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    रमज़ानुल मुबारक – 2013 – (14)

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    मनुष्य अपनी पवित्र प्रवृत्ति और स्वस्थ हृदय के साथ सदैव परिपूर्णता और कल्याण के मार्ग पर अग्रसर रहता है किन्तु उसे एक जानी दुश्मन का सामना रहता है जो सदैव षड्यंत्र रचता रहता है ताकि उसे ईश्वर के सही व उच्च मार्ग से रोके रखे। उस समय से जब ईश्वर ने शैतान को हज़रत आदम के सजदे का आदेश दिया और शैतान ने अपने अनुचित व निर्रथक घमंड के कारण सजदे से इन्कार किया था और ईश्वरीय दरबार से निकाल दिया गया तब से उसने ईश्वर के नेक बंदों को बहकाना अपने कार्यक्रम में शामिल कर लिया है। उसने उसी समय ईश्वर से कहा था कि यदि तू ने मुझे प्रलय तक का अवसर दिया तो मैं इनकी संतानों में से कुछ के अतिरिक्त सबको बहकाऊंगा।  इसके उत्तर में ईश्वर ने कहा था कि जा जिस पर भी बस चले अपनी आवाज़ से पथभ्रष्ट कर और अपने सवार और पैदल चेलों से आक्रमण कर दे और उनके माल और संतान में भागीदार बन हो जा और उनसे ख़ूब वादे कर कि शैतान धोखा देने के अतिरिक्त और कोई सच्चा वादा नहीं कर सकता है।

     

    यह बात किसी से छिपी नहीं है कि शैतान सृष्टि के आरंभ से प्रलय तक लोगों के ईमान को भ्रष्ट करने के प्रयास में रहता है या फिर ऐसा काम करता है कि लोगों का ईमान कमज़ोर और फीका पड़ जाए। यदि शैतान ईमान के रास्ते लोगों को बहका नहीं पाता तो वह बुराई का सहारा लेकर अपने काम को अंजाम देता है। यहां पर यह परिणाम निकलता है कि यदि मनुष्य को श्रेष्ठता तक पहुंचाने के मार्ग में फ़रिश्ते उसकी सेवा करते हैं तो शैतान उस राह का लुटेरा है।

     

    लोगों को बहकाने के लिए शैतान कई प्रकार की चालें चलता है और कई प्रकार की जालें बिछाता है। वह अपने कामों को लोगों के सामने ऐसा सजा कर पेश करता है कि मानो उसका दृष्टिगत मार्ग बहुत सही है। जिस प्रकार से लोगों की आस्थाएं व मनोबल भिन्न होते हैं ठीक उसी प्रकार शैतान की चालें भी भिन्न होती हैं। वह समस्त लोगों के लिए एक ही जाल नहीं बिछाता। लोगों को बहकाने व धोखा देने के लिए शैतान जो कार्यवाही करता है वह इस प्रकार हैः वसवसा करना अर्थात चुपके से मन में कोई बात डालना, पापों को सजाकर पेश करना, उसके कर्म को बर्बाद करना, मनुष्य को अपने बस में ऐसा कर लेना कि वह अपने अनिवार्य कार्य भूल जाए, बुराई के लिए उकसाना और हज़ारों ऐसे कार्यक्रम और वादे पेश करना जो कभी भी व्यवहारिक न हों इत्यादि। शैतान अपने इन कामों का औचित्य पेश करने और इसे सही दर्शाने के लिए मनुष्य की ऊंची ऊंची अभिलाषाओं और सांसरिक मायामोह के जाल में उसे फंसाने के लिए प्रयोग करता है। यदि मनुष्य एक क्षण के लिए भी निश्चेत हो गया और शैतान की बुराई से ईश्वरीय शरण में नहीं गया तो वह अवश्य शैतान की जाल में फंस जाएगा और स्वयं को बर्बाद कर लेगा।

     

    शैतान की चालें विभिन्न होती हैं। इस कार्यक्रम में हम शैतान की कुछ चालों की ओर संकेत करेंगे। पवित्र क़ुरआन में बताया गया है कि लोगों को बहकाने के लिए शैतान जो षड्यंत्र रचता है उसमें महत्त्वपूर्ण बहकावा है। ईश्वर सूरए नास में कहता है कि हे पैग़म्बर कह दिजिए कि मैं इन्सानों के ईश्वर का शरण चाहता हूं उस शैतानी बहकावे से जो लोगों के दिलों में वसवसे पैदा करता है।

