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    राजा का दुःस्वप्न-2

    राजा का दुःस्वप्न-2
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    प्राचीन समय में दूर स्थान पर हिलार नाम का एक राजा रहता था। उसने एक स्वप्न देखा परंतु महल में रहने वाले पंडितों व ब्राह्मणों ने राजा से शत्रुता के कारण उसके स्वप्न की व्याख्या अपनी इच्छानुसार किया और उसे अधिक डरा दिया। दरबार में रहने वाले ब्राह्मणों ने कहा कि स्वप्न को व्यवहारिक होने से बचाने का कि जिसमें उसकी सरकार का अंत था, एकमात्र मार्ग यह था कि वह अपने एकमात्र बेटे, पत्नी, मंत्री और प्रिय घोड़े की हत्या अपने हाथ से करे। हिलार बहुत बुरी स्थिति में था वह बहुत दुःखी था। हिलार के पास बिलार नाम का जो मंत्री था वह राजा पर नज़र रखे हुए था। बिलार समझ गया कि राजा क्षुब्ध व दुःखी है परंतु वह इसका कारण पूछने का साहस नहीं जुटा पा रहा था। इसके बाद वह राजा की पत्नी ईरानदुख़्त के पास गया। रानी ने अपने पास मंत्री के आने पर आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा” बिलार क्या बात है, तुम इतना परेशान क्यों दिख रहे हो? मेरे पास क्यों आये हो? मंत्री बिलार ने कहा” महारानी राजा एक दो दिन से बहुत दुःखी व परेशान हैं अब तक मैंने उन्हें इस तरह परेशान नहीं देखा था। कोई घटना घटी है? क्या मैं कुछ कर सकता हूं? ईरानदुख़्त ने कहा तुम जो कुछ कह रहे हो उसकी मुझे बिल्कुल सूचना नही हैं। दो दिन से मैंने राजा को देखा ही नहीं। मंत्री ने रानी से कहा कि वह राजा के पास जायें और उनके दुःखी होने का कारण पूछें। रानी ने मंत्री की बात स्वीकार कर ली और वह राजा हिलार के पास आयी। ईरानदुख़्त ने राजा की नज़रों को ध्यान से देखा। उसने अब तक राजा को इतना दुःखी कभी नहीं देखा था। ईरानदुख़्त  ने कहा हे मेरे पति क्या बात है? आप क्यों इतना दुःखी और स्वयं में खोये हुए हैं? इस पर राजा हिलार ने कहा हे मेरी प्रियतम, इसे मत पूछो। मेरी अच्छी और त्यागी पत्नी तुम इसे मत पूछो। यदि और एक शब्द भी पूछोगी तो मैं बच्चे की तरह चिल्ला चिल्लाकर रोऊंगा। कहने से क्या लाभ होगा जब उसके सुनने से दुःखी हो जाओगी? इस पर ईरानदुख़्त ने कहा मैं तुम्हारी पत्नी हूं मुझसे अपने दिल की बात कहो मुझसे नहीं कहोगे तो किससे कहोगे तुम्हारा दुःख मेरा दुःख है शायद मैं तुम्हारी पीड़ा को दूर कर सकती हूं अगर तुम अपने दिल की बात मुझसे बता दोगे तो उसका सहन करना सरल हो जायेगा। इस पर राजा हिलार ने कहा मैंने एक स्वप्न देखा है जिसने मुझे परेशान कर रखा है। मैंने जो डरावना स्वप्न देखा है और जब से दरबार के पंडितों ने मेरे लिए उसकी व्याख्या की है तब से मेरी दुनिया अंधेरी हो गयी है। इस पर रानी ने कहा आखिर पंडितों ने क्या कह दिया है?

