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    वचन पूरा करना

    वचन पूरा करना
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    वचन को पूरा करना सभी को अच्छा लगता है। चाहे उसका संबंध किसी भी धर्म या जाति के व्यक्ति से हो। वादा या वचन का अर्थ होता है इंसान का अपने कहे हुए पर बाक़ी रहना और इसी प्रकार उसका दूसरा अर्थ दोस्ती पर बाक़ी रहना भी है।

    पति- पत्नी जिन चीज़ों की एक दूसरे से आशा रखते हैं उनमें से एक वचनबद्धता है। यानी दोनों एक दूसरे से आशा रखते हैं कि उनका जीवन साथी उनके साथ अपने किये गये वादे का पालन करेगा। इसमें वे वादे भी शामिल हैं जो विवाह से पहले किये गये हों। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेहि व सल्लम के अनुसार हर उस व्यक्ति को अपने वादे के पूरा करनी चाहिये जो ईश्वर, उसके पैग़म्बर और इसी प्रकार लोगों को वचन देता है या कोई शर्त लगाता है इस शर्त के साथ कि उसके इस वादे से ईश्वर द्वारा किया गया हलाल हराम न हो और हराम हलाल न हो” पैग़म्बरे इस्लाम फरमाते हैं कि जो भी ईश्वर और प्रलय के दिन पर ईमान रखता है उसे चाहिये कि वह अपने वचन का पालन करे”
    जो वादे हम दूसरों से करते हैं उनका पालन करना जब इतना महत्वपूर्ण है तो वो वादे जो हम अपनी पत्नी और बच्चों से करते हैं उनका पालन करना कितना महत्वपूर्ण होगा। महान व्यक्तियों के जीवन में भलिभांति देखा जा सकता है कि वे अपने जीवन में किये गये वचनों के प्रति कटिबद्ध रहते थे। इतिहास में है कि विवाह के पावन बंधन में बध जाने के बाद हज़रत अली अलैहिस्सलाम और हज़रत फातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा घर के कार्यों के बटवारे के लिए पैग़म्बरे इस्लाम की सेवा में गये। उस समय पैग़म्बरे इस्लाम ने फरमाया कि घर के अंदर के कार्यों को फातेमा अंजाम दें और घर से बाहर के कार्यों को अली अंजाम दें। उसके बाद घर के कार्यों की जिम्मेदारी हज़रत फातेमा ने ली और घर से बाहर के कार्यों की ज़िम्मेदारी हज़रत अली ने ली इन दोनों महान हस्तियों ने पैग़म्बरे इस्लाम की सेवा में जो वादे किये थे उसे अपने पूरे संयुक्त जीवन में निभाया।

    रवायत में आया है कि चार विशेषताएं जिस व्यक्ति के अंदर पायी जाती हों उसका ईमान पूरा है, उसके पाप क्षमा कर दिये जायेंगे, वह अपने पालनहार से एसी स्थिति में भेंट करेगा कि उसका पालनहार उससे प्रसन्न होगा। जो लोगों के साथ किये गये अपने वादे को पूरा करे, लोगों से सच बोले, लोगों की उपस्थिति में हर बुरे कार्य से शर्म करे और अपने परिजनों के प्रति उसका व्यवहार अच्छा हो”
    पवित्र कुरआन वचन का पालन करने को अच्छे लोगों की विशेषता बयान करता है। वह लोगों का आह्वान करता है कि वे अपने वादों को वफा करें। पवित्र कुरआन की बहुत सी आयतों में आया है कि अगर मुसलमान अपने धार्मिक भाई से कोई वादा करता है तो उसे उन्हें पूरा करना चाहिये। महान ईश्वर पवित्र कुरआन में कहता है हे ईमान लाने वालो अपने वादों का पूरा करो”

    वचन का सम्मान करना एक प्राकृतिक चीज़ है और यह एसी चीज़ है जिसे हर इंसान पसंद करता है। इसके विपरीत वादा खिलाफी एसी चीज़ है जिसे कोई भी पसंद नहीं करता है यहां तक कि दूसरों के साथ वादे की खिलाफवर्ज़ी करने वाला भी वादा खिलाफी पसंद नहीं करता है। यही नहीं वचनों का पालन एसी चीज़ है जिसे छोटा बच्चा भी पसंद करता है। अगर माता- पिता अपने बच्चे से कोई चीज़ दिलाने का वादा करते हैं और उसे नहीं दिलाते हैं तो बच्चा नाराज़ हो जाता है। बच्चे की अप्रसन्नता इस बात की सूचक है कि बच्चा वादा खिलाफी पसंद नहीं करता है।
    कहा जा सकता है कि वादे का पूरा करना पति- पत्नी की मूल्यवान पूंजी है। पति -पत्नी जब अपने वादे को पूरा करते हैं तो एक दूसरे के प्रति विश्वास में वृद्धि होती है और अगर किसी ने परिवार के किसी सदस्य यहां तक कि बच्चे से भी कोई वादा किया है तो उसे पूरा करना चाहिये। पैग़म्बरे इस्लाम फरमाते हैं” जब भी तुममें से कोई अपने छोटे से बच्चे से वादा करे तो उसे अवश्य पूरा करना चाहिये”