    वसवसे का अर्थ होता है चुपके से कोई बात कहना। इस प्रकार से बुरे विचार जो मनुष्य के मन में चलते हैं उसे वसवसा अर्थात बहकावा कहा जाता है। मानो चुपके से शैतान लोगों को अपनी ओर निमंत्रण देता है। शैतान का पहला काम बहकाना है और यही सब शैतानी षड्यंत्रों की जड़ है। यही वह काम है जो शैतान ने हज़रत आदम व हव्वा के संदर्भ में किया था और उन्हें प्रतिबंधित पेड़ का फल खाने के लिए उकसाया और उनके स्वर्ग से निकलने का कारण बना।

     

    इन सब बातों के बावजूद मनुष्य की पवित्र प्रवृत्ति के दृष्टिगत ईश्वर ने अपने बंदों को शुभसूचना दी है कि यदि वह पाप करें फिर भी ईश्वर के दरबार में आकर अपने पापों की क्षमा मांगें। सूरए आले इमरान की आयत संख्या 135 में हम पढ़ते हैः वह लोग वह हैं कि जब कोई पाप करते हैं या स्वयं पर अत्याचार करते हैं तो ईश्वर को याद करके अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं और ईश्वर के अतिरिक्त पापों को क्षमा करने वाला कौन है और वह अपने किए पर जानबूझ पर बल नहीं देते।

     

    जब यह आयत उतरी तो शैतान चिंतित व परेशान हो गया वह मक्के के एक पर्वत पर चढ़ा और ऊंची आवाज में अपने चेलों को बुलाया। शैतान के चेले चापड़ उसके पास एकत्रित हो गये और उसके क्रोधित होने और उन्हें बुलाने का कारण पूछा। शैतान ने कहा कि ईश्वर ने पैग़म्बर पर एक आयत उतारी है जिसमें प्रायश्चित के माध्यम से पापी लोगों के पापों को क्षमा करने का वादा किया गया है। इसका परिणाम यह हुआ कि अब हमारे सारे प्रयास बेकार हो जाएंगे। मैंने तुम लोगों को इस लिए यहां बुलाया है ताकि इस विषय का उपाय खोजा जाए। शैतान के चेलों में से एक ने कहा कि विभिन्न पापों की ओर लोगों को निमंत्रण देकर इस आयत के प्रभाव को निष्क्रिय किया जा सकता है। इबलीस ने कहा कि हम इस काम में पूरी तरह सफल नहीं हो सकेंगे। शैतान के समस्त चेलों ने जो भी सुझाव दिया शैतान ने उन सब को रद्द कर दिया। जब शैतान के चेले चापड़ किसी परिणाम पर नहीं पहुंचे तब एक बुड्ढा शैतान जिसका नाम ख़न्नास था उठा और कहने लगा कि इस समस्या का समाधान मेरे पास है। शैतान ने कहाः क्या है?

     

    ख़न्नास ने कहा कि मनुष्यों को ऊंचे ऊंचे वादों और लंबी लंबी अभिलाषाओं में ग्रस्त करके पाप में ग्रस्त करूंगा और प्रायश्चित, तौबा और ईश्वर की याद को उनके मन से मिटा दूंगा। शैतान ख़ुशी से झूम उठा और उसने अपने श्रेष्ठ चेले ख़न्नास को गले लगाया और उसका माथा चूम कर कहने लगा कि प्रलय तक यह दायित्व मैं तुम्हें सौंपता हूं।

     

    लोगों को बहकाने में शैतान अनेक हथकंडों का प्रयोग करता है। लोग जिस प्रवृत्ति के होते हैं उनको बहकाने में शैतान उसी प्रकार के हथकंडों का प्रयोग करता है। उदाहरण स्वरूप एक धार्मिक व्यक्ति को बहकाने के लिए शैतान कभी मधुशाला का रूख़ नहीं करता क्योंकि उसे मालूम है कि यह धार्मिक व्यक्ति कभी भी शराब को हाथ नहीं लगाएगा, ऐसे लोगों को बहकाने के लिए शैतान धार्मिक स्थलों का रूख़ करता है और उसके मन में यह बात डालने का प्रयास करता है कि जितनी उपासना तुम करते हो संसार का कोई भी व्यक्ति नहीं करता या तुम ईश्वर के बहुत निकटवर्ती बंदे हो या स्वर्ग में जाने के लिए जितनी उपासना में तुमने की है वह पर्याप्त है इत्यादि।

     

