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    मूर्ख व्यक्ति और तीन चालाक चोर

    मूर्ख व्यक्ति और तीन चालाक चोर
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    पुराने समय की बात है कि एक गांव में क़म्बर नाम का एक निष्कपट व भोला व्यक्ति रहता था। उसका नगर जाने का मन करने लगा और एक दिन सुबह के समय वह पैदल नगर की ओर चल पड़ा। सड़क के दोनों ओर ऊंचे-ऊंचे पेड़ लगे थे और क़म्बर सड़क के बीचो बीच पैदल नगर की ओर बढ़ता जा रहा था। सुबह के समय ठंडी हवा से वह बहुत ही आनंदित था। वर्षों से वह अपनी पत्नी के साथ नगर के निकट एक गांव में रह रहा था। उसके कोई संतान न थी। पिछले वर्ष की ईदुल फ़ित्र के समय उसने मनौती मानी कि यदि ईश्वर उन्हें संतान दे तो अगले वर्ष इसी दिन एक भेड़ ख़रीद कर क़ुरबानी करेगा। कृपालु ईश्वर ने उसकी इच्छा पूरी कर दी और दो महीने बाद उसकी पत्नी ने उसे अच्छा समाचार सुनाते हुए कहा कि शीघ्र ही एक संतान हमारी ख़ुशियां बढ़ाएगी। इस समाचार को सुनने के बाद उसका जीवन बदल गया और वह बच्चे की शैतानी और उसकी बचकाना किलकारियां सुनने के लिए व्याकुल था। महीनों के बाद उनके यहां संतान ने जन्म लिया। वह एक सुंदर व हट्टा कट्टा लड़का था। घर में ख़ुशियां ही ख़ुशियां थीं और चिंता का कहीं निशान न था। क़म्बर को अपनी मनौती पूरा करने का विचार आया और वह ईदुल फ़ित्र के आगमन की प्रतीक्षा करने लगा ताकि भेड़ ख़रीद कर गांव लाए और अपनी मनौती पूरी करे। दूर से शहर दिखने लगा और कुछ समय में वह वहां पहुंचने वाला था। उसने अपने जेब से पैसे निकाले और एक बार फिर उसे गिना। पैसे काफ़ी थे जिससे वह एक हट्टा कट्टा भेड़ ख़रीद कर क़ुर्बानी के गोश्त को सभी पड़ोसियों को दे सकता था। क़म्बर ने ईश्वर का आभार व्यक्त किया और पैसों को फिर से जेब में डाल लिया। नगर में चहल-पहल थी और हर आदमी किसी न किसी काम में व्यस्त था। कुछ लोग बेचने में तो कुछ लोग ख़रीदने में व्यस्त थे। थोड़ी तलाश के बाद क़म्बर की दृष्टि एक हट्टे-कट्टे भेड़ पर पड़ी। उसने उसे ख़रीदा और थोड़ा आराम करने के पश्चात वह उसी मार्ग पर चलने लगा जिस मार्ग से वह गांव से शहर आया था। क़म्बर रस्सी से भेड़ को खींच रहा था और उसका ध्यान इस बात की ओर न था कि जिस समय उसने भेड़ ख़रीदा था उस समय तीन दुष्ट चोरों उसे ख़रीदते हुए देखा था और वे नगर से उसका पीछा कर रहे थे। क़म्बर अपने भेड़ के साथ आगे आगे जा रहा था और तीनों चोर उससे थोड़ी सी दूर पर चल रहे थे। क़म्बर अपने आस पास से बेसुध चला जा रहा था। चोरों ने अपने क़दम तेज़ किए और क़म्बर के निकट हो गए। क़म्बर ने जब चोरों के क़दमों की आवाज़ सुनी तो सावधान हो गया और पीछे मुड़ कर देखा और रुक गया। तीन चोरों में से एक आगे आया और सलाम के पश्चात उसने कुशलक्षेम पूछते हुए कहाः भाई कहां जा रहे हो? क़म्बर ने कहाः घर। व्यक्ति ने कहाः इस कुत्ते को कहां ले जा रहे हो? क़म्बर ने एक बार उस व्यक्ति को देखा और एक बार भेड़ को और सोचने लगा कि यह व्यक्ति उससे मज़ाक़ कर रहा है। क़म्बर ने मुस्कुराकर कुछ कहना चाहा कि दूसरे चोर ने कहाः कहीं ऐसा तो नहीं कि शिकार करना चाहते हो इसलिए इस कुत्ते को ले जा रहे हो? किन्तु एक बात कहूं यह कुत्ता बहुत मोटा है और शिकार के लिए तो बिल्कुल ही उचित नहीं है।

