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    लोमड़ी और चक्कीबान – 2

    लोमड़ी और चक्कीबान – 2
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    हमने बताया था कि एक लोमड़ी आटे की चक्की पर चोरी करते पकड़ी गयी और जब उसने अपनी जान खतरे में देखी तो चक्की के मालिक से कहा कि यदि वह उसे छोड़ दे तो वह अपनी गलती सुधारेगी और उसका भला करेगी। लोमड़ी ने योजना बनायी और चक्की के मालिक को राजा की बेटी का रिश्ता मांगने के लिए राजमहल की ओर ले गयी। मार्ग में लोमड़ी ने योजना अनुसार चक्की के मालिक के कपड़े और पुराने सामान को नदी में फेंक दिया और राजा के पास जाकर कहा कि उसके स्वामी के पास ढेंरो उपहार और मूल्यवान सामान थे जो वह राजा के पास ला रहा था किंतु रास्ते में नदी में सब कुछ बह गया। राजा ने लोमड़ी को उसके मालिक के लिए शाही वस्त्र दिया और लोमड़ी ने चक्की के मालिक को वह कपड़े लाकर दिये और जब चक्की का मालिक उसे पहन कर दरबार की ओर बढ़ा तो लोमड़ी ने उसे समझाया कि दरबार में घुसने के बाद इधर उधर मत देखना और सीधे राजा के बगल में जाकर बैठ जाना। लोमड़ी ने चक्की के मालिक के लिए तूज़ली बेग का नाम चुना था। लोमड़ी और तूज़ली बेग दरबार की ओर जाने के लिए निकल पड़े। और अब आगे की कहानीः

    तूज़ली बेग और उसके पीछे पीछे लोमड़ी दरबार में पहुंची। घुसते ही लोमड़ी ने सलाम किया किंतु तूज़ली बेग लोमड़ी की बातें भूल चुका था वह आंखे फाड़ फाड़ कर इधर उधर देखने लगा।

    राजा ने लोमड़ी से कहाः लगता है तुम्हारे स्वामी ने कभी कुछ देखा सुना नहीं है। लोमड़ी ने तुरंत उत्तर दियाः जय हो महाराज की! आप मेरे स्वामी की भाषा नहीं समझते।

    राजा ने पूछा क्यों वह क्या कह रहे हैं?

    लोमड़ी ने कहा कि वे इधर उधर देख कर यह कह रहे हैं कि मेरे भी कैसे दिन आ गये हैं कि इतनी धन दौलत होने के बावजूद मुझे राजा के दिये यह फटे पुराने कपड़े पहनने पड़ रहे हैं। राजा को बड़ा गुस्सा आया किंतु वह अपना गुस्सा पी गया। उसने तूज़ली के लिए नये कपड़े तैयार करने और महल में रहने की अच्छी व्यवस्था करने का आदेश दिया।

     

    इसी प्रकार से कुछ दिन बीत गये। एक दिन लोमड़ी राजा के पास गयी और उससे कहने लगीः महाराज की जय हो हम यहां खाने और सोने के लिए तो नहीं आए हैं। मेरे स्वामी की धन व दौलत और कारवां जंगल में है। हमें वहां जाकर उनकी कुछ व्यवस्था करना है। हम यहां राजकुमारी का रिश्ता लेकर आए हैं। अब अगर आप को स्वीकार है तो बताएं अस्वीकार है तो भी बता दें।

    राजा सोच में पड़ गया और उसे चुप देख कर लोमड़ी ने कहा कि मौन, स्वीकृति का चिन्ह है। बहर हाल राजा ने अपनी बेटी की शादी तूज़ली बेग से कर दी और चालीस दास, चालीस दासियां, चालीस ऊंट, चालीस खच्चर और चालीस घोड़े भांति भांति के सामानों के साथ अपनी बेटी को दहेज में दिया और यह पूरी बारात दुल्हन के साथ चल पड़ी। चक्की वाले की हालत खराब थी।