    हमको शत्रु के षड्यंत्रों को पहचानना चाहिए ताकि उसकी जाल में न फंसने पायें। हज़रत इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम कहते हैं कि जिसने भी नेक काम अंजाम देने की नीयत की हो उसे चाहिए कि उसे अंजाम देने में जल्दी करे क्योंकि हर काम जिसमें विलंब होता है उससे हटाने के लिए शैतान सोच विचार करने लगता है। शैतान हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से स्वयं स्वीकार करते हुए कहता है कि जब भी को बंदा दान देने का फ़ैसला करता है और जैसे ही दान देने का निर्णय करता है, मैं स्वयं सक्रिय हो जाता हूं और उसके और दान के बीच रुकावट उत्पन्न कर देता हूं।

     

    अलबत्ता यद्यपि कोई सर्वसमर्थ और अनन्य ईश्वर को अपना अभिभावक समझता है और उस पर भरोसा करता है तो वह शैतान की चाल से सुरक्षित रहेगा किंतु जो भी शैतान को अपना अभिभावक बनाता है और उसे चाहता है तो उसे लोक परलोक दोनों में अपरिहार्य घाटा उठाना पड़ेगा, क्योंकि शैतान उससे झूठे वादे करता है और उसे कभी न पूरी होने वाली अभिलाओं के समुद्र में डुबा देता है ताकि ईश्वरीय परिपूर्णता और ईश्वरीय उपासना के मुख्य लक्ष्य तक उसे पहुंचने न दे। उदाहरण स्वरूप जब कोई व्यक्ति किसी भौतिक चीज़ की कामना करता है और मन में उसका चित्र बनाता है, उसकी अधिकतर अभिलाषाएं और कामनाएं मृगतृष्णा होती हैं तो इसका परिणाम यह होता है कि उसके मन में बना चित्र भी वही रूप धारण कर लेता है। शैतान कभी न पूरी होने वाली कामनाओं और अभिलाषाओं के चित्रण में भारी दक्षता रखता है, यही हाल समाज में उच्च स्थान प्राप्त करने और भौतिक संभावनाओं से संपन्न होने की कामना इत्यादि का भी है। सूरए निसा की आयत क्रमांक 119 से 121 तक में हम पढ़ते हैं कि और जो ईश्वर को छोड़कर शैतान को अपना अभिभावक बनाएगा वह खुले घाटे में रहेगा। शैतान उनसे वादा करता है और उन्हें आशाएं दिलाता है और वह जो भी वादा करता है वह धोखे के अतिरिक्त कुछ नहीं है। यही वह लोग हैं जिनका ठिकाना नरक है और वह इससे छुटकारा नहीं पा सकते।

     

    लोगों को बहकाने में शैतान जिन हथकंडों का प्रयोग करता है उसमें सर्वोपरि लोगों के बुरे काम को सजा कर उनके सामने पेश करना है अर्थात शैतान आंतरिक इच्छाओं से लाभ उठाते हुए बुरे कर्मों को सजा का उसके सामने पेश करता है और हर बुरे काम को अच्छा बनाकर पेश करता है और हर नैतिक कार्य को बुरा बनाकर पेश करता है।

     

    लोगों को बहकाने के लिए शैतान जो काम करता है उसमें बुराई की ओर निमंत्रण देना भी है। नरक में जैसे ही इस प्रकार के लोग झोंके जाएंगे और वह देखेंगे कि वह नरक में हैं तो एक दूसरे से बहस भी करेंगे और कहेंगे कि तुम्हारे कारण मेरा यह हाल हुआ है। तभी सब लोग एक साथ कहेंगे कि यह शैतान की करास्तानी है और सारा दोष शैतान के सिर मढ़ देंगे किन्तु शैतान उनसे कहेगा कि मेरा तुम्हारे ऊपर कोई ज़ोर नहीं था सिवाए इसके कि मैंने तुम्हें निमंत्रण दिया और तुमने उसे स्वीकार कर लिया तो तुम मुझे बुरा न कहो बल्कि स्वयं को बुरा कहो।

     

    जब से इस संसार की रचना हुई है शैतान का मनुष्य से खिलवाड़ जारी है और ऐसा क्रम है जो कभी भी समाप्त नहीं होता। पवित्र क़ुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पत्रों के कथन शैतान के गुप्त और विदित षड्यंत्रों से पर्दा उठाते हैं। धार्मिक स्रोतों की ओर तनिक भी ध्यान देने से हम सबको शैतान और उसके चेले चापड़ों की पहचान हो जाती है। शैतान मनुष्य के कल्याण का शत्रु है इसीलिए वह मनुष्य के मार्ग में जाल बिछाकर उसे धोखा देता है । http://hindi.irib.ir/