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    रमज़ानुल मुबारक – 2013 – (13)

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    मनुष्य की शारीरिक प्रणाली में नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना खाना-पीना। सोने की स्थिति में शरीर को विश्राम का समय मिल जाता है। भौतिक रूप से ऊर्जा ख़र्च नहीं होती इस लिये भीतरी टूट फूट को सुधारने और पुनर्निमाण का काम भलीभान्ति होने लगता है। अतः यह स्थिति स्वास्थ्य के लिये अत्यन्त लाभदायक होती है। नींद पूरी न होने की स्थिति में मनुष्य मान्सिक व शारीरिक रूप से निरन्तर थकान का आभास करता रहता है। नींद की कमी दूसरे अंगों के साथ-2 पाचन तन्त्र को भी बहुत प्रभावित करती है।

     

    रमज़ान के पवित्र महीने में कुछ लोगों के लिये नींद एक बड़ी समस्या बन जाती है। ऐसे लोगों को चाहिये कि अपने सोने के समय को इस प्रकार नियोजित करें की उन्हें नींद की कमी न होने पाये। ऐसे लोगों को चाहिये की रोज़ा इफ़तार करने के बाद देर तक न जागें या फिर अगर होसके तो दिन में नींद पूरी करने के लिये कोई समय अवश्य निर्धारित करें।

    नींद की इसी आवश्यकता को देखते हुये ईश्वर ने रोज़े की स्थिति में सोने को बहुत महत्व दिया है, यहां तक कि इसे भी उपासना माना गया है। नींद के शारीरिक आवश्यकता होने और इसके स्वास्थ्य संबंधी लाभों के अतिरिक्त रमज़ान में नींद को एक अन्य दृष्टि से भी देखा जाता है और वह यह है कि नींद की स्थिति में मनुष्य पापों से बचा रहता है, न किसी को दुख पहुंचाता है और न किसी की बुराई करता है।

    साधरण लोगों से जो पाप सबसे अधिक होता है वह ग़ीबत अर्थात पीठ पीछे किसी की बुराई करना या फिर निर्थक हंसी मज़ाक़ करना। अधिकतर लोग इस संबंध में स्वयं को नियंत्रित नहीं करपाते। इस लिये वे लोग जो जागते हुये अपने आप को ज़बान सहित हर प्रकार के पापों से बचा सकते हैं और स्वयं को सकारात्मक कार्यें में लगा सकते हैं, उनको क़ुरआन पढ़ने से लेकर अन्य सभी कार्यों के लिये पुण्य प्राप्त होगा वैसे इस प्रकार के लोगों के लिये भी नींद पूरी करना आवश्यक होता है, जबकि जो लोग स्वयं को नियंत्रित नहीं करपाते उनके लिये सोना, पापों से बचने के लिये बहुत अधिक आवश्यक होता है, और उनके लिये यह एक विशेष ईश्वरीय सहायता है।

    धन्य है वह ईश्वर जो अपने बंदों की सहायता और उन्हें पापों से बचाने के लिये बहाने ढूंढता है। http://hindi.irib.ir/