    अवसर देख कर उसने लोमड़ी से कहा  यह तुमने मुझे किस चक्कर में फंसा दिया अब यह सब कुछ लेकर मैं कहा जाऊं? इन्हें अपनी टूटी फूटी चक्की की इमारत में तो नहीं ले सकता। लोमड़ी ने कहा ठहरो मैं जाकर सूचना देती हूं ताकि महल के कमरे सजा दिये जाएं। यह कह कर लोमड़ी अकेली ही एक पहाड़ की चोटी की ओर चल पड़ी जिस पर सात हाथी एक अत्यन्त शानदार महल में रहते थे।

    लोमड़ी हाथियों के पास पहुंचा और हाल चाल पूछने के बाद कहने लगीः  यह जो धूल उड़ रही है उसे देख रहे हो? हाथियों ने कहा हां देख रहे हैं। लोमड़ी ने कहा, राजकुमारी पागल हो गयी है और शाही हकीम ने बताया है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है सिवाए यह कि लड़की की शरीर पर हाथी की चर्बी से मालिश की जाए। अब आप लोग जैसा समझें, मुझे तो आप लोगों पर तरस आ रहा है। बेहतर है आप लोग यहां से निकल जाएं । आप लोग चाहे जितने शक्तिशाली हों किंतु राजा की सेना का मुकाबला नहीं कर पाएंगे। हाथी लोमड़ी की बात सुन कर सिर पर पैर रख कर भाग खड़े हुए और लोमड़ी ने महल को सजा दिया।

     

    तूज़ली बेग अपनी पत्नी दास और दासियों के साथ महल में आया और महल का वैभव देख कर सब ने दांतों तले उंगली दबा ली और तूजली बेग चैन से राजकुमारी के साथ महल में रहने लगा। ऐसे ही दिन गुज़रते गये यहां तक कि एक दिन लोमड़ी चक्की वाले के पास गयी और कहने लगी कि मेरी भलाई तो तूने देख ली अब जरा यह बताओ कि यदि मैं मर गयी तो तुम मेरा अंतिम संस्कार कैसे कराओगे?

    चक्की वाले ने कहाः तुम्हारे चित्र को हीरे मोतियों से बने फ्रेम में सजाऊंगा और अत्यन्त सम्मान व वैभव के साथ तुम्हारा अंतिम संस्कार कराऊंगा। यह सुन कर लोमड़ी उसके पास से चली गयी।

    कुछ दिनों बाद अचानक लोमड़ी ने चक्की के मालिक की परीक्षा लेनी चाही और ज़मीन पर गिर कर ऐसा प्रकट किया मानो वह मर चुकी हो। चक्की वाले को सूचना दी गयी और वह जब लोमड़ी के निकट पहुंचा तो उसने एक लात उसे मारा, पैर से इधर उधर लुढ़काया और जब उसे विश्वास हो गया कि लोमड़ी सचमुच मर चुकी है उसने अपने एक दास को बुलाया और कहाः इसकी पूंछ पकड़ कर किसी खांई में फेंक दो।

    लोमड़ी उठ बैठी और कहने लगी धोखेबाज़ चक्की वाले! मैने तुझे कहां से कहां पहुंचा दिया लेकिन तू मुझे पूछं पकड़ कर खाईं में फेंकने की बात कर रहा है ?

    मैं अभी जाकर हाथियों को बुला कर लाती हूं। लोमड़ी की सारी बातें राजकुमारी ने सुन ली। उसने दो हत्थड़ लगाए और कहने लगीः हाय मैं बर्बाद हो गयी। यह तो एक गरीब चक्की वाला है। यह स्थिति देख कर चक्की वाले के होश उड़ गये और वह लोमड़ी के सामने गिड़गिड़ाने लगा। लोमड़ी ने कहा चलो इस बार माफ कर देती हूं।

