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    रियासत-ए-इस्राईल की हक़ीक़त -3

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    सैहूनियों का आतंकवाद:

    सैहूनियों ने बैतुल-मुक़द्दस में किंग-डेविड होटल उड़ा दिया जिसमें 91 आदमी मारे गए और बहुत-से घायल हुए उनमें बरतानवी सैनिक, फ़िलिस्तीनी मुसलमान, ईसाई और कुछ यहूदी शामिल थे। यह दुनिया में पहला बारूदी आतंकवाद था। बरतानवी हुकूमत पहले ही मज़ीद यहूदियों को फ़िलिस्तीन में बसाने के अमरीकी दबाव से परेशान थी। बरतानवी सैनिकों की हलाकत के कारण बरतानिया के अंदर हुकूमत पर फ़िलिस्तीन से सेनाएं निकालने का दबाव पड़ने लगा। चुनांचे बरतानिया ने घोषणा कर दी कि वह फ़िलिस्तीन में अपनी हुकूमत 15 मई1947 ईसवी को ख़त्म कर देगा।

    सैहूनियों ने, जिनके लीडर प्रसिद्ध आतंकवादी थे, फ़िलिस्तीनियों पर आक्रमण और उनका क़त्ल तो पहले ही शुरु कर दिया था, लेकिन 1948 ईसवी में अचानक फ़िलिस्तीन के मुसलमानों पर बड़े पैमाने पर अस्करी कमांडो हमले करके यहूदियों ने बैतुल-मुक़द्दस के पश्चिमी भाग और कुछ दूसरे इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर लिया और यह सिलसिला जारी रहा। अमरीका सैहूनियों की पुश्त-पनाह पर था और उनको आर्थिक और सैन्य सहायता मुहय्या करा रहा था। इस तरह रूस,यूरोप और विशेषत: अमरीका की मदद से यहूदियों ने अपनी दो हज़ार साल पुरानी आरज़ू ’यहूदी रियासत इस्राईल’ का 14 मई 1948 ईसवी को 4 बजे बाद दोपहर ऐलान कर दिया और मुस्लिम अरबों की ज़मीनों पर ज़बर्दस्ती क़ब्ज़ा करके इस्राईली रियासत बना ली।

    वास्तव में यह सैहूनी रियासत थी क्योंकि कई यहूदी मज़हबी पेशवाओं ने इसका विरोध किया। अगले दिन बरतानिया के बक़िया फ़ौजी भी अपनी छावनियां सैहूनियों के हवाले कर के चले गए। इसके बाद मारधाड़ रोज़ का मामूल बन गया। सैहूनी हथियारबंद दस्ते मुसलमान अरबों की इम्लाक पर क़ब्ज़ा करते चले गए क्योंकि वो आतंकवादी-संगठनों के तरबियत-याफ़्ता कमांडो थे और उन्हें अमरीका और बरतानिया की सहायता भी प्राप्त थी। यहूदियों के आतंकवादी संगठनों के नाम बदलते रहे क्यों कि वो यूरोप में भी दहशतगर्दी करते रहे और आतंकवादी ठहराए भी जाते रहे। मशहूर नाम ये हैं: हागाना ओर्दे विंगेट, अर्गोन, लेही, लेकोड, हेरोत, मालीदत।