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    योरोपीय और उत्तरी अमरीका के युवाओं के नाम वरिष्ठ नेता का संदेश

    योरोपीय और उत्तरी अमरीका के युवाओं के नाम वरिष्ठ नेता का संदेश
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    २१ जनवरी २०१५ को विश्व के संचार माध्यमों में असंख्य खबरों के मध्य एक ऐसी ख़बर दिखाई दी जो इस्लामी जगत और मुसलमानों सेसंबंधित थी और उसने विश्व के बहुत से लोगों के ध्यान को अपनी ओर आकृष्ट किया। ऐसी स्थिति में यह ख़बर प्रकाशित हुई जब लगभग प्रतिदिन पश्चिमी संचार माध्यमों में इस्लाम और मुसलमानों के विरुद्ध ख़बरें प्रकाशित होती रहती हैं। यह ख़बर ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के संदेश पर आधारित थी जिसमें जिन्होंने यूरोपीय एवं अमेरिकी युवाओं को संबोधित किया था।

    वरिष्ठ नेता ने इस संदेश में पश्चिमी युवाओं का आह्वान किया था कि वे इस्लाम को कुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम की जीवनी से समझें न कि उस चीज़ से जो पश्चिमी संचार माध्यमों में इस्लाम के बारे में कही जाती है। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा बहुत कम होता है कि किसी देश का नेता या राष्ट्रपति दूसरे देश के युवाओं को संबोधित करे। फ्रांस में पैग़म्बरे इस्लाम के अपमान के बारे में प्रकाशित होने वाले कैरीकेचर और फ्रांस की शार्ली एब्दो चार्ली पत्रिका के कार्यालय पर हमले के बाद ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने यूरोप और अमेरिका के युवाओं को अपने संदेश में संबोधित किया। इस संदेश में वरिष्ठ नेता ने पश्चिमी व युरोपीय युवाओं का आह्वान किया कि वे कुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम की जीवनी का अध्ययन करें।

    जो लोग विशुद्ध इस्लाम की शिक्षाओं से अवगत हैं वे भलिभांति जानते हैं कि ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के संदेश का स्रोत इमाम जाफर सादिक़ अलैहिस्सलाम का वह कथन है जिसमें वह अपने अनुयाइयों से फरमाते हैं” युवाओं को आमंत्रित करो कि वे जल्दी वास्तविकता को समझ लेते हैं और वे अच्छाई की दिशा में क़दम बढ़ाते हैं।“

    ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने पश्चिमी युवाओं के नाम अपने संदेश में कहा” मैं आप युवाओं को संबोधित कर रहा हूं इस कारण नहीं कि मैं आपके माता- पिता की अनदेखी कर रहा हूं बल्कि इस कारण कि आपके राष्ट्र और देश का भविष्य आपके हाथ में देख रहा हूं और वास्तविकता को समझने के एहसास को आपके दिलों में जीवित व अधिक देख रहा हूं।“

    फ्रांस और कुछ पश्चिमी देशों में घटने वाली घटनाओं के बाद वरिष्ठ नेता ने इन देशों के युवाओं का आह्वान वास्तविक इस्लाम को समझने का किया। क्योंकि पश्चिमी संचार माध्यमों में इस्लाम की छवि बिगाड़ कर पेश की जा रही है। स्पष्ट है कि अगर पश्चिमी युवा पवित्र कुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम की जीवनी का अध्ययन करेंगे तो बहुत सी वास्तविकताएं स्पष्ट हो जायेंगी।

    वरिष्ठ नेता ने इसी प्रकार युरोपीय और अमेरिकी युवाओं के नाम अपने संदेश में कहा कि आप इस बात की अनुमति न दें कि आतंकवादी स्वयं का परिचय इस्लाम के प्रतिनिधि के रूप में करायें । इस्लाम को उसके मूल स्रोत से पहचानिये। इस्लाम को कुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम के जीवन से पहचानिये। यहां  मैं  पूछना चाहता हूं कि क्या आज तक आपने सीधे रूप से मुसलमानों के कुरआन का अध्ययन किया? क्या अब तक संचार माध्यमों के अतिरिक्त किसी अन्य स्रोत से इस्लाम को समझा? क्या आज तक आपने अपने आप से पूछा कि इस्लाम किस प्रकार और किन मूल्यों के आधार पर दुनिया में सबसे बड़ी शैक्षिक व वैचारिक सभ्यता उत्पन्न कर सका और किस प्रकार वह शताब्दियों के दौरान सबसे बड़े विद्वानों और विचारकों का प्रशिक्षण कर सका?।“

    पवित्र क़ुरआन में ऐसी आयतें भरी पड़ी हैं जो युवाओं को वास्तविकता जानने के लिए आकर्षित व प्रोत्साहित करती हैं। वास्तविकता समझने का जिज्ञासु युवा अगर पवित्र कुरआन की आयतों पर ध्यान दे तो निश्चित रूप से वह इस ईश्वरीय वाणी की ओर आकृष्ट होगा। महान व सर्वसमर्थ ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरये माएदा में कहता है” किसी गुट के साथ तुम्हारी शत्रुता/ पाप करने और न्याय छोड़ देने का कारण न बने! न्याय करो कि वह परहेज़गारी व सदाचारिता के निकट है और ईश्वर की अवज्ञा करने से परहेज़ करो क्योंकि जो कुछ तुम करते हो ईश्वर उससे अवगत है।“

    वास्तव में युवा पवित्र कुरआन के इस संदेश को पूरी गहराई से समझता है। पवित्र कुरआन के सूरे आले इमरान में महान ईश्वर कहता है” हे किताब वालो उस बात को मानो जो हमारे और तुम्हारे बीच समान है और ईश्वर के अतिरिक्त किसी अन्य की उपासना न करो और किसी को उसका समतुल्य न बनाओ और हममें से ईश्वर के इलावा एक दूसरे को अपना मालिक न समझे”

