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    मेहनती युवा

    मेहनती युवा
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    पुराने समय की बात है एक मेहनती, परिश्रमी और शक्तिशाली युवा था जिसके दिनचर्या बहुत कठिन गुज़र रहे थे। एक दिन उसने वैध रोज़ी कमाने के लिए दूसरे नगर की यात्रा का निर्णय किया। वह यात्रा पर जाने के लिए तैयार हुआ और यात्रा पर जाने के लिए अपने पिता के पास अनुमति मांगने गया। पिता ने जो अपने पुत्र के लिए ये यात्रा उचित नहीं समझ रहा था, यात्रा की कठिनाईयों को बयान किया और उससे इच्छा व्यक्त की कि वह अपने ही नगर में रहे और यहीं कार्य करे। पुत्र ने यात्रा का निर्णय कर लिया था उसने अपने पिता से यात्रा के लाभ बयान किए। शक्तिशाली और मेहनती युवा नदी के किनारे पहुंचा और वहां पर एक नाव चलने के लिए तैयार थी उसने नाव चलाने वाले से कहा कि मुझे भी अपने साथ ले चलो। नाव चलाने वाले ने इनकार कर दिया क्योंकि युवा के पास पैसे नहीं थे। अंततः इस बात पर समझौता हो गया कि किराए के बदले युवा अपने कपड़े नाव वाले को देगा। युवा जब नाव पर बैठा और उसने अपनी जगह पक्की देख ली तो उसने फ़ैसला किया कि अपनी भुजाओं की शक्ति का प्रयोग करके इस लालची और घटिया नाव वाले से प्रतिशोध लेगा और उससे अपना कपड़ा वापस लेगा। फिर युवा ने नाव वाले को पीटना आरंभ कर दिया, नाव वाले के मित्र उसकी सहायता को दौड़े किन्तु वे उसका मुक़ाबला न कर सके, नाव चालक के साथियों ने जब देखा कि उनका भी ज़ोर शक्तिशाली युवा पर नहीं चला तो उन्होंने दोनों के बीच समझौता कराने का निर्णय किया। इसीलिए उन्होंने उसका कपड़ा वापस कर दिया ताकि उचित अवसर पर उसको नाक रगड़ने पर विवश कर दें। नाव आगे बढ़ी, यहां तक कि नाव पानी में खड़े यूनानी इमारतों के स्तंभ के पास पहुंची। नाव चालक ने कहा कि इस मार्ग से गुज़रना कठिन है। आप में से एक जो अधिक शक्तिशाली हो वह इन स्तंभो के ऊपर जाए और नाव की रस्सी को पकड़े ताकि हम यहां से गुज़र सकें और अपने मार्ग को जारी रखें। युवा जिसे अपनी शक्ति पर बहुत घमंड था, अपने अंदर के द्वेष और शत्रुता को भूल गया और अपने विरुद्ध रचे गये षड्यंत्रों से निश्चेत स्वेच्छा से ये काम करने को तैयार हो गया।कुल मिलाकर युवा स्तंभ के ऊपर गया ताकि नाव की रस्सी पकड़े ताकि नाव वहां से निकल जाए। नाव स्तंभ के नीचे से निकल गयी और युवा वहीं रह गया, उसी क्षण उसे समझ में आ गया कि उसके साथ धोखा किया गया है और उन्होंने ने उसे स्तंभ पर अकेला छोड़ दिया। युवा बेचारा यथावत स्तंभ पर खड़ा रहा। न उसके पास आगे जाने का मार्ग था और न ही पीछे हटने का। लहरें उसके पैरों से टकरा रही थीं और युवा भय के मारे अपने पैरों को देख भी नहीं पा रहा था। वह वहां देर तक रहा, यहां तक कि सो गया और फिर पानी में गिर गया। युवा बेचारा 24 घंटों के अनथक प्रयास के बाद, अपनी तैराकी का प्रयोग करते हुए किनारे पहुंचा किन्तु वह इतना थका और भूखा प्यासा था कि उसमें चलने की क्षमता नहीं थी। उसने भूख के मारे पत्तों को खाना आरंभ कर दिया ताकि उसमें थोड़ी शक्ति पैदा हो और वह आगे बढ़ सके। भूख और प्यास की में उसने थोड़ा मार्ग तय किया और जंगल में एक कुंए के निकट पहुंचा। उस कुएं के पास कुछ लोग बैठे हुए थे, युवा आगे बढ़ा और उसने पानी पीने की इच्छा व्यक्त की। किन्तु वहां पर बैठे लोगों ने उसे पानी देने से इनकार कर दिया और कहा कि पानी फ़्री का नहीं है एक पियाला पानी के लिए एक दीनार देना होगा। युवा के पास पैसे तो थे नहीं उसने उनसे इच्छा व्यक्त की कि उसे पानी पीने दें किन्तु इसका कोई लाभ नहीं हुआ। युवा ने जब ये देखा कि रोने पीटने और विनती से कुछ हाथ नहीं लगेगा तो उसने अपनी भुजाओं का प्रयोग करने का निर्णय किया। वह उनसे भिड़ गया और उनमे से कई को घायल कर दिया। उन लोगों ने भी उस पर एक साथ आक्रमण कर दिया और उसे बहुत अधिक घायल कर दिया। भूखा प्यासा युवा बेचारा लात घूंसा खाकर वहां से हट गया।