक सांप उतरा और वह सोते हुए बच्चे की ओर बढ़ा। नेवले ने जैसे ही सांप को देखा उस पर टूट पड़ा और थोड़ी ही देर में उसने सांप को मार डाला और घर के द्वार की ओर इस स्थिति में बढ़ा कि उसके चेहरे पर ख़ून लगा हुआ था। नेवला दौड़ते हुए क़ुली की ओर बढ़ा जो गांव के प्रधान के आदमी को विदा कर घर में पलट रहा था। क़ुली ने जैसे ही देवने को देखा उसके चेहरे का रंग उड़ गया। दुनिया अंधेर लगने लगी। अचानक उसके मन में एक विचार आया। उसे लगा कि नेवले ने उसके बेटे को मार डाला। यह सोचते ही वह क्रोध से पागल हो गया और उसने अपने पैर के नीचे से पत्थर का टुकड़ा उठाया और नेवले के सिर पर दे मारा जो उसके चारों ओर घूम रहा था। बेचारा नेवला ज़मीन पर गिर पड़ा और क़ुली में घर में प्रविष्ट होने का साहस न था क्योंकि वह उस चीज़ को नहीं देख सकता था कि जिसकी कल्पना से वह कांप रहा था। क़ुली अभी यह सोच ही रहा था कि घर में जाए या न जाए कि अचानक घर से रोने की आवाज़ सुनाई दी। यह उसके बच्चे की आवाज़ थी। उसे विश्वास नहीं हो रहा था। नेवले के चेहरे पर लगे ख़ून के बारे में सोचने लगा कि कैसा ख़ून था। उसके मन में विचार आया कि बच्चा मरा नहीं घायल हुआ है। यह सोच कर क़ुली जल्दी से घर में प्रविष्ट हुआ तो देखता है कि बच्चा अपने चारों ओर घूम रहा है और रोता जा रहा है। क़ुली ने फ़ौरन बच्चे को उलट पलट कर देखा कि कहीं घायल तो नहीं है। बच्चा बिल्कुल सही था। उस पर ख़राश का कोई निशान भी नहीं था। अचानक उसकी दृष्टि ज़मीन पर कई टुकड़ों में पड़े साप के शरीर पर पड़ी। डर गया किन्तु तुरंत ही उस सारी स्थिति समझ में आ गयी। नेवला निर्दोष था। बेचारे को इस महाउपकार का कैसा बदला मिला था। बच्चे को गोद से उतारा और ज़मीन पर बैठ कर स्वंय को धिक्कारा। क़ुली की पत्नी जब सोते से कपड़ा धुलकर पलटी तो घर को उथल पुथल पाया। नेवले का शव बाहर पड़ा था और पति सिर पीट रहा था। समझ न सकी कि क्या हुआ है। डरते हुए उसने क़ुली से पूछाः क्या हुआ? यह उथल पुथल कैसी है? क़ुली ने पूरी घटना सुनाई और फूट फूट कर रोते हुए उसने कहाः काश जल्दबाज़ी न करता और घर में देख लेता तो नेवला जीवित होता किन्तु अफ़सोस मेरी जल्दबाज़ी और मूर्खता उसकी जान जाने का कारण बनी। अब पछताने से क्या होगा। नेवल मृत है और उसे कोई जीवित नहीं कर सकता। कितनी जल्दबाज़ी भरा फ़ैसला था। अब तो पूरी आयु अंतरात्मा सताएगी। थोड़ी देर में अंधेरा छा जाता इसलिए क़ुली नेवले के शव को दफ़्न करने के लिए घर से बाहर निकला। घर से बच्चे की किलकारी की आवाज़ सुनाई दे रही थी।