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    मस्जिद के अहकाम – 2

    मस्जिद के अहकाम – 2
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    सवाल 395:  क्या मस्जिद में उन लोगों को जो क़ुरआँन की तालीम के लिये शिरकत करते हैं ऐसी फि़ल्में दिखाने में कोई हर्ज है जिन को ईरान की वेज़ारते सक़ाफ़त ने जारी किया हो?
    जवाब: मस्जिद को फ़िल्म दिखाने की जगह में तब्दील करना जाएज़ नहीं है लेकिन ज़रूरत के वक़्त और मस्जिद के पेश नमाज़ की नेगरानी में मुफ़ीद मफ़हूम वाली मज़हबी और इंक़ेलाबी फि़ल्में दिखाने में कोई हर्ज नहीं है।
    सवाल: क्या आइम्म-ए-मासूमीन (अ0) की विलादत के मौक़े पर मस्जिद में मज़हबी मुसीक़ी के नश्र करने में कोई शरई ऐतराज़ है?
    जवाब: वाज़ेह रहे कि मस्जिद का एक ख़ास शरई मक़ाम व मर्तबा है इस में मयुज़िक़ चलाना अगर इसकी अज़मत के ख़िलाफ़ हो तो हराम है, अगर्चे मयुज़िक सुसूर भी न लाने वाली हो।
    सवाल 397: मसाजिद के लाउडस्पीकर, जिस की आवाज़ मस्जिद के बाहर सुनी जाती है, इस्तेमाल कब जाएज़ है? और अज़ान से पहले उस पर तिलावत और इन्क़ेलाबी तराने लगाने का क्या हुक्म है?
    जवाब: जिन औक़ात में महल्ले वालों और पड़ौसियों के लिये तकलीफ़ का सबब न हो उस में अज़ान से पहले कुछ मिनट तिलावते कु़रआँन लगाने में हर्ज नहीं है।
    सवाल 398:  जामा मस्जिद की तारीफ़ क्या है?
    जवाब: वोह मस्जिद जो शहर में तमाम शहर वालों के इख़ट्टा होने के लिये बनाई जाती है और किसी ख़ास गिरोह से मख़सूस नहीं होती है।
    सवाल: तीन साल से एक मस्जिद की छत वाला हिस्सा वीरान पड़ा था उस में नमाज़ नहीं होती थी और वोह खंडर बन चुका था, उसका एक हिस्सा स्टोर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, ख़िदमतगारों ने जो तक़रीबन पन्द्रह साल से इस छत वाले हिस्से में रहते हैं इस में कुछ तामीराती काम किया है क्योंकि इसकी हालत बहुत ही ग़ैर मुनासिब थी और उसकी छत गिरने के क़रीब थी और चूँकि ये लोग मस्जिद के शरई अहकाम को नहीं जानते थे और जो लोग जानते थे उन्होंने भी इन को नहीं बताया, लेहाज़ा उन्होंने छत वाले हिस्से में कुछ कमरे बनवाये जिन पर काफ़ी रक़्म ख़र्च हुई अब तामीर का काम ख़त्म होने वाला है बराये मेहरबानी नीचे दिये गये हुक्मे शरई से मुत्तला फ़रमायें:
    1-  फ़र्ज़ कीजिये इस काम के करने वाले और इस की देख भाल करने वाली कमेटी के मिंबरान मसअला नहीं जानते थे तो क्या वो लोग बैतुल माल से ख़र्च की जाने वाली रक़्म के ज़ामिन हैं और वो गुनाहगार हैं या नहीं?
    2- इस बात को ध्यान में रखते हुए कि रक़्म बैतुल माल से ख़र्च हुई है क्या आप इजाज़त देते हैं कि जब तक मस्जिद को इस हिस्से की ज़रूरत नहीं है और इस में नमाज़ क़ायम नहीं होती, इन कमरों से मस्जिद के शरई अहकाम व हुदूद की रेआयत करते हुए कुरआँन व अहकामे शरीअत की तालीम और मस्जिद के दूसरे कामों के लिये फ़ाएदा उठाया जाये या इन कमरों को फौरन गिरा देना वाजिब है?
    जवाब: मस्जिद के छत वाले हिस्से में बने हुए कमरों को गिरा के उस को पहले वाली हालत पर लौटाना वाजिब है और ख़र्च शुदा रक़्म के बारे में अगर ज़्यादती न हुई हो या जान बूझ कर ऐसा न किया गया हो और मालूम नहीं हो कि इसका कोई ज़ामिन है और मस्जिद के छत वाले हिस्से में तिलावते कु़रआन, अहकामे शरई, इस्लामी और मआरूफ़ की तालीम और दूसरे दीनी व मज़हबी पोग्राम मुनअकि़द करने में अगर नमाज़ गुज़ारों के लिये ज़हमत न हो और इमामे जमाअत की निगरानी में हों तो कोई हर्ज नहीं है और इमामे जमाअत, वहां के ख़ादिमों और मस्जिद के दूसरे ज़िम्मेदार हज़रात पर एक दूसरे के साथ तआवुन करना वाजिब है ताकि मस्जिद में ख़िदमत गुज़ीरों का वजूद भी जारी रहे और मस्जिद के इबादती फ़राइज़ जैसे नमाज़ वग़ैरह में भी कोई रुकावट न हो।
    सवाल 400: एक सड़क को बड़ा करने के प्रोगिराम में कई मस्जिदें आती हैं। प्रोगिराम के ऐतबार से कुछ मस्जिदें पूरी गिरी होती हैं और कुछ का कुछ हिस्सा गिराया जायेगा ताकि ट्रेफ़िक में आसानी हो बराए मेहरबानी इस सिलसिले में अपनी राय बयान फ़रमायें?
    जवाब: मस्जिद या उसके किसी हिस्से को मिसमार करना जाएज़ नहीं है मगर ऐसी मसलेहत की बिना पर कि जिस को नज़र अंदाज़ न किया जा सकता हो।
    सवाल 401: क्या मस्जिद के वुज़ू के लिये मख़सूस पानी को कम मेक़दार में अपने ज़ाती इस्तेमाल में लाना जाएज़ है मसलन दुकानदार पीने, चाय बनाने या मोटर गाड़ी में डालने में इस्तेमाल करें, वाज़ेह रहे कि इस मस्जिद का वक़्फ़ करने वाला कोई एक शख़्स नहीं है जो इससे मना करे?
    जवाब: अगर मालूम न हो कि ये पानी सिर्फ़ नमाज़ गुज़ारों के लिये वक़्फ़ है और इस मोहल्ले में ये राइज हो कि इसके पड़ौसी और रास्ता चलने वाले उसके पानी से फ़ाएदा उठाते हैं तो इस में कोई हर्ज नहीं है अगर्चे इस सिलसिले में ऐहतियात बेहतर है।
    सवाल: 402 क़ब्रिस्तान के पास मस्जिद है जब कुछ मोमिन कुबूर की ज़ियारत के लिये आते हैं तो अपने किसी अज़ीज़ की क़ब्र पर पानी छिड़कने के लिये इस मस्जिद से पानी लेते हैं और हम ये नहीं जानते कि ये पानी मस्जिद के लिये वक़्फ़ है या लोगों के फ़ायदे के लिये है और बिलफ़र्ज़ अगर ये मस्जिद के लिये वक़्फ़ न हो तो मालूम नहीं कि ये वुज़ू और तहारत के साथ मख़सूस है या नहीं तो क्या इसे क़ब्र पर छिड़कना जाएज़ है?
    जवाब: इन क़बरों पर पानी छिड़कने के लिये मस्जिद से फ़ाएदा उठाना जो इससे बाहर हैं अगर लोगों में राइज हो और इस पर एतेराज़ न करें और इस बात पर कोई दलील न हो कि पानी सिर्फ़ वुज़ू और तहारत के लिये वक़्फ़ है तो इसके इस्तेमाल में कोई हर्ज नहीं है।
    सवाल 403: अगर मस्जिद में तामीराती काम की ज़रूरत हो तो क्या हाकिमे शरा या उसके वकील की इजाज़त ज़रूरी है?
    जवाब: अगर मस्जिद की तामीर नेक लोग के माल से करना हो तो इस में हाकिमे शरा की इजाज़त ज़रूरी नहीं है।
    सवाल 404: क्या मैं ये वसीयत कर सकता हूँ कि मरने के बाद मुझे मोहल्ले की उस मस्जिद में दफ़्न किया जाये जिसके लिये मैंने बहुत कोशिशें की थीं क्योंकि में चाहता हूं मुझे उस मस्जिद के अन्दर या उसके सहन में दफ़्न किया जाये?
    जवाब: अगर वक़्फ़ करते वक़्त मस्जिद में मय्यत को दफ़्न करने को मुसतसना (अलग) न किया गया हो तो इस में दफ़्न करना जाएज़ नहीं है और इस सिलसिले में आप की वसीयत की कोइ हैसियत नहीं है।