उसी समय उसने एक कारवां को आते देखा और उस कारवां के साथ हो लिया। रात हुई और कारवा ऐसे स्थान पर पहुंच गया था जहां डाकुओं का ख़तरा था। युवा ने इस अवसर से लाभ उठाया और आगे आया और उसने कहा कि डरो मत, निश्चिंत रहो, जब तक मैं तुम्हारे साथ हूं कोई भी डाकू तुम्हें हानि नहीं पहुंचा सकता। कारवां वाले उसे अपने साथ देखकर बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उसे खाना पानी दिया। वह कई दिनों से भूखा प्यासा था उसने जम कर खाया। युवा का जब पेट भर गया और अराम मिला तो उसे नीद आने लगी। कई दिनों से वह भरपेट खाकर सोया नहीं था। वह जंगल की घांस पर लेटा और गहरी और मीठी नींद सो गया। उसकी नींद इतनी गहरी थी कि यदि संसार इधर से उधर हो जाए तब भी उसकी आंख नहीं खुलती। कारवां में एक बूढ़ा व्यक्ति था जो बहुत अनुभवी था और उसे आरंभ से ही इस युवा से आशा नहीं थी। उसने अपने साथियों से कहा कि इस बड़बोले युवा से आशा मत लगाओ। वह इस प्रकार सो रहा है कि वह स्वयं की रक्षा तो कर ही नहीं सकता कारवां और हमारी बात ही छोड़ो। तब तक हम उसे जगाएंगे हम लुट चुके होंगे। हो सकता है कि ये डाकु में से ही हो। बेहतर है कि इससे पूर्व के हम पर आक्रमण हो उसे सोता हुआ छोड़ो और चुपके से यहां से निकल चलो। कारवां आगे बढ़ गया और युवा यथावत सोता रहा। 24 घंटे सोने के बाद उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि कारवां वहां से जा चुका है और वह अकेला बच गया है। चटियल मैदान में वह इधर उधर घूम रहा था कि उसे एक घुड़सवार दिखाई पड़ा जो उसकी ओर आ रहा था। उसकी ओर आने वाला घुड़सवार कोई और नहीं था बल्कि राजकुमार था जो शिकार के लिए जंगल आया था और अपने सैनिकों से बिछड़ गया था। राजकुमार युवा को देखकर परेशान हो गया उसने युवा को अपने घोड़े पर बिठाया और अपने सैनिकों को ढूंढने निकल पड़ा, अंततः उसने सैनिकों को ढूंढ लिया। राजकुमार ने जब युवा की जीवन कथा सुनी तो उसे उसपर बहुत दया आई। उसने उसे कुछ पैसे और कपड़े दिए और अपने विश्वसनीय व्यक्ति के साथ उसे उसके गांव भेज दिया। युवा के पिता ने जब देखा कि उसका पुत्र सुरक्षित और पैसे लेकर आया है तो वह बहुत प्रसन्न हुआ और ईश्वर का आभार व्यक्त किया। युवा ने अपने साथ घटने वाली समस्त घटनाएं पिता से बयान की और कहा कि देखा पिता जी जब तक यात्रा नहीं करेंगे और ख़तरों का मुक़ाबला नहीं करेंगे तब तक ख़ज़ाना नहीं मिलेगा। देखा आपने मैंने इतने कम समय में इतना अधिक धन एकत्रित कर लिया। पिता ने कहा कि बेटा, इस बार भाग्य तुम्हारे साथ था कि उन समस्त कठिनाईयों और समस्याओं के बाद तुम्हें मुक्ति मिली और तुम प्रसन्न हुए किन्तु सदैव ऐसे नहीं होता इस यात्रा को भूल जाओ और किसी दूसरे को बताना भी नहीं, एसा न हो कि कोई राजकुमार के मिलने के लोभ में जंगल जाए और मारा जाए क्योंकि हर चटियल मैदान की यात्रा में मनुष्य को राजकुमार नहीं मिलता। ये एक संयोग है जिसपर भरोसा नहीं किया जा सकता।