    राजा ने कहा मैंने स्वप्न में जो ख़ून देखा है वह मेरी सरकार के पतन का सूचक है और राजशाही की सुरक्षा का एकमात्र मार्ग यह है कि मैं अपनी अच्छी व त्यागी पत्नी, बेटे और मंत्री की हत्या कर दूं, वह भी अपने हाथ से। यदि मैं ऐसा करता हूं तो मुझे इस बुरे स्वप्न से मुक्ति मिल जायेगी अन्यथा मुझ पर बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली है। इसके बाद उसने फूट फूट कर रोना आरंभ कर दिया। ईरानदुख़्त ने अपने राजा पति की बात सुनी। उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह डरे या उसके साथ सहानुभूति जताये परंतु धीरे-धीरे उसने स्वयं पर नियंत्रण किया और कहा आपके रोने से मेरा हृदय फटा जा रहा है। अगर राजा और उनकी सत्ता की भलाई मेरी हत्या किये जाने में है तो मैं अपनी हत्या कराने के लिए तैयार हूं पंरतु इस बात को नहीं भूलना चाहिये कि दरबार के पंडितों को आपसे द्वेष है वास्तव में वे आपके शत्रु हैं। मेरा सुझाव है कि आप केवल उनकी बातों पर संतोष मत कीजिये और महान हकीम से भी अपने स्वप्न की व्याख्या पूछ लीजिये। राजा ने ईरानदुख़्त की बात स्वीकार कर ली और कहा तुम्हारी बातें सही और बिल्कुल वास्तविक हैं यह बात क्यों मेरी समझ में नहीं आई? ईश्वर का धन्यवाद कि उसने तुम जैसी समझदार धर्मपत्नी मुझे दिया है। महान हकीम उन लोगों में से हैं जिन पर मैं विश्वास और भरोसा करता हूं। मेरे घोड़े को तैयार करने का आदेश दो, मैं हकीम के पास अवश्य जाऊंगा। ईरानदुख़्त ख़ुशी से राजा के पास से चली गयी ताकि उसके आदेश का पालन करे। राजा अपने घोड़े से महान हकीम के घर पहुंचा। महान हकीम ने, जो राजा को अपने घर देखकर अचम्भित हो गया था, सलाम करने के बाद राजा से कहा आप आदेश करते तो मैं स्वयं आपकी सेवा में उपस्थित हो जाता। क्या बात हुई कि महाराजा मेरे घर पधारे? इस पर राजा ने कहा मैंने एक स्वप्न देखा है जिसने कई दिनों से मुझे परेशान कर रखा है। महान हकीम ने राजा से कहा कि आप अपना स्वप्न बयान कीजिये। राजा हिलार ने कहा मैंने स्वप्न में डरावनी आवाज़ें सुनी हैं जिनके भय से मैं नींद से उठ गया। मैं दोबारा सोया तो फिर वही आवाज़ सुनी। राजा ने स्वप्न में जो कुछ देखा था उसे महान हकीम के समक्ष बयान कर दिया। जब राजा की बात समाप्त हो गयी तो महान हकीम मुस्कराया और बोला राजा सुरक्षित व स्वस्थ रहें। आपने जो बताया है उससे तो यही लगता है कि चिंता करने की बिल्कुल बात नहीं है और यदि उसकी व्याख्या बुरी सुनी है तो वह सब झूठ है। इस पर राजा ने कहा सही कह रहे हो? तुमने मुझे बहुत प्रसन्न कर दिया यानी मुझे कोई ख़तरा नहीं है और मेरी सत्ता का पतन झूठी बात है। महान हकीम ने कहा जी! महाराज ऐसा ही है। इसके बाद राजा ने महान हकीम से कहा तो अब बताओ कि मेरे स्वप्न का क्या मतलब है, उसकी व्याख्या क्या है? महान हकीम ने कहा आपने स्वप्न में जो दो लाल मछलियां देखी हैं और वे अपनी पूंछ के बल खड़ी थीं वे दूसरे स्थान से भेजे जाने वाले दो व्यक्ति हैं जो अपने साथ बड़े-बड़े