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    युवक की लापरवाही से मरुस्थल में कारवां का लुटना

    युवक की लापरवाही से मरुस्थल में कारवां का लुटना
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    पुराने समय की बात है एक मरुस्थल में थका मांदा एक कारवां चला जा रहा था। कारवां में बहुत अधिक धन दौलत और मूल्यवान वस्त्र थे। जब सूर्यास्त हुआ और रात आ गयी तो कारवां पर्वतांचल में पहुंचा। कारवां में शामिल लोगों ने पर्वत से निकलने वाले सोते से पानी पिया और आग जलाई और उसके चारो ओर बैठ कर खाना खाने लगे और इधर उधर की बातें करने लगे। बातों बातों में कारवां और लुटेरों के बारे में भी बात निकल आई। वे बात करते करते इतना थक गये और जिसको जहां स्थान मिला वह वहां सो गया। उन्होंने सोने से पहले एक युवा को रखवाली के लिए चुना। युवा ने स्वयं को रखवाली के लिए स्वेच्छा से पेश किया और सभी लोगों ने स्वीकार कर लिया ताकि वे आराम से निश्चिंत होकर सोएं। कारवां वालों ने उस युवा से कहा कि कल सभी लोग तुम्हारी रखवाली के बदले तुम्हें मेहनताना भी देंगे क्योंकि कारवां में शामिल लोग हिसाब किताब में पक्के हैं। वह युवा बहुत शक्तिशाली और दबंग था किन्तु उसने कभी कठिनाइयों का स्वाद नहीं चखा था और लुटेरों के आक्रमण के बारे में उसने केवल कहानियां सुनी थीं और कभी उसने अपनी आंखों से नहीं देखा था। जब सारे कारवां वाले सो गये और रंग बिरंगी वादियों और मीठे मीठे स्वप्न में खो गये तो युवा ने कारवां के चारों ओर चहलक़दमी शुरू की। उसने स्वयं को व्यस्त रखने के लिए कुछ झाड़ियां तोड़ी और ऊटों के सामने डाल दीं और एक बड़े से बर्तन में उनके लिए पानी रख दिया। अभी थोड़ा सा समय ही बीता था कि उस युवा रखवाले ने आभास किया कि उसकी पलकें धीरे धीरे भारी हो रही हैं और उसे बहुत तेज़ी से नींद सता रही है। उसे यह आभास हो रहा था कि आसमान और ज़मीन उसे लोरियां दे रहे हैं। उसने स्वयं पर नियंत्रण किया और स्वयं को एक थप्पड़ रसीद किया ताकि नींद हवा हो जाए। उसने स्वयं से कहा कि नहीं, तुम्हें सोना नहीं चाहिए। तुम तो कारवां के रखवाले हो, कल बेहतरीन ईनाम तुम्हारी प्रतीक्षा में होगा। तुमने स्वेच्छा से रखवाली स्वीकार की है और तुमने स्वयं ही कहा था कि तुम्हारे माल की रक्षा मैं करूंगा। अब तुम्हें क्या हो गया है कि सोना चाहते हो। रखवाली करो ऐसा न हो कि सारा माल लुट जाए और तुम सोते रहो।

    नींद ने युवा का पीछा नहीं छोड़ा। वह सोते की ओर गया और उसने पानी से आंखों को ख़ूब अच्छी तरह से धोया ताकि नींद रफ़ूचक्कर हो जाए। वह पुनः कारवां के पास आया और रखवाली करने लगा। कुछ देर के लिए नींद ने उसका पीछा छोड़ दिया था किन्तु थोड़े ही समय के बाद उसे यह आभास होने लगा कि उसके पूरे अस्तित्व पर नींद छा रही है और उसमें नींद से मुक़ाबले की शक्ति नहीं है। उसने स्वयं से कहा कि क्यूं न सोऊं। इस चटियल मैदान में हमारे कारवां के अतिरिक्त एक पक्षी भी नहीं है। जब यहां पर पक्षी तक नहीं दिखता तो लुटेरों की तो बात ही छोड़ो। पागल के अतिरिक्त कोई यह कार्य नहीं करेगा। पागल के न तो भय होता है और न ही बुद्धि, कारवां के माल को कैसे लूटेगा। कारवां के सारे लोग घोड़े बेचकर मीठी नींदों का आनंद ले रहे हैं फिर मैं क्यू न सोऊं? एक कोने में बैठ कर अपनी आंखों को बंद कर लूंगा और एक हल्की सी नींद मार लूंगा, किसी को हवा भी नहीं लगेगी कि मैं सो रहा हूं। सुबह जल्दी ही सबसे पहले उठ जाऊंगा और यह दिखाऊंगा कि पूरी रात रखवाली करता रहा। हां यही सबसे अच्छा रास्ता है। मुझे ईनाम भी मिलेगा और अनिंद्रा से मुक्ति भी। युवा एक बड़े से पत्थर के पास बैठ गया और उस पर टेक लगाकर ख़र्राटे लेने लगा। वह सपने में कारवां वालों की ओर से दिए गये सिक्कों को गिन रहा था और इधर लुटेरे कारवां को लूट रहे थे। युवा को यह भनक भी नहीं लगी कि वह जैसे ही सोया लुटेरे पर्वतीय सांपों की भांति पत्थर के पीछे से निकले और सारा माल लूट ले गये। लूटेरों ने ऊटों को भी नहीं छोड़ा और अपने साथ हांक ले गये।