    राजा की बेटी चीखने चिल्लाने लगी तो लोमड़ी ने भी चीख कर कहाः अरे चरवाहे की बेटी, इतना हंगामा क्यों है? क्या चक्की वाला इन्सान नहीं है? तू तो खुद चरवाहे की बेटी है तो फिर यह हंगामा क्यों? यह सुन कर राजा की बेटी चुप हो गयी। कुछ दिन और बीते तो लोमड़ी ने फिर चक्की वाले की परीक्षा लेने का मन बनाया और जमीन पर गिर कर बेसुध हो गयी। चक्की का मालिक डरते कांपते उसके पास पहुंचा और उसे हिलाया डुलाया किंतु कुछ नहीं हुआ कुछ समय तक वह लोमड़ी को देखता रहा और फिर उसे विश्वास हो गया कि इस बार सचमुच यह मर चुकी है। उसने दास को बुलाया और कहा कि जा उसे किसी जगह ले जा कर गाड़ दे नहीं दो इसकी दुर्गंध फैल जाएगी।

    यह सुन कर लोमड़ी खड़ी हो गयी और उसे गाली देते हुए कहा कि बस अब इस बार  माफी की कोई गुंजाइश नहीं है। अब तैयार हो जा और हाथियों को लेकर आ रही हूं। चक्की वाले ने बहुत हाथ पैर जोड़े लेकिन लोमड़ी का ह्रदय पिघला नहीं और वह हाथियों के पास चली गयी। उसने हाथियों को बहुत खोजा यहां तक कि वह उसे एक घाटी में मिल गये।      लोमड़ी ने हाथियों से कहा कहते हैं मोटे लोगों की बुद्धि उनके पैर में होती है। मैंने यूं ही एक बात कह दी थी तुम लोगों ने भी उस पर विश्वास कर लिया और सब कुछ छोड़ कर भाग खड़े हुए। वह चक्की का मालिक राजकुमारी से ब्याह करके तुम्हारे महले में मज़े कर रहा है और तुम लोग जंगल व पहाड़ों में भटक रहे हो। हाथियों ने आपस में सलाह की और कहा कि यह लोमड़ी बड़ी धूर्त है कहीं यह हमें फंसा न दे। इस लिए अच्छा होगा कि हम में से कोई एक पहले जाए और लोमड़ी के पैर को रस्सी से अपने पैरों में बांध ले ताकि किसी प्रकार के धोखे की संभावना न रहे। हाथियों ने ऐसा ही किया और एक हाथी, लोमड़ी का पैर अपने पैर में बांध कर महल की ओर रवाना हो गया।

    उधर चक्की वाले ने जब यह स्थिति देखी तो उसे लगा कि अब उसका अंतिम समय निकट है और यह हाथी उसेअपने पैंरों तले रौंद देगा वह बड़ी तेज़ी से कोई तरकीब सोचने लगा तभी उसे एक तरकीब सूझी और उसने सोचा अब जब मरना है तो इसे आज़माने में क्या समस्या है। जैसे ही दोनों चक्की वाले के निकट पहुंचे चक्की वाले ने चीख कर और अत्यन्त क्रोध में कहाः

    हे धूर्त लोमड़ी! तेरे पिता ने मुझे से सात हाथी उधार लिए थे तू केवल एक लेकर आया है ? अगर छे और नहीं लाए तो तेरी खाल खिंचवा कर भूसा भरवा दूंगा। हाथी ने जो यह सुना तो उसके होश उड़ गये और वह सिर पर पैर रख कर भाग खड़ा हुआ। उसके पैरों से बंधी लोमड़ी टुकड़े टुकड़े हो गयी। हाथी हाफंते कांपते अपने मित्रों के पास आया और कहने लगा यह लोमड़ी तो हमें मरवा देना चाह रही थी वह  हम बच गये। लोमड़ी के बाप ने राजा से सात हाथी उधार लिये थे अच्छा हुआ जो हम सब नहीं गये नहीं तो अनर्थ हो जाता। इस तरह से लोमड़ी मर गयी और चक्की का मालिक ठाठ बाट से रहने लगा।