बहुत सारे लाल मणि लेकर आएंगे और आपके सम्मान में आपके समक्ष खड़े रहेंगे और वे दो पक्षी जो आपके पांव के सामने उतरे हैं वे दो घोड़े हैं जो बल्ख़ के राजा की ओर से आपको उपहार स्वरुप प्रदान किये जायेंगे और आपने उनके किनारे जो दो सांप देखे हैं वे लम्बी-लम्बी तलवारें हैं जो बल्ख़ के राजा की ओर से आपको उपहार में भेंट की जायेंगी पंरतु आपने जो ख़ून देखा है कि उसने आपके पूरे शरीर को ढक रखा है वह वस्त्र है जो किसी राजा की ओर से आपको भेजा जायेगा और उस वस्त्र में इतने हीरे-मोती लगे होंगे कि रात के अंधरे में भी वह चमकेगा और वह ऊंट, जो आपने स्वप्न में देखा है, बड़ा सफ़ेद हाथी है जो किसी देश का राजा आपको उपहार स्वरुप प्रदान करेगा और वह आग जो स्वप्न में आपके सिर पर जल रही थी वह सोने का मुकुट है जो चाड का राजा आपको भेजेगा और अंत में जो आपने स्वप्न में यह देखा है कि एक पक्षी आपके सिर पर नोक मार रहा है उसकी व्याख्या अधिक अच्छी नहीं है और समय आने पर आप उसके रहस्य से अवगत हो जायेंगे। अलबत्ता चिंता करने की कोई बात नहीं है और सब कुछ ठीक-ठाक समाप्त हो जायेगा। इसके बाद राजा ने महान हकीम से पूछा कि वह सात आवाज़ क्या थी जिसे हमने स्वप्न में देखा है? महान हकीम ने कहा उन सात आवाज़ों का अर्थ यह है कि जो लोग भेजे जायेंगे वे अपने उपहारों को सात बार में आपकी सेवा में भेंट करेंगे। यह आपके डरावने स्वप्नों की व्याख्यायें हैं। आपने देखा कि चिंता और परेशान होने की कोई बात नहीं है और किसी की हत्या करने की भी कोई आवश्यकता नहीं है। राजा को विश्वास ही नहीं आ रहा था कि सारी चीज़ें एक ही बार में परिवर्तित हो जायेंगी। वह बहुत ही प्रसन्न होकर महल लौट आया। महान हकीम से भेंट किये हुए कुछ ही दिन गुज़रे थे कि महान हकीम ने जो कहा था कि उसमें से सातवें दिन राजा के लिए एक घटना घटी। दूसरे देशों से भेजे हुए व्यक्ति राजा के पास आये और उन्होंने सात बार राजा की सेवा में अपनी भेंट पेश की। राजा ने अपने महल को सजाया और वह सुन्दर वस्त्र धारण करके सिंहासन पर बैठ गया तथा उसने मेहमानों की आवभगत की। उपहारों को देखने के बाद उसने ख़ुशी से मुस्कान भरी और फिर उसे कोई दुःख नहीं हुआ। दरबार के पंडितों ने उसके स्वप्न के बारे में क्या कहा था वह सब कुछ भूल गया। पंडितों के कहने के विपरीत राजा की प्रसन्नता में दिन प्रतिदिन वृद्धि होती जा रही थी और राजा इस कारण महान ईश्वर का धन्यवाद करता था। सभी राजा के साथ थे। उसकी सुन्दर पत्नी ईरानदुख़्त, उसका छोटा बेटा और मंत्री सब सही सालिम एक कमरे में उपस्थित थे। कितना अच्छा और अविस्मरणीय दिन था। उस दिन की याद सदैव उनके दिलों में बाक़ी रहेगी। राजा ने बड़ी खुशी से अपने आप-पास के लोगों को देखा और कहा आज हम ईश्वर की कृपा से बहुत प्रसन्न हैं और बहुत सारे उपहार हमें भेंट किये गये हैं। मैं नहीं चाहता कि उन्हें राजकोष में रखवा दूं। कितना अच्छा होगा कि इन उपहारों को आप लोगों के मध्य बांट दूं। (जारी है)  (http://hindi.irib.ir)