islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. वरिष्ठ नेता ने ईरानी राष्ट्र की ज़ायोनी विरोधी विशाल रैली की प्रशंसा की।

    वरिष्ठ नेता ने ईरानी राष्ट्र की ज़ायोनी विरोधी विशाल रैली की प्रशंसा की।

    Rate this post
    वरिष्ठ नेता ने क़ुद्स दिवस पर ईरानी राष्ट्र की ज़ायोनी विरोधी विशाल रैली की प्रशंसा की।
    इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने ईद के अवसर पर ईरानी राष्ट्र व विश्व के मुसलमानों को बधाई दी और क़ुद्स दिवस पर ईरानी राष्ट्र की ज़ायोनी विरोधी विशाल रैली की प्रशंसा की। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने तेहरान विश्वविद्यालय में ईदुल फ़ित्र की नमाज़ के ख़ुतबों में ईरानी राष्ट्र व विश्व के मुसलमानों को ईद की बधाई दी और क़ुद्स दिवस को सत्य की रक्षा और अत्याचार के विरुद्ध न्याय की लामंबदी का प्रतीक बताया। उन्होंने क़ुद्स दिवस पर इस्लामी जगत की उपस्थिति को प्रभावित करने के विदेशी संचार माध्यमों व राजनैतिक हल्क़ों की गतिविधियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि क़ुद्स दिवस केवल फ़िलिस्तीन दिवस नहीं है बल्कि इस्लामी राष्ट्र दिवस और कैंसर समान ज़ायोनी शासन के विरुद्ध इस्लामी जगत की गुहार का दिन है। वरिष्ठ नेता ने कुछ देशों के राष्ट्रध्यक्षों के भयभीत होने और उनके द्वारा उन संचार माध्यमों से धोखा खाने की ओर संकेत किया जो यह सोच रहे थे कि ईरानी राष्ट्र के संकल्प को प्रभावित कर देंगे, कहा क़ुद्स दिवस ने संकल्प की निष्ठा और विश्व के कोने कोने तक फैली ईरानी राष्ट्र की महानता को प्रदर्शित कर दिया। उन्होंने ईद की नमाज़ के एक अन्य ख़ुतबे में पवित्र रक्षा दिवस के आगमन की ओर संकेत करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में ईरानी राष्ट्र की सफल उपस्थिति और महान वैज्ञानिक उपलब्धियों का श्रेय उन क्षमताओं को दिया जो पवित्र रक्षा काल में ईरानी राष्ट्र के भीतर फली फूलीं। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने चुनावों के पश्चात की घटनाओं में लिप्त आरोपियों की न्यायालय में सुनवाई और उनके द्वारा अपराधों की स्वीकारोक्ति की ओर संकेत करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपियों की स्वीकारोक्ति उनके विरुद्ध सिद्ध है किन्तु दूसरों के विरुद्ध उनके आरोप उस समय तक अमान्य हैं जब तक आरोप सिद्ध नहीं हो जाते। उन्होंने बल देकर कहा कि कुछ आरोपियों के बयान के आधार पर दूसरों पर आरोप नहीं लगाया जा सकता और यह स्वीकारीय नहीं है, यह अत्याचार है और धर्म भी इसकी अनुमति नहीं देता।दूसरी ओर वरिष्ठ नेता ने आज तेहरान में अधिकारियों, विभिन्न वर्गों के लोगों और इस्लामी देशों के राजदूतों से भेंट में कहा कि व्यवस्था की नीति इस्लामी, क़ुरआन और इस्लामी आदेशों तथा अत्चारग्रस्त लोगों की रक्षा पर आधारित है और वर्चस्ववादी व्यवस्था की इस्लामी गणतंत्र ईरान से शत्रुता का कारण भी यही विषय है। उन्होंने सैनिक उपकरणों व शस्त्रों के प्रयोग से ज़ायोनी शासन को समाप्त करने के ईरान के प्रयास पर आधारित पश्चिमी संचार माध्यमों के झूठे दावों की ओर संकेत करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान के पास फ़िलिस्तीन के मामले के लिए एक तर्कपूर्ण व मानवीय सुझाव है जिसे उसने पेश किया है। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने बल देकर कहा कि यदि इस्लामी जगत में एकता होती और वह अपनी समस्त राजनैतिक व भौगोलिक क्षमता का प्रयोग करता तो आज फ़िलिस्तीनी जनता और ग़ज़्ज़ावासियों की स्थिति एसी न होती और धौंस धमकी देने वाली शक्तियां कभी भी अपनी योजनाएं इस्लामी सरकार पर न थोप पातीं। उन्होंने कहा कि वर्चस्ववादी शक्तियां और मुख्य रूप से अमरीका इस्लामी जगत में एकता को रोकने के लिए दो हत्कंडे अपनाए हुए है और वह है इस्लाम और ईरान को ख़तरा दर्शाना। उन्होंने अमरीका के ईरान की रक्षा क्षमता को ख़तरनाक दर्शाने के दावे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने गत तीस वर्षों के दौरान किसी भी देश पर आक्रमण नहीं किया है और ईरान की इस्लामी देशों और अपने पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखने की नीति रही है। उन्होंने बल देकर कि इस्लामी व्यवस्था ईरानी राष्ट्र व सरकार पर अतिक्रमण की स्थिति में कदापि चुप नहीं बैठेगी