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    मआशरेती मुश्किलात का बेहतरीन हल

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    इस सिलसिले में हज़रत (अ.स.) पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का क़ौल नक़्ल फ़रमाते हैं कि आप फ़रमाते हैं

    तर्जुमा : जब कभी सियाह रात की मान्निद तुम्हें फ़ितने घेर लें तो क़ुरआन का दामन थामना।

    पस इज़्तिराब, परेशान, मुश्किलात, नाहम आहंगियाँ और बे सरो सामानियाँ तुम्हारे मआशिरे पर जब स्याह रात की मान्निद साया फ़ेग़न हों तो इन के हल के लिये कहीं और न जाना बल्कि क़ुरआन से रुजू करना इसकी निजात बख्श राहनुमाई को मेआर व कसौटी क़रार देना। क़ुरआन के उम्मीद बख्श फ़रामीन मुश्किलात पर क़ाबू पाने और दिलों में ख़ुशबख़्ती व सआदत की उम्मीद को ज़िन्दा करते हैं। अलबत्ता यह वाज़ेह है कि हर कामयाबी के पीछे इन्सान की कोशिश और जिद्दो जहद का बुनियादी किरदार है। पस अगर हम चाहते हैं कि अपनी आज़ादी और इस्तक़्लाल की हिफ़ाज़त करें और ख़ुदाए ज़ुल जलाल के साया ए रहमत व पनाह में हर साज़िश से महफ़ूज़ रहें तो चारा ही नही कि अपने खालिक़ और क़ुरआने करीम के निजात बख्श अहकाम की तरफ़ लौट जाएँ इस सिलसिले में आज तक जिस नाशुक्री और बे ऐहतेरामी के मुरतकिब हुए हैं इस पर तवज्जो व निदामत की राह लें।