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    लोमड़ी और तूज़ली बेग

    लोमड़ी और तूज़ली बेग
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    कहानियां मौखिक साहित्य का महत्वपूर्ण व लोकप्रिय भाग हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौखिक साहित्य किसी भी देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हो सकती है और इस से देश की संस्कृति समृद्ध होती है। ईरान शताब्दियों के दौरान बहुत सी जातियों के मार्ग में आया है और समृद्ध लोक संस्कृति का स्वामी है। ईरान में लोक साहित्य के विभिन्न रूप हैं और यह बड़े सौभाग्य की बात है कि इस लोक साहित्य के एक भाग को लिख भी लिया गया है।

    ईरान के मौखिक साहित्य में मतल का विशेष स्थान है। मतल उस लघु कथा को कहते हैं जिसमें हल्के फुल्के विषयों को कभी गद्य और कभी पद्य के रूप में बच्चों के लिए पेश किया जाता है। मतल नामक कहानियों के चरित्र अधिकार पशु पंछी या फिर पेड़े पौधे और नदी व पहाड़ आदि होते हैं किंतु कभी कभी मनुष्यों को भी इस प्रकार की कथाओं में भूमिका मिलती है। इस प्रकार की लघु कथाओं में बच्चों के मनोरंजन के साथ ही साथ उन्हें सीख देने का प्रयास भी किया जाता है और बच्चे, अपने आस पास की वस्तुओं से इस प्रकार की कहानियों द्वारा परिचित होते हैं और अपनी भूमि व अपने क्षेत्र से प्रेम उनके मन में पैदा होता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मतल वास्तव में बाल साहित्य की एक अत्याधिक प्रचलित शैली है जो कविता और कहानी को एक दूसरे में गूंथ देती है और आज बाल साहित्य के रूप में मौजूद हमारी धरोहर का एक बड़ा भाग इसी प्रकार की कहानियों का संग्रह है। वास्तव में मतल नामक शैली पर ध्यान देने से पता चलता है कि इसे बच्चों के लिए तैयार किया जाता था क्योंकि इसमें साहित्य की झलक होती और छोटे छोटे भागों में कविता के रूप में कहानी को आगे बढ़ाया जाता है। मतल नामक लघु कथा की शैली वास्तव में अपने देश के साहित्य व आगे जाकर कहानियों से बच्चों को परिचित कराने के लिए अपनायी गयी थी।
    मतल कविता की एक विशेषता, बच्चे को नाटकीय अवस्था में पहुंचाना होता है जिसके कारण वह प्रतिक्रिया पर विवश हो जाता है और इस प्रकार से मतल शैली से कहानी सुनने वाला बच्चा स्वंय भी उसका पात्र बन जाता है।

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