    क़म्बर को समझ में नहीं आ रहा था कि उनकी बात माने या न माने। उसने फिर भेड़ को देखा। नहीं यह तो भेड़ है और कुत्ते से इसमें कोई समानता नहीं है। तो यह लोग क्या कह रहे हैं? क़म्बर ने इस बार भी सोचा कि कुछ कहे कि उसके कहने से पहले तीसरा चोर बोल पड़ाः क्या आपको विश्वास है कि यह कुत्ता बीमार नहीं है। इसके मोटापे से लग रहा है कि बीमार है कहीं पागल तो नहीं है? सावधान रहना।

    क़म्बर को भ्रम हो गया। स्वयं से कहने लगाः कहीं ऐसा तो नहीं कि ये लोग सही कह रहे हों और यह पशु वास्तव में एक कुत्ता है? कहीं ऐसा तो नहीं कि बेचने वाला जादूगर था और उसने मुझे मूर्ख बना कर भेड़ के बजाए कुत्ता बेच दिया है। निःसंदेह ऐसा ही है ये तीनों लोग मुझसे झूठ क्यों बोलेंगे। ये लोग मुझे पहचानते भी नहीं और मुझे धोखा भी नहीं देना चाहते। कहीं यह कुत्ता बीमार न हो? हो सकता है किसी भी क्षण मुझ पर आक्रमण कर दे। कहीं ऐसा न हो कि घर ले जाउं तो गांव के लोगों पर हमला कर दे या मेरे प्यारे बच्चे को हानि पहुंचा दे। बेहतर होगा कि इसे छोड़ दूं और इसकी बुराई से स्वयं को बचा लूं और फिर बेचने वाले के पास जाऊं। क़म्बर ने फ़ैसला किया और भेड़ को छोड़ दिया और फिर बड़बड़ा कर कहने लगाः चल कर उस जादूगर व चोर व्यक्ति को बताते हैं। स्वयं को बहुत चालाक सकझता है और मुझे धोखा देना चाहता था। ऐसी हालत करुंगा कि आकाश के पक्षी भी उसकी स्थिति पर रोएं। उसके बाद क़म्बर ने उन तीनों व्यक्तियों से कहाः आपका आभारी हूं कि मेरा ध्यान आपने आकृष्ट किया। यदि इस कुत्ते को गांव ले जाता तो ईश्वर ही जानता है कि क्या होता।

    वह तीनों चोर क़म्बर की मूर्खता पर हंस रहे थे। उनमें से एक ने कहाः मुझे अपना मित्र समझो! यह तो कर्तव्य था जिसे हमने अंजाम दिया। क़म्बर ने भेड़ को छोड़ दिया और वहां से नगर की ओर लौट पड़ा। चोरों ने दिखावे के तौर पर रास्ता चलना जारी रखा और धीरे धीरे चल रहे थे यहां तक कि थोड़े से समय में क़म्बर उनसे दूर हो गया। क़म्बर अब उनकी नज़रों से ओझल हो चुका था। तीनों चोर हंसे कि उन्होंने उसे मूर्ख बना दिया था। उसके बाद उस हट्टे-कट्टे भेड़ की ओर बढ़े जो चर रहा था। चोर बढ़े और भेड़ की रस्सी को पकड़ लिया और चल पड़े और थोड़ी ही देर में वे घुमावदार मार्ग में ओझल हो गए किन्तु क़म्बर की मूर्खता पर उनकी हंसी की आवाज़ सुनाई दे रही थी।