    इसी प्रकार महान ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरे अनआम की १०८वीं आयत में कहता है” जो लोग ईश्वर के अतिरिक्त किसी और को बुलाते हैं उन्हें बुरा-भला न कहो कहीं ऐसा न हो कि अज्ञानता वश वे ईश्वर को बुरा-भला कह दें।“ अगर वास्तविकता प्रेमी पश्चिमी व युरोपीय युवा पवित्र क़ुरआन का अध्ययन करेगा तो उसे पवित्र कुरआन के सूरे तौबा की ६ ठीं आयत में मिलेगा जिसमें महान ईश्वर कहता है कि अगर अनेकेश्वरवादियों में से कोई तुमसे शरण मांगे तो उसे शरण दे दो ताकि वह ईश्वर की बात सुने और उसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दो क्योंकि वे अज्ञानी लोग हैं।“  पश्चिमी व युरोपीय युवा किस प्रकार ईश्वरीय धर्म इस्लाम को बुद्धि व तर्क से परे मान सकते हैं जबकि पवित्र कुरआन में ऐसी आयतें भरी पड़ी हैं जो चिंतन – मनन के लिए इंसान का आह्वान करती हैं। पश्चिमी युवा किस प्रकार इस्लाम से विमुख हो सकता है जबकि इस्लाम अध्यात्म एवं नैतिक शिक्षाओं व मूल्यों से समृद्ध है। पवित्र कुरआन सूरे अनकबूत की आठवीं आयत में कहता है कि मां- बाप और पत्नियों के साथ अच्छा व्यवहार करो”

    इसी प्रकार पवित्र कुरआन की आयतों में दसियों मानवीय व नैतिक विशेषताओं की सिफारिश की गयी है। पवित्र कुरआन की आयतें राजनीतिक, सामाजिक, नैतिक और व्यक्तिगत आदि विषयों के बारे में हैं और वे हर वास्तविकता प्रेमी व्यक्ति के हृदय को अपनी ओर आकर्षित करती हैं और उसे मुक्ति व कल्याण तक पहुंचने का मार्ग बताती हैं। ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई भी लोगों का ईश्वर की ओर मार्गदर्शन करके मानव समाज की सफलता व कल्याण चाहते हैं। इस आधार पर वे आज की दुनिया की समस्याओं के समाधान के लिए पैग़म्बरे इस्लाम की सिफारिशों का पालन करते हैं। पैग़म्बरे इस्लाम मानव समाज के कल्याण के लिए अपने जीवन के अंतिम क्षण में फरमाते हैं” मैं तुम्हारे बीच दो मूल्यवान चीज़ें छोड़कर जा रहा हूं एक ईश्वर की किताब और दूसरे हमारे परिजन, अगर तुम इन दोनों से जुड़े रहोगे तो कदापि गुमराह नहीं होगे।“ इस आधार पर इस्लाम की ओर आमंत्रित करने में जो चीज़ पैग़म्बरे इस्लाम के लिए महत्वपूर्ण थी वह मनुष्य की पवित्र प्रवृत्ति से अज्ञानता की धूल हटानी थी। इस चीज़ को पैग़म्बरे इस्लाम के पावन जीवन में भलिभांति देखा जा सकता है। पैग़म्बरे इस्लाम इंसानों के शुभ चिंतक थे और जब पैग़म्बरे इस्लाम लोगों को आमंत्रित करते थे लोगों जागरुक बनने पर बल देते थे। पैग़म्बरे इस्लाम अपने उद्देश्य को व्यवहारिक बनाने के लिए तत्वदर्शिता और नसीहत आदि समस्त मार्गों का प्रयोग करते थे।

    अमेरिकी और पश्चिमी देशों के युवाओं के नाम ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने के संदेश का महत्व इसमें है कि वह अपने संदेश में बल देकर कहते हैं कि मैं यह आग्रह नहीं कर रहा हूं कि आप लोग इस्लाम के बारे में मेरे या दूसरे निष्कर्ष को स्वीकार करें बल्कि मैं यह कह रहा हूं कि इस बात की अनुमति न दें कि आज की दुनिया की इस परिवक्व व वास्तविकता को गलत ढंग व  ग़लत लक्ष्यों के तहत परिचित करवाया जाये।“ इस संदेश में वरिष्ठ नेता इस्लाम के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं देते हैं बल्कि वे वास्तविकता को जानने का आह्वान करते हैं क्योंकि वास्तविकता को जानने के बारे में अध्ययन व शोध करना हर इंसान का प्राकृतिक अधिकार है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता द्वारा पश्चिमी युवाओं का आह्वान इस वास्तविकता का सूचक है कि वास्तविकता की खोज करने वाला हर इंसान पवित्र कुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम की पावन जीवनी का अध्ययन करके वास्तविक इस्लाम की शिक्षा और बहुत से आधार भूत बिन्दुओं की जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस आधार पर अगर अमेरिकी और यूरोपीय युवा इसी मांग व आह्वान पर ध्यान दें तो निश्चित रूप से वे इस वास्तविकता को समझ जायेंगे कि वहाबियत, आइएसआईएल, अन्नुस्रा और बोकोहराम जैसे आतंकवादी गुटों का इस्लाम से कोई लेना –देना है। युरोपीय और अमेरिकी युवा थोड़ा सा विचार करें तो वे इस वास्तविकता को समझ जायेंगे कि जो लोग और आतंकवादी इस्लाम की छवि बिगाड़ कर पेश कर रहे हैं उनका वास्तविक लक्ष्य क्या है।