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    मनोहर तीतर

    मनोहर तीतर
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    पुराने समय की बात है एक पर्वातांचल में एक तीतर रहता था जो अन्य तीतरों से अधिक सुन्दर और आकर्षक था। वह इतना सुन्दर और आकर्षक था और इतने मनोहर ढंग से चलता था कि समस्त शिकारी उसे पकड़ने की कामना करते थे और शिकारी पक्षी भी उसके मांस से अपना पेट भरना चाहते थे। इस तीतर का नाम था मनोहर तीतर और ये बहुत ही चतुर और बुद्धिमान था। वह अपनी जान के लिए ख़तरा न मोल लेने के लिए कभी भी अनजानी पक्षियों के साथ उठता बैठता नहीं था। एक दिन वह तीतर अपने घोंसले के निकट ऊंची आवाज़ में गाना गा रहा था कि आकाश में उड़ रहे बाज़ ने उसे देखा और उसकी मनमोहक आवाज़ से मंत्रमुग्ध हो गया। बाज़ उसकी आवाज़ में इतना गुम हो गया कि वह तीतर छोड़कर वहां से जा न सका। बाज़ ने स्वयं से कहा कि हर एक को एक घनिष्ठ और अच्छे मित्र की आवश्यकता होती है। कितना अच्छा होता कि ये सुन्दर तीतर मेरा मित्र बन जाता। मैं इसे देखकर और उसके साथ जीवन व्यतीत करके संसार के समस्त दुःखों और पीड़ाओं को भूल जाऊंगा। बाज़ नीचे आया और धीरे धीरे तीतर की ओर बढ़ने लगा। तीतर ने जैसे ही बाज़ को देखा वह पत्थरों के बीच बने घर में छिप गया। बाज़ भी उसके घर के निकट गया और उसने धीरे से कहा कि हे सुन्दर तीतर मुझसे न डरो। मैं तुम्हारा मित्र हूं और तुम्हें दिल की गहराईयों से चाहता हूं। मैं इससे पहले तक तुम्हारी सुन्दरता और आकर्षण से निश्चेत था और अब मुझे तुम्हारी सुन्दरता का विश्वास हो गया है। मैं तुमसे मित्रता करना चाहता हूं। तीतर ने कहा कि हे महान नायक मुझे अकेला छोड़ दो, तुम्हारा कार्य शिकार करना है, जाओ और किसी अन्य मूर्ख जीव को ढूंढो, तुम मुझे धोखा नहीं दे सकते। बाज़ ने कहा कि हे प्यारे तीतर जैसा कि तुम ने कहा, तीतर तो बहुत अधिक हैं और मेरा कार्य भी शिकार है, पर धोखा देना कमज़ोर लोगों का कार्य है। जब मेरे पास इतनी शक्ति है तो मुझे चापलूसी की क्या आवश्यकता है। यदि मैं शिकार करना चाहता तो मैं दूसरे तीतर का शिकार करता। वास्तविकता यह है कि तुम्हारा प्रेम मेरे ह्रदय में समा गया है। मैं तुमसे मित्रता करना चाहता हूं और तुम्हारे साथ जीवन व्यतीत करना चाहता हूं। तीतर ने कहा कि यदि तुम सत्य कहते हो और मेरा व्यवहार तुम्हें भा गया है तो यह तथ्य हमारी मित्रता के लिए संतुष्ट करने वाला नहीं हो सकता। मेरा मानना है कि तुम्हारी प्रेम भावना बहुत जल्द ठंडी पड़ने वाली है क्योंकि तुम एक शिकारी पक्षी हो और मैं तुम्हारे लिए एक स्वादिष्ट शिकार हूं। इसीलिए हमारी मित्रता का कोई तर्क नहीं लगता। ठीक उसी तरह जैसे पानी और आग एक साथ एकत्रित नहीं हो सकते वैसे ही हमारा एक साथ रहना, ख़तरनाक है। बाज़ ने कहा कि तुम्हें अच्छी तरह मालूम होना चाहिए कि मैं अपना आहार प्राप्त करने में सक्षम हूं। इसलिए तुम्हें हानि पहुंचाने का कोई कारण नहीं है। यदि हम मित्र हो जाते हैं तो तुम्हारे लिए कई लाभ हैं। पहला यह है कि दूसरे बाज़ तुम्हें क्षति नहीं पहुंचाएंगे, तुम्हारा सम्मान करेंगे केवल इसलिए कि वे ये जानते हैं कि तुम मेरे मित्र हो। दूसरा ये कि मेरा घोंसला बहुत ही अच्छे और सुन्दर स्थान पर एक वृक्ष की टहनी पर है मैं तुम्हें वहां ले जाऊंगा, उसके बाद तुम जंगल और मरूस्थल को अपने क़दमों में देखोगे। तीसरा यह है कि मैं बहुत शक्तिशाली हूं, सदैव तुम्हारे लिए अच्छा खाना बनाऊंगा और तुम्हारे लिए अच्छा सा घर तैयार करूंगा। मैं तुम्हें ऐसे ऐसे स्थानों पर ले जाऊंगा कि तुम्हारे साथी वहां जाने की कामना करते हैं परन्तु वहां नहीं जा सकेंगे। कुल मिला कर यह कि मैं हर वह कार्य करने को तैयार हूं जिससे तुम प्रसन्न हो जाओ। तुम संसार में वह एकमात्र पक्षी हो जिसे मैं बहुत चाहता हूं, मुझे निराश मत करो। तीतर का हृदय बाज़ के प्रेम भरे शब्दों को सुनकर पसीज गया उसने कहा कि तुम पक्षियों के मुखिया हो, यदि मान लूं कि तुम मुझे चाहते हो, शायद कुछ लोग हों जो हमारी मित्रता से ईर्ष्या करें और ईधर उधर की लगा कर हम लोगों को आपस में लड़ाने का प्रयास करें तो तुम क्या करोगे? या यदि किसी कारण तुम मुझसे नराज़ हो गये और तुमने मुझे क्षति पहुंचाना चाही तो कोई चीज़ तुम्हें रोक नहीं सकती। इसीलिए अच्छा ये है कि मैं अपने सीधे सादे जीवन पर संतुष्ट रहूं और अपने लिए समस्या खड़ी न करूं।बाज़ ने कहा कि मित्र, कैसी बातें कर रहे हो, मैं तुम्हें वचन देता हूं कि मैं किसी की भी बात पर कान नहीं धरूंगा। तीतर, बाज़ की मीठी मीठी बातों में आ गया। वह पत्थरों से बाहर निकला। एक बार फिर उसने बाज़ की निष्ठा के बारे में उससे पूछा। जैसे ही बाज़ ने अपनी बात दोहराई, तीतर को उसकी निष्ठा पर विश्वास हो गया। उसने तीतर को अपनी पीठ पर बिठाया और अपने घोंसले की ओर चल दिया।