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    रियासत-ए-इस्राईल की हक़ीक़त -4

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    चंद मशहूर आतंकवादी लीडरों के नाम ये हैं:

    मोशे दायान, जो 1953 ईसवी से 1957 ईसवी तक इस्राईल की मुसल्लह अफ़वाज का चीफ़-ऑफ़-स्टाफ़ रहा। मनाख़म बेगन, जो 1977 ईसवी में इस्राईल का प्रधानमंत्री बना। तेज़क हाक शमीर, जो 1983 ईसवी में प्रधानमंत्री बना। एरियल शेरोन, जो मौजूदा प्रधानमंत्री है। मोशे दायान को आतंकवादी होने के बावजूद बरतानवी सेना में किसी ख़ास काम के लिये कु्छ अरसे के लिये भरती किया गया था। वह बरतानवी फ़ौज की मुलाज़िमत छोड़कर फिर सैहूनी आतंकवादी संगठन में शामिल हुआ और उसका कमांडर बन गया। अरबों की इमलाक पर क़ब्ज़ा करने के लिये जो हमले किये जाते रहे उनका कमांडर मोशे दायान ही था। इन आतंकवादी संगठनों ने न सिर्फ़ वो इलाक़े ज़बर्दस्ती क़ब्ज़े में लिये जो यू.ऐन.ओ. यहूदियों को देना चाहती थी, बल्कि उन इलाक़ों पर भी क़ब्ज़ा कर लिया जो यू.ऐन.ओ. के अनुसार फ़िलिस्तीनियों के थे। क़ब्ज़े के दौरान जो फ़िलिस्तीनी मुसलमान नज़र आता, उसे क़त्ल कर दिया जाता। मनाख़म बेगन इस आतंकवादी गिरोह का सरबराह था जिसने बैतुल-मुक़द्दस में किंग डेविड होटल उड़ाया था । साबिरा और शतीला को घेरे में लेकर वहां रह रहे चार हज़ार निहत्थे फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों को क़त्ल करने का हुक्म देने वाला एरियल शेरोन ही था जो उन दिनों इस्राईल का वज़ीर-ए-दिफ़ा था।