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    मस्जिद के अहकाम – 4

    मस्जिद के अहकाम – 4
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    सवाल 412: उस ज़मीन का क्या हुक्म है जो मस्जिद के छत वाले हिस्से का जुज़ थी बाद में बलदिया (नगर पालिका) के तौसी में आने की वजह से मस्जिद के इस हिस्से को मुन्हदिम (गिरा) करके सड़क में तब्दील कर दिया गया?
    जवाब: अगर उसकी पहली हालत की तरफ़ पलटने का यक़ीन न हो तो मामूल नहीं है उस पर मस्जिद के निशान पाये जायें।
    सवाल: 413 एक मस्जिद मुन्हदिम हो (गिर) चुकी है और इसके मस्जिद वाले निशान मिट चुके हैं या उसकी जगह कोई और इमारत बना दी गई है और उसकी नई तामीर की कोई उम्मीद नहीं है मसलन वहां की आबादी वीरान हो गई है और उसने वहां से जगह बदल ली है, क्या उस मस्जिद वाली जगह को नजिस करना हराम है? और उसे पाक करना वाजिब है?
    जवाब: बयान की गई सूरत में मालूम नहीं है कि इसका नजिस करना हराम है अगर्चे ऐहतियात ये है कि इसे नजिस न किया जाये।
    सवाल 414: मैं एक अर्से से एक मस्जिद में नमाज़े जमाअत पढ़ता हूं और मस्जिद के ख़र्च के सिलसिले में भी मुश्किलात दरपेश हैं क्या मस्जिद के तहख़ाने को मस्जिद के शायाने शान किसी काम के लिये किराय पर दिया जा सकता है?
    जवाब: अगर तहख़ाने पर मस्जिद का उन्वान सादिक़ नहीं आता है (अगर मस्जिद का नाम नहीं आता) और वो इसका ऐसा जुज़ (हिस्सा) भी नहीं है जिसकी मस्जिद को ज़रूरत हो और वोह वक़्फ़ की हालत में भी न हो तो कोई हर्ज नहीं है
    सवाल: 415 मस्जिद के पास कोई जाएदाद नहीं हैं जिससे उसके ख़र्चे पूरे किये जा सकें और मस्जिद के ट्रस्ट ने इसके छत वाले हिस्से के नीचे मस्जिद के ख़र्च पूरा करने के लिये एक तहख़ाना खोदकर उसमें वर्कशाप या दूसरे उमूमी मरकज़ बनाने का फ़ैसला किया है, क्या ये अमल जाएज़ है या नहीं?
    जवाब: वर्कशॉप वग़ैरह की तामीर के लिये मस्जिद की ज़मीन को खोदना जाएज़ नहीं है।
    सवाल: 416 क्या मुसलमानों की मस्जिद में काफ़िरों का दाख़िल होना जाएज़ है चाहे वह तारीख़ी आसार को देखने के लिये ही हो?
    जवाब: मस्जिदे हराम में दाख़िल होना शरअन मना है और दूसरी मस्जिदों में दाख़िल होना अगर मस्जिद की बेहुरमती शुमार की जाये तो जाएज़ नहीं है बल्कि दूसरी मस्जिदों में भी वह किसी सूरत में दाख़िल न हों।
    सवाल 417: क्या उस मस्जिद में नमाज़ पढ़ना जाएज़ है जो काफि़रों के ज़रिये बनाई गई हो?
    जवाब: कोई हर्ज नहीं है।
    सवाल 418: अगर एक काफ़िर अपनी ख़ुशी से मस्जिद की तामीर के लिये पैसा दे या किसी और तरीक़े से मदद करे तो क्या इसे क़ुबूल करना जाएज़ है?
    जवाब: इस में कोई हर्ज नहीं है।
    सवाल 419: अगर एक शख़्स रात में मस्जिद में आकर सो जाये और उसे एहतेलाम हो जाये (सोते हुऐ मनी निकल जाये) लेकिन जब जागे तो मस्जिद से निकलने पर सलाहियत रखता हो तो उसकी क्या ज़िम्मेदारी है।
    जवाब: अगर वोह मस्जिद से निकलने और दूसरी जगह जाने की सलाहिय न रखता हो तो उस पर वाजिब है कि फ़ौरन तयम्मुम करे ताकि उसके लिये मस्जिद में बाक़ी रहने जाएज़ हो जाये।