islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. मसअलों का सीखना

    मसअलों का सीखना

    Rate this post

     

    1. हर मुकल्लफ़ (जिस पर इस्लामी एहकाम वाजिब हों) पर शरई मसाएल जैसे

    नमाज़ रोज़ा तहारत (पवित्रता) और कुछ लेन देन के मसअलों का सीखना वाजिब

    है अगर वह एहकाम न सीखे और उससे वाजिब छूट जाए या हराम काम हो जाए

    तो वह आदमी गुनहगार (पापी) कहलाएगा। मुकल्लफ़ उसे कहा जाता है जिसमें

    तकलीफ़ की शर्तें पाई जाती हों।

    http://www.wilayat.in/