    सुबह हो गयी, कारवां वाले उठे और उन्होंने देखा कि न तो उनका माल है और न ही ऊंट। वह क्रोध में युवा के पास आए किन्तु वह चैन से सो रहा था। कारवां वालों के चीख़ने चिल्लाने पर युवा की आंख खुली। उन्होंने उससे पूछा कि हे मूर्ख युवा, कल रात क्या कर रहे थे कि सारा सामान लुट गया। तुम रखवाली कैसे कर रहे थे कि लुटेरे आए और सामान लूट कर ले गये तुम्हें पता ही नहीं चला। युवा को अब समझ में आया कि क्या हुआ और उसके पास झूठ बोलने के अतिरिक्त कोई और मार्ग नहीं था। उसने तुरंत झूठ का सहारा लिया और कहा कि चोर ढाटा बांधे हुए थे आए और सारा सामान लूट कर चले गये। कारवां वालों ने क्रोध में कहा कि चोर ढाटा बांधे हुए थे आए और सब सामान चोरी करके ले गये और तुम खड़े तमाशा देखते रहे। तुमने क्या किया? युवा को अपनी कही बातों पर पछतावा हो रहा था, उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे क्योंकि उसे समझ में आया कि उसने झूठ भी ग़लत बोला, उसने दूसरे झूठ का सहारा लिया और कहा कि मैं अकेला था और उनके साथ एक बड़ा गुट था जिनके पास हथियार थे। कारवां वालों को समझ में आ गया था कि वह झूठ बोल रहा है और उन्हें मालूम था कि वह सो गया और कब चोरी हुई उसे भनक भी नहीं लगी। कारवां में शामिल एक व्यक्ति ने उसकी पोल खोलने के लिए कहा कि यदि वे अधिक संख्या में थे और तुम अकेले उनसे मुक़ाबला नहीं कर सकते थे तो कम से कम चिल्ला ही देते कि हमारी नींद खुल जाती और हम तुम्हारी सहायता के लिए आ जाते। दूसरे व्यक्ति ने भी उसकी बात की पुष्टि की और कहा कि हे मूर्ख युवा यदि तुम अकेले थे और वह बड़ी संख्या में थे और तुम अकेले उनसे मुक़ाबला नहीं कर सकते थे तो हमें चिल्ला कर बुलाया क्यों नहीं? क्या तुम चिल्ला भी नहीं सकते थे और सहायता के लिए बुला भी नहीं सकते थे? युवा ने एक और झूठ बोला और कहा कि उन्होंने मुझे चाक़ू दिखाकर धमकी दी थी कि यदि मैंने अपने साथियों को पुकारा तो वे मुझे मार डालेंगे। मैं भी डर के मारे चुप रहा। यदि उस समय मैं भय के मारे चुप था किन्तु अब मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने और तुमको चोरी के बारे में बताने को तैयार हूं। चलो कोई उपाय सोचते हैं।

    एक वृद्ध व्यक्ति जिसकी दाढ़ी और सिर के बाल सफ़ेद हो चुके थे और उसने दुनिया देखी थी मुस्कुराते हुए उस युवा का उपहास करते हुए कहा कि अब किसी चीज़ का कोई लाभ नहीं है तुमने अवसर हाथ से गंवा दिया और जो अमानत तुम्हारे हवाले की गयी थी उससे विश्वासघात किया। अब तुम्हारी क्षमा के लिए दुआ करने का भी कोई लाभ नहीं है।