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    वा ख़ज़ाआलहा कुल्लो शैइन वज़ल्ला लहा कुल्लो शैइन 1

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    पुस्तक का नामः कुमैल की प्रार्थना का वर्णन

    लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारीयान

    وَخَضَعَ لَهَا كُلُّ شَىْء وَذَلَّ لَهَا كُلُّ شَىْء

    “वा ख़ज़ाआलहा कुल्लो शैइन वज़ल्ला लहा कुल्लो शैइन”

    तथा प्रत्येक वस्तु उसके लिए विनम्र है।

    सभी ग़ैबी ओर शहूदी प्राणी, बड़े से बड़े भौतिक एंव आध्यात्मिक प्राणी से लेकर छोटे से छोटे जीव जन्तु तक, बड़ी बड़ी आकाशगंगाओ एंव स्थिर ग्रहो से लेकर छोटे से छोटे कण ATOME  तक जिसको बड़ी से बड़ी सूक्ष्मदर्शी  MICROSCOPE  भी दिखाने मे असमस्थ है, सभी वस्तुए ईश्वर के अधीन है, उसके आदेश के सामने सभी अपने सर को झुकाए हुए दिखाई देती है, और सभी उसकी आज्ञा का पालन करने के लिए तैयार है, किसी मे भी उसके विरोध एंव अनाज्ञाकारिता की कल्पना का साहस तक नही है।

    वह प्राणी जो बिना किसी अपवाद के परमेश्वर की अपार शक्ति के सामने मक़हूर एंव मग़लूब है, इन सभी का असतित्व ऐन खुज़ूअ और ख़ुशूअ एंव ऐन जिल्लत है।

    हज़राते मासूमीन अलैहेमुस्सलाम के एक व्यक्ति की पवित्र ज़बान से निकले हुए प्रार्थना के कुच्छ वाक्यो की ओर ध्यान दे।

    “निश्चितरूप से तू ही वह परमेश्वर है जिसकी शक्ति एंव क्षमता के आगे सभी वस्तुए अपमानित है, तथा सभी वस्तुओ का शीर्ष तेरे आगे झुका हुआ है, तू जो करना चाहता है कर देता है, और जिस चीज़ का इरादा करता है उसको कर डालता है, तेरे पवित्र असतित्व ने सभी वस्तुओ को बनाया है, और तेरे ही हाथो मे सभी वस्तुओ के ओमूर है, तू ही सभी चीज़ो को आक़ा एंव मौला है, तथा सारी वस्तुए तेरे अधीन है, तेरे अलावा कोई ईश्वर नही है तू अज़ीज़ एव कृपालु है…[1]


    [1] मिसबाहुल मुताहज्जिद, पेज 802