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    वा ख़ज़ाआलहा कुल्लो शैइन वज़ल्ला लहा कुल्लो शैइन 4

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    पुस्तक का नामः कुमैल की प्रार्थना का वर्णन

    लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारीयान

     

    यह विचार कर मै तेरी ओर आकर्षित हुआ तथा अपनी आशाओ को लेकर तेरे दरबार मे उपस्थित हो गया कि मुझे तेरे ऊपर भरोसा था और मुझे बोध था कि मै जितने अधिक प्रश्न कर रहा हूं वो तेरे प्रदान करने के मुक़ाबले कम है और जितना बड़ा तक़ाज़ा कर रहा हूं वो तेरे व्यापक दरबार मे कुच्छ भी नही है तेरी कृपा किसी के प्रश्न करने से कम नही होती है तथा तेरे हाथ प्रदान करने मे बहुत बड़े है। सभी प्राणीयो एक दिन कोई अस्तित्व नही था जो उल्लेखनीय होते [1]

    तेरी इच्छा और शक्ति की छाया मे पैदा हुए तथा उनका जीवन भी तेरी दया एंव कृपा की बदौलत है, किसी प्रकार का कोई इसतिक़लाल नही रखते उनके ललाट पर व्यक्तिगत ग़रीबी तथा अपमान की मुहर लगी हुई है और तेरी सनातन शक्ति के सामने ख़ाकसारी और अपमान की स्थिति मे सज्दा किए हुए है। किसी व्यक्ति को यह अधिकार नही है कि वह तेरी अनंत एंवम सनातन शक्ति के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करके अपनी अनानीयत का डंका बजाए, और हेकड़ी का नारा लगाए, और अपनी इस कम बिज़ाअती जिसका जन्म मात्र एक मुठ्ठी ख़ाक से हुआ हो वह ज़लील एंव खार है तथा उसका अस्तित्व मात्र फूंक का काम है इसके अलावा उसकी कोई वास्तविकता नही है और अपनी इस कमबुद्धि के कारण जो एक कण की वास्तविकता को समझने मे असमर्थ है अपने मोला एंव मालिक, मुदब्बिर और पालनहार की शक्ति के सामने, जिसकी शक्ति ने सभी वस्तुओ को अपने वश मे ले रखा है, उसके सामने अपनी शक्ति एंव क्षमता के नारे लगाए!! तथा यदि ऐसा करे भी तो उसकी शक्ति एंव क्षमता का बोरिया बिस्तर समेट दिया जाए तथा वह लज्जित एंव अपमानित हो जाए, और ईश्वर की कृपा से वार्जित कर दिया जाए तथा दिव्य आपदा मे गिरफ्तार हो जाए।

     

     


    [1]  وَ نَسَبْتَهُمْ اِلَى الْفَقْرِ وَ هُمْ اَهْلُ الْفَقْرِ اِلَيْكَ، فَمَنْ حاوَلَ سَدَّ خَلَّتِهِ مِنْ عِنْدِكَ، وَرامَ صَرْفَ الْفَقْرِ عَنْ نَفْسِهِ بِكَ، فَقَدْ طَلَبَ حاجَتَهُ فى مَظآنِّها، وَ اَتى‏ طَلِبَتَهُ مِنْ وَجْهِها. وَ مَنْ تَوَجَّهَ بِحاجَتِهِ اِلى‏ اَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ، اَوْ جَعَلَهُ سَبَبَ نُجْحِها دُونَكَ، فَقَدْ تَعَرَّضَ لِلْحِرْمانِ، وَاسْتَحَقَّ مِنْ عِنْدِكَ فَوْتَ الْاِحْسانِ۔۔۔ فَقَصَدْتُكَ، يا اِلهى، بِالرَّغْبَةِ، وَ اَوْفَدْتُ عَلَيْكَ رَجآئى بِالثِّقَةِ بِكَ، وَ عَلِمْتُ اَنَّ كَثيرَ ما اَسْئَلُكَ يَسيرٌ فى وُجْدِكَ، وَ اَنَّ خَطيرَ ما اَسْتَوْهِبُكَ حَقيرٌ فى وُسْعِكَ، وَ اَنَّ كَرَمَكَ لايَضيقُ عَنْ سُؤالِ اَحَدٍ، وَ اَنَّ يَدَكَ بِالْعَطايا اَعْلى‏ مِنْ كُلِّ يَدٍ.

    वा नसबतहुम एललफ़क़रे वहुम आहलुलफ़क़रे इलैका, फ़मन हावला सद्दा ख़ल्लतेही मिन इनदेका, वारामा सरफ़ल फ़क़रे अन नफ़सेहि बेका, फ़क़द तलाबा हाजतहू फ़ी मज़ान्नेहा, वअता तलेबतहो मिन वजहेहा। वमन तवज्जहा बेहाजतेहि एला आहदिन मिन ख़लक़ेका, औ जाआलहू सबाबा नुजहेहा दूनका, फ़क़द तअर्रज़ा लिलहिरमाने, वसतहक़्क़ा मिन इनदेका फ़ौतल एहसाने … फ़क़सदतोका, या इलाही, बिर्रग़बते, व औफ़दतो अलैका रजाई बिस्सिक़ते बेका, व अलिमतो अन्ना कसीरा मा असअलोका यसीरुन फ़ी वजदेका, व अन्ना ख़तीरा मा असतौहेबोका हक़ीरुन फ़ी वुसऐका, वअन्ना करामका ला यज़ीक़ो अन सुआले अहदिन, व अन्ना यदका बिलअताया आला मिन कुल्ले यदिन।