    जो व्यक्ति अपने वादे को पूरा करते हैं उन्हें सब लोग पसंद करते हैं। वादे का पूरा करना और अपने वचनों के प्रति कटिबद्ध रहना वह चीज़ है जिसका पारिवारिक विशेषकर पति- पत्नी के संबंधों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। परिवार के सदस्य जितना अधिक एक दूसरे के प्रति अपने वादों को पूरा करेंगे उतना अधिक परिवार के सदस्यों यहां तक कि बच्चों में भी एक दूसरे के प्रति विश्वास में वृद्धि होगी। जब परिवार के सदस्य अपने वादों पर अमल करेंगे तो उनके मध्य प्रेम में भी वृद्धि होगी और परिवार के सदस्यों के एक दूसरे पर विश्वास में वृद्धि होगी। इस प्रकार परिवार के सदस्य अधिक शांति का आभास करेंगे।
    हां जहां वादे का पूरा करना और वचनों के प्रति कटिबद्ध रहने का बहुत अधिक प्रभाव है वहीं पर वचन पूरा न करने का भी बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जो व्यक्ति वादे को वफा नहीं करता लोग उस पर विश्वास नहीं करते हैं और इससे लोगों में अविश्वास एवं मित्थ्याचार की भावना पैदा होती है। जिस दिन एसा हो गया कि किसी परिवार में वादे को कोई महत्व न दिया जाये तो उसी दिन से बच्चों की प्रशिक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    माता- पिता बच्चों से वादा करने पर विवश नहीं हैं परंतु अगर उन्होंने बच्चे से कोई वादा कर लिया हो तो उसे अवश्य पूरा करना चाहिये। जब माता- पिता अपने बच्चों से कोई वादा करते हैं उन्हें चाहिये कि वे उसे पूरा करें वरना बच्चे उन्हें वादा का पालन न करने वाला समझेंगे। धीरे- धीरे उनकी बातों से बच्चों का विश्वास उठ जायेगा यहां तक कि इस्लामी शिक्षाओं व सिद्धांतों के प्रति उसका विश्वास भी कमज़ोर हो जायेगा। अगर माता- पिता वादे की खिलाफवर्ज़ी करेंगे तो शिक्षा- प्रशिक्षा के सुन्दर शब्दों के माध्यम से भी उसकी भरपाई नहीं की जा सकती और बच्चे के दिमाग़ से यह बात नहीं मिट सकती। बच्चे माता- पिता को अपना आश्रय और अपने जीवन की आवश्यकताओं की आपूर्ति करने वाला समझते हैं। जब बच्चे अपने माता- पिता की कथनी और करनी में अंतर देखेंगे तो वे स्वयं को आश्रयहीन समझेंगे और किसी अन्य पर भी भरोसा नहीं करेंगे। इस संबंध में पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पवित्र परिजनों के विभिन्न कथन मौजूद हैं। पैग़म्बरे इस्लाम फरमाते हैं” अपने बच्चों से प्रेम करो और उनके साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करो और अगर उनसे किसी चीज़ का वादा करो तो उसे पूरा करो”

    इस बात में कोई संदेह नहीं है कि एक परिवार के सफल होने के विभिन्न कारक होते हैं। पिछले कुछ कार्यक्रमों में हमने इस बात को बयान करने का प्रयास किया कि कौन से कारक पति -पति के संबंधों के बेहतर होने में प्रभावी हैं। इसी प्रकार हमने कुछ उन नैतिक सिद्धांतों की ओर संकेत किया था जो पति- पत्नी के संबंधों को मधुर होने में प्रभावी हैं। कुल मिलाकर कहना चाहिये कि सफल परिवार में पति- पत्नी एक दूसरी की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। वे दोनों जीवन के मामलों में एक दूसरे से सहयोग करते हैं और विभिन्न अवसरों पर एक दूसरे के कार्यों की सराहना व प्रशंसा करते हैं एक दूसरे के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं। इस प्रकार के पति और पत्नी एक दूसरे के विकास एवं प्रगति की भूमि प्रशस्त करते हैं और एक दूसरे के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने के साथ साथ परिवार के आधारों को भी सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं। अगर पति- पति के बीच प्रेम और आपसी समझ- बूझ की कमी होगी तो उनके मध्य विवाद उत्पन्न होगा और वे एक दूसरे की आवश्यकताओं की अनदेखी करेंगे। जब पति- पत्नी एक दूसरे की आवश्यकताओं की अनदेखी करने लगेंगे तो उनके मध्य लड़ाई -झगड़ा और अवसाद जैसी समस्याएं सामने आयेंगी यहां तक कि तलाक़ की भी नौबत आ सकती है।

    ईरानी मनोचिकित्सक डाक्टर गुलाम अली अफरूज़ पति- पत्नी के बीच अच्छे संबंधों के महत्व की ओर संकेत करते हुए कहते हैं कि अच्छे जीवन साथी हर परिस्थिति में पूरे परिवार विशेषकर एक दूसरे की प्रगति के बारे में सोचते हैं। पति- पत्नी अच्छी तरह जानते हैं कि अच्छे और शांतिपूर्ण वातावरण में ही उनकी, उनके परिवार तथा उनके बच्चों की प्रगति हो सकती है। अच्छे पति -पत्नी सदैव उन मार्गों के बारे में सोचते रहते हैं जो एक दूसरे की प्रगति व उन्नति का कारण बनते हैं। अच्छे पति- पत्नी एक दूसरे का सम्मान करते हैं और एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं। दूसरे शब्दों में अच्छे पति- पत्नी वे हैं जो एक दूसरे के साथ शांति का आभास करते हैं। ऐसे पति पत्नी के विवाह के पवित्र बंधन में बंधे हुए जितना समय गुज़रता जाता है उनके बीच संबंध और मधुर होता जाता है।