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    मस्जिद के अहकाम – 3

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    सवाल 405: एक मस्जिद तक़रीबन बीस साल पहले बनाई गई है और इसे इमामे ज़माना के नामे मुबारक से मन्सूब किया गया है और ये मालूम नहीं है कि मस्जिद का नाम वक़्फ़ करते वक़्त ज़िक्र किया गया है या नहीं तो मस्जिद का नाम साहेबे ज़माना के नामे मुबारक से मन्सूब के बजाये जामा मस्जिद रखने का क्या हुक्म है?
    जवाब: सिर्फ़ मस्जिद का नाम बदलने में कोई हर्ज नहीं है।
    सवाल 406: जिन मस्जिदों में मोमेनीन के अतयों (दी गईं चीज़ों) और मस्जिदें की ख़ास नुज़ूर से बिजली और एयरकन्डीशनल के सिस्टम का इंतेज़ाम किया जाता है जब महल्ले वालों में से कोई मर जाता है तो उसकी फ़ातेहा की मजलिस का ऐहतमाम किया जाता है और मजलिस में मस्जिद की बिजली और एयरकन्डीशन वग़ैरह को इस्तेमाल किया जाता है लेकिन मजलिस करने वाले इसका पैसा अदा नहीं करते शरई नुक़तए नज़र से ये जाएज़ है या नहीं?
    जवाब: मस्जिद की चीज़ों से फ़ातेहा की मजलिस वग़ैरह में इस्तफ़ादा करना वक़्फ़ और नज़र की कैफ़ियत पर मौक़ूफ़ है।
    सवाल 407:  गांव में एक नई मस्जिद है जो पुरानी मस्जिद की जगह बनाई गई है मौजूदा मस्जिद के एक किनारे के जिस की ज़मीन पुरानी मस्जिद का जुज़ है मसअला न जानने की बिना पर चाय वग़ैरह बनाने के लिये एक कमरा तामीर किया गया है और इसी तरह मस्जिद की आधी छत जोकि मस्जिद के हाल के अन्दर है इस पर एक लायब्रेरी बनाई गई है, बराए मेहरबानी इस सिलसिले में अपनी राय बयान फ़रमायें?
    जवाब: पहले वाली मस्जिद की जगह चाय खाना बनाना सही नहीं है और इस जगह को दोबारा मस्जिद की हालत में बदलना वाजिब है मस्जिद के हाल के अन्दर की आधी छत भी मस्जिद के हुक्म में है और इस पर मस्जिद के तमाम शरई अहकाम व क़ानून लागू होंगे लेकिन इस में किताबों की अलमारियां रखने और मोतालेय (पढ़ने) के लिये वहां जमा होने में अगर नमाज़ गुज़ारों के लिये रुकावट या तकलीफ़ न हो तो कोई हर्ज नहीं है।
    सवाल: 408 इस मसअले में आपकी क्या राय है कि एक गांव में एक मस्जिद गिरने वाली है लेकिन फ़िलहाल इसे गिराने की कोई वजह नहीं है क्योंकि वो रास्ते में रूकावट नहीं है क्या पूरी तरह से इस मस्जिद को गिराना जाएज़ है? इस मस्जिद का कुछ सामान और पैसा भी है, ये चीज़ें किस को दी जायें?
    जवाब: मस्जिद को गिराना जाएज़ नहीं है और पूरी तरह से मस्जिद का खण्डर भी मस्जिद के हुक्म में ही होता है और मस्जिद के सामान व माल को अगर इसकी ख़ुद इस मस्जिद को ज़रूरत नहीं है तो फ़ाएदे के लिये दूसरी मस्जिदों में भेजा जा सकता है।
    सवाल 409: क्या मस्जिद के सहन के एक कोने में मस्जिद की इमारत में किसी तसर्रुफ़ (इस्तेमाल) के बग़ैर म्यूजि़यम बनाने में कोई शरई हर्ज है जैसा कि आज कल मस्जिद के अन्दर लायब्रेरी बना दी जाती है?
    जवाब: अगर सहने मस्जिद के कोने में लायब्रेरी या म्यूजि़यम बनाना मस्जिद के हाल और सहन के वक़्फ़ की कैफ़ियत के ख़िलाफ़ या मस्जिद की इमारत में तब्दीली की वजह हो तो जाएज़ नहीं है तो ज़िक्र किये गऐ मक़सद के लिये बेहतर है कि मस्जिद से मुत्तसिल (मिली हुई) किसी जगह का इंतेज़ाम किया जाये।
    सवाल: 410 एक मौक़ूफ़ जगह (एक वक़्फ़ की गई जगह) में मस्जिद दीनी मदरसा और लोगों के लिये लायब्रेरी बनाई गई है और सब काम कर रहे हैं लेकिन इस वक़्त ये सब बलदिया (नगर पालिका) के तौसी वाले नक़्शे में आ रहे हैं (यानी डिबलपमेन्ट वाले नक़शे में आ रहे हैं) जिनका ख़त्म होना बलदिया (नगर पालिका) के लिये ज़रूरी है इनके ख़त्म होने के लिये बलदिया (नगर पालिका) से केसे मदद ली जाये और कैसे इनकी उजरत (क़ीमत) ली जाये ताकि इसके बदले नई और अच्छी इमारत बनाई जाये?
    जवाब: अगर बलदिया (नगर पालिका) इसको मुन्हदिम (ख़त्म) करने और उसकी क़ीमत देने के लिये क़दम उठाये और मुआवेज़ा (क़ीमत) दे तो इस में कोई हर्ज नहीं है लेकिन किसी अहम मसलेहत के बग़ैर कि जिस को नज़र अन्दाज़ करना मुमकिन नहीं है वक़्फ़ की गई मस्जिद व मदरसे को मुन्हदिम करना जाएज़ नहीं है।
    सवाल: 411 मस्जिद की तौसी (डिबलपमेन्ट) के लिये इसके सहन से कुछ दरख़्तों को उखाड़ना ज़रूरी है क्या इनको उखाड़ना जाएज़ है? जबकि मस्जिद का सहन काफ़ी बड़ा है और इस में और भी बहुत से पेड़ हैं।
    जवाब: अगर पेड़ काटने और वक़्फ़ में तब्दीली शुमार न किया जाता है तो इस में कोई हर्